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मध्य-पूर्व युद्ध की वजह से दवा उद्योग प्रभावित, कच्चा माल महंगा, अस्पतालों में आपूर्ति बाधित होने का खतरा

Published: Sat, 21 Mar 2026 08:59 AM (IST)

मध्य-पूर्व एशिया में जारी युद्ध के कारण भारतीय दवा उद्योग संकट में है। कच्चे माल की कीमतें 30-70% तक बढ़ी ...और पढ़ें

दवा उद्योग पर संकट (प्रतीकात्मक चित्र)

दवा उद्योग पर संकट (प्रतीकात्मक चित्र)

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डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य-पूर्व एशिया में जारी युद्ध से दवा उद्योग भी अब संकट में आ गया है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग को होने वाली दवा आपूर्ति भी संकट में पड़ सकती है। एमएसएमई श्रेणी के दवा उद्योग जो सरकार को दवा आपूर्ति करते हैं, उनके लिए बड़ी लागत से तालमेल बैठाना मुश्किल हो गया है।

सरकार से सहयोग की मांग

इस बीच कई तरह के कच्चे माल की आपूर्ति भी तंग है। दवा उद्योगों ने सरकार से सहयोग की मांग की है। सरकारी आपूर्ति के टेंडरों की मियाद बढ़ाने से लेकर राहत पैकेज की जरूरत बताई है। साथ ही जीवन रक्षक दवाओं के लिए नए दामों पर अलग से शॉर्ट टेंडर जारी करने की जरूरत करार दी गई है।

लघु और मध्यम दवा निर्माताओं पर ज्यादा दबाव

स्माल एंड मीडियम ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन ने सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर बदली परिस्थितियों के हिसाब से नीतियों को बदलने की मांग रखी है। दवा उद्योगों के प्रतिनिधियों के अनुसार कच्चे माल की तेजी से बढ़ी कीमतों, सप्लाई चेन में बाधाओं तथा सरकारी सप्लाई अनुबंधों की सख्त समय-सीमा के कारण हजारों छोटे और मध्यम दवा निर्माता भारी दबाव में हैं।

एमपी स्माल एंड मीडियम ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन ने कहा है कि यदि शीघ्र राहत नहीं दी गई, तो आने वाले दो-तीन महीनों में बड़ी संख्या में दवा निर्माण कर रही इकाइयां बंद हो सकती हैं। केंद्रीय एवं राज्य स्वास्थ्य निकायों को व अस्पतालों को होने वाली जेनरिक दवा की आपूर्ति का 90 प्रतिशत हिस्सा इन एमएसएमई दवा इकाइयों से ही जाता है।

विदेश पर निर्भरता और बढ़ती लागत

स्माल एंड मीडियम ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. दर्शन कटारिया ने कहा कि देश की दवा फैक्ट्रियों में आने वाला कच्चा माल करीब 75 प्रतिशत विदेश से आता है। इसकी कीमतें 30 से 70 प्रतिशत तक बढ़ी हैं। साथ ही बदली परिस्थितियों में पैकेजिंग व अन्य सामग्री भी सिर्फ नकद भुगतान पर ही मिल रही है। जबकि सरकार को आपूर्ति के बाद महीनों तक भी दवा उद्योगों को भुगतान प्राप्त नहीं होता।

ये रखी मांगें

स्माल एंड मीडियम ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के सचिव अजयसिंह दासुंदी कहते हैं कि सरकार यदि कुछ कदम उठाए तो इस संकट से राहत मिल सकती है। दरअसल जो पूर्व के कांट्रेक्ट हैं, उनकी आपूर्ति की मियाद में 60 दिनों का विस्तार देने का निर्णय तुरंत लेना चाहिए। सरकारी आपूर्ति में देरी होने पर सरकार दंड लगा देती है। ऐसे प्रावधानों को ताजा स्थिति में निलंबित कर देना चाहिए।

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साथ ही उद्योगों को सरकार को की गई आपूर्ति के पुराने भुगतान लंबित हैं, ऐसे तमाम भुगतानों का तुरंत निपटारा होना चाहिए। जो अत्यावश्यक जीवनरक्षक दवाएं हैं, उनकी 6 माह की आवश्यकता पूर्ति के लिए शॉर्ट टेंडर जारी हो, जिसका भुगतान नकद किया जाए।

यदि ऐसा नहीं हुआ तो सप्लाई में देरी के कारण कई दवा निर्माता ब्लैकलिस्ट होने के खतरे में हैं, या फिर भारी नुकसान उठाकर सप्लाई करने पर वित्तीय रूप से दिवालिया होने की कगार पर पहुंच जाएंगे।