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MP की सड़कों पर 20 साल बाद फिर दौड़ेंगी सरकारी बसें, 15 हजार बसों से बदलेगा सफर; AI से तय होंगे रूट... जानें कबसे शुरुआत

Published: Fri, 11 Sep 2026 05:42 PM (IST)

मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए 'यात्री परिवहन विजन समिट-2026' इंदौर में शुरू हुआ है। ...और पढ़ें

-एआई से निर्मित छवि।

-एआई से निर्मित छवि।

HighLights

  1. 2030 तक 15 हजार नई बसें चलाने का लक्ष्य।

  2. AI आधारित रूट प्लानिंग और डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था।

  3. EV, हाइड्रोजन, फ्लेक्स-फ्यूल बसों पर विशेष जोर।

डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नए सिरे से आधुनिक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार को दो दिवसीय 'यात्री परिवहन विजन समिट-2026' का शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि करीब दो दशक बाद प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में नया और आधुनिक मॉडल लागू किया जा रहा है। इसमें अत्याधुनिक तकनीक के जरिए यात्रियों को सुगम, तेज और सुरक्षित परिवहन सुविधा देने पर जोर रहेगा।

2030 तक 15 हजार बसें चलाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश में करीब 15 हजार नई बसें संचालित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का प्रयास है कि निजी ऑपरेटरों को आधुनिक तकनीक और नई परिवहन प्रणालियों से जोड़ा जाए, ताकि प्रदेश में बस सेवा का नेटवर्क मजबूत हो सके।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में पहले से 5 लाख किलोमीटर से अधिक का सड़क नेटवर्क मौजूद है। यात्रियों की बढ़ती संख्या और पर्यटन गतिविधियों में तेजी के कारण इस नेटवर्क पर आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या ने बढ़ाई चुनौती

धार्मिक पर्यटन में तेजी का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में जहां पहले सालाना करीब 60 से 70 लाख श्रद्धालु पहुंचते थे, वहीं हाल के वर्षों में यह संख्या बढ़कर 8 करोड़ से अधिक हो गई है। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन के विस्तार और आधुनिकीकरण को जरूरी बताया गया।

25 सितंबर को मिलेगी नई परिवहन सेवा की सौगात

'सेवा संकल्प माह' के तहत 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसी क्रम में 25 सितंबर को प्रदेशवासियों को नए परिवहन मॉडल की पहली आधिकारिक सौगात मिलने की बात मुख्यमंत्री ने कही।

सरकार की योजना सार्वजनिक परिवहन को केवल बसों की संख्या बढ़ाने तक सीमित रखने के बजाय इसे तकनीक आधारित, सुरक्षित और यात्री-केंद्रित बनाने की है।

EV, हाइड्रोजन और फ्लेक्स-फ्यूल बसों पर जोर

मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण को देखते हुए सरकार अब इसका लाभ प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन में भी पहुंचाने की तैयारी कर रही है। इंदौर मेट्रो के बाद इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और फ्लेक्स-फ्यूल बसों के संचालन पर फोकस किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देकर परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाएगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस पारंपरिक भगवा रंग की बसों को भी नए स्वरूप में सड़कों पर उतारने की योजना है।

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AI तय करेगा रूट, डिजिटल टिकटिंग से आसान होगा सफर

समिट में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रूट प्लानिंग, डिजिटल टिकटिंग और ग्रीन मोबिलिटी समेत आठ प्रमुख विषयों पर विशेषज्ञ मंथन कर रहे हैं।

सरकार का लक्ष्य आईटी और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर ऐसा परिवहन तंत्र तैयार करना है, जिसमें यात्रियों की जरूरत के अनुसार रूट और सेवाएं तय हों, टिकटिंग व्यवस्था डिजिटल हो और ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल से प्रदूषण कम किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को सुगम, सुरक्षित, तकनीक आधारित और आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है। निजी ऑपरेटरों की भागीदारी, नई ऊर्जा से चलने वाले वाहन और AI आधारित व्यवस्थाओं के जरिए सरकार वर्ष 2030 तक प्रदेश के मोबिलिटी सिस्टम को नए स्वरूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।