इंदौर, जेएनएन। मध्य प्रदेश के इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत ने बुधवार को शिक्षाविदों के साथ चर्चा की। इस मौके पर मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा में राष्ट्रवाद को बढ़ावा मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, राष्ट्र निर्माण के लिए जिन महापुरुषों ने काम किया, उनके बारे में युवा पीढ़ी को जानना चाहिए। कोरोनाकाल के कारण समाज में नकारात्मकता का माहौल बढ़ गया है, इसे दूर करने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर भी है। उन्होंने शहर के कुछ उद्योगपतियों से भी बात की। मंगलवार को भी संघ प्रमुख ने कुछ उद्यमियों से मुलाकात की थी। संघ प्रमुख ने शिक्षाविदों से डेढ़ घंटे तक खुलकर चर्चा की। उनसे सुझाव लिए और उनके कई सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने संघ की कार्यशैली के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान शिक्षाविदों के सवालों का जवाब मोहन भागवत ने इस तरह दियाः

शिक्षा नीति में बदलाव की जरूरत है। हम अंकों पर काफी जोर देते हैं।

अच्छा राष्ट्र निर्माण अच्छे समाज और अच्छे व्यक्तियों से ही संभव है। नई शिक्षा नीति तो आ रही है, लेकिन शिक्षकों को अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन भी करना होगा। हम समाज से लेते हैं तो लौटाने पर भी जोर दें। चाहे धन हो या शिक्षा, समाज को लौटाने से ही आपका यश बढ़ेगा। स्वामी विवेकानंद ने अपने ज्ञान की ज्योति समाज में फैलाई, तभी उनका नाम हुआ।

हम राष्ट्र निर्माण में किस प्रकार योगदान कर सकते हैं?

आप कोर्स के लिए तो कक्षाएं लेते हैं, लेकिन पखवाड़े या माह में अलग से राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषय भी विद्यार्थियों को बताएं। (डा. भागवत ने राष्ट्र निर्माण से जुड़ी कुछ किताबों के नाम भी बताए।)

आरएसएस के बारे में कई बार दुष्प्रचार होता है। संघ के काम को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

संघ राष्ट्र निर्माण के लिए काम करता है। आजादी से पहले संघ की स्थापना हुई है। यदि संघ की समाज में नकारात्मक भूमिका होती तो आज हम इस मुकाम पर नहीं पहुंचते, जहां हैं। हम मजबूत राष्ट्र के लिए समाज में जागरूकता लाने का प्रयास करते हैं।

प्रार्थना का शुभारंभ

डा. भागवत ने संघ की प्रार्थना का सांकेतिक भाषा में शुभारंभ किया। आनंद मूक-बधिर संस्थान की मोनिका पुरोहित ने उन्हें बताया कि मूक-बधिर बालिकाओं और महिलाओं के साथ बहुत आपराधिक घटनाएं होती हैं। उनकी मदद के लिए देश का पहला मूक-बधिर थाना इंदौर में ही खुला है। ऐसे थाने दूसरे शहरों में भी खोले जाना चाहिए। डा. भागवत ने कहा कि ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए समाज में जागृति फैलाएं।

Edited By: Sachin Kumar Mishra