शहर का विकास करना है तो स्वास्थ्य, शिक्षा, इन्फ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा। स्वास्थ्य में बेहतर होने के लिए सरकारी अस्पतालों को उच्च स्तर पर ले जाना होगा। बच्चों को शिक्षा में आगे रखना है तो समाजिक माहौल सुधारना होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर में अव्वल आना है तो प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भागीदारी समझनी होगी। सुरक्षा के मामले में इंटरनेट से जितना अधिक हो सके बचें और अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा जरूरी है, व्यवसाय में आ रही चुनौतियों को स्वीकार कर आगे बढ़ना।

ये सुझाव शनिवार को 'नईदुनिया" कार्यालय में आयोजित माय सिटी माय प्राइड कार्यक्रम के तहत राउंड टेबल कांफ्रेंस में विषय विशेषज्ञों ने दिए। सभी विषयों में समाज की प्रमुख भागीदारी को ही केन्द्र में रख कर चर्चा की गई। बताया गया कि समाज इन पांचों मुद्दों के सुधार पर ध्यान दे तो शहर को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। थोड़ा सा विकास आने वाले दिनों में इंदौर को भी देश का पहला रहने लायक शहर बना सकता है।

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मास्टर प्लान में संशोधन जरूरी
शहर के मास्टर प्लान में संशोधन की आवश्यकता है। इसे बढ़ावा मिलना चाहिए, हालांकि कई स्थानों पर सुधार हुआ है, जो नए प्लान तैयार कर रहे हैं, उनमें शहर की जरूरतों को ध्यान रखा जा रहा है। यदि प्लानिंग सही होती है तो चौराहों के चौड़ीकरण और सड़क के छोटे-बड़े होने की जरूरत को पूरा किया जा सकता है। साथ ही प्लान तैयार करते समय छोटी बातों का ध्यान रखा जाए तो शहर विकास में आ रही बाधाओं को दूर किया जा सकता है।
- सुधीर देड़गे, मेयर इन काउंसिल सदस्य

ग्रीन बेल्ट की सड़कों को संवारने का हो प्रयास
नगर निगम शहर में लगातार विकास कर रहा है, मूसाखेड़ी, महेश नगर, बड़ा गणपति क्षेत्र की जो नई सड़क बनी है, उसमें मास्टर प्लान का नियमानुसार पालन किया गया है। एमआर-11 सहित अन्य सड़कों को लेकर भी लगातार काम चल रहा है। जरूरत है तो ग्रीन बेल्ट की सड़कों को संवारने की। यहां पौधों को बचाने का प्रयास करना होगा। लोगों को ओपन प्लेस उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। नेहरू पार्क के पास वन विभाग की भूमि भी ले रहे हैं, जिससे कि पार्क का एरिया और अधिक बढ़ाया जा सके।
- शंकर यादव, मेयर इन काउंसिल सदस्य

नगर निगम में भी जरूरी ट्रैफिक इंजीनियर
शहर विकास में ट्रैफिक भी एक बड़ा विषय है। ट्रैफिक इंजीनयर की जरूरत नगर निगम में भी है। इससे निगम भी ट्रैफिक को दुरुस्त रखने के लिए प्रयास कर सकता है। इसके लिए वार्ड और जोन के हिसाब से प्लान बने तो व्यवस्थित विकास हो सकेगा। एक और समस्या है, शहर में बिछे वायरों की। इसके लिए शहर में जितने भी तारों का जाल है, उसे जमीन में पाइप बिछाकर एक साथ किया जाए। पानी और तारों के लिए अलग-अलग पाइप बिछाए जाएं। खान नदी को साफ करने के लिए भी नगर निगम, प्रशासन और समाजसेवियों ने प्रयास किए लेकिन वे विफल रहे। उस पर अब तक व्यवस्थित काम नहीं हुआ। काम नहीं होने का मुख्य कारण बजट की कमी भी रही।
- रामेश्वर गुप्ता, अध्यक्ष अभ्यास मंडल

मोबाइल उपयोग करने वाले का सारा डेटा हो रहा शेयर 
सुरक्षा घर से शुरू होती है। हमारे बच्चे और महिलाएं इंटरनेट की घुसपैठ से सुरक्षित नहीं है। इंटरनेट अब परिवार के दिमाग से खेलने लगा है। हम जितना अधिक उसका उपयोग करते हैं, उतना ही निजी डेटा हमारा चोरी हो रहा है। हमें पता ही नहीं चलता कि कब बच्चे और महिलाओं के साथ घटनाएं घटने लगती है। ब्लू व्हेल इसका बहुत बड़ा उदाहरण है, जो आत्महत्या तक करा सकता है। महिलाएं सोशल मीडिया के कारण अधिक आत्महत्या कर रही हैं।

बच्चों को बचाना और समाज को सुरक्षित करना बहुत जरूरी है। आईटी एक्ट में बहुत से संशोधन की जरूरत है। रोटी, कपड़ा, मकान की तरह सुरक्षा को भी यदि जरूरी मानकर काम किया जाएगा तो आधी से ज्यादा समस्या वैसे ही हल हो जाएगी।
- शैलेन्द्र सिंह चौहान, एएसपी

खाने में मिलावट के कारण हो रही बीमारी, अब तक सख्ती के इंतजाम नहीं
जो लोग स्वस्थ रहने के लिए फलों का उपयोग बड़े पैमाने पर करते हैं, उन्हें यह नहीं पता कि उसमें कितनी अधिक मिलावट हो रही है। महिलाओं के ब्रेस्ट कैंसर बढ़ने का कारण भी फल का अधिक उपयोग है, क्योंकि फलों में पेस्टीसाइड और इंसेक्टिसाइड का उपयोग हो रहा है। कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जिसमें मां के दूध में भी केमिकल की कुछ मात्रा पाई गई है। यदि यह दूध भी इस हानिकारक केमिकल से नहीं बच पा रहा है, अंदाजा लगाया जा सकता है कि हम किस खतरे के बीच जी रहे हैं। यही दूषित खाद्य कई प्रकार के कैंसर को जन्म देता है। मेडिकल में भी कई समस्याएं हैं, जिन्हें दूर करना जरूरी है। महिलाओं को समय पर जांच कराना जरूरी है।
- हेमंत जैन, अधीक्षक, चाचा नेहरू अस्पताल

सरकारी अस्पतालों को बेहतर करने पर जोर
निजी अस्पतालों के बजाए सरकारी अस्पतालों को बेहतर करने पर जोर देना होगा। वर्तमान में एमवाय अस्पताल में सुविधाएं हैं, लेकिन अन्य अस्पतालों में नहीं होने की वजह से एक ही अस्पताल पर दवाब बढ़ रहा है। अन्य अस्पतालों में भी सुविधा मुहैया करानी होगी। इसको लेकर प्लान बनना जरूरी है। कई बार लोग भटकते रहते हैं पर सुविधा नहीं मिल पाती। हम कैंसर जैसी बीमारी होने के बाद 100 घंटे उसे ठीक करने पर जोर देते हैं। यदि उसके रोकने पर पहले से ही तैयार रहें तो कई लोगों को कैंसर से बचाया जा सकता है।
- सलिल भार्गव, टीवी व चेस्ट डिपार्टमेंट प्रभारी, एमजीएम मेडिकल कॉलेज

जरूरत नहीं फिर भी करते हैं सिजेरियन
जिसके पास थोड़े पैसे हैं, वह थोड़ा इलाज करवा सकता है। अधिक पैसा है तो उसका इलाज बहुत ही अच्छे तरीके से होगा, लेकिन जिसके पास पैसा नहीं है, वह इलाज नहीं करा सकता। इसका सीधा कारण है कि डॉक्टर निजीकरण की तरफ रूख कर रहे हैं। सबको उपचार मिले ऐसा सिस्टम तैयार करना होगा।

एक और बिडंबना यह है कि अधिकतर बच्चे ऑपरेशन से ही पैदा होते हैं, इसका डेटा बहुत ज्यादा है। कारण यह है कि यहां कोई पूछता ही नहीं कि ऑपरेशन से बच्चा पैदा क्यों किया। जबकि अन्य देशों में ऐसा नहीं है। कई नियम हैं, जो यहां पर भी बनना होगा। इंदौर को मेडिकल हब बनाने की जरूरत नहीं है, जरूरत है तो केवल चिकित्सा को बेहतर करने की।
- डॉ संजय भालेराव, शिशु रोग विशेषज्ञ

शिक्षा व्यवस्था में निरंतर बदलाव की जरुरत
शिक्षा में सुधार और बदलाव की बहुत अधिक जरूरत है। सीबीएससी स्कूलों में भी पढ़ने के बाद जब बच्चा कॉलेज में पहुंचता है, तब उसे पता ही नहीं होता कि उसे क्या बनना और करना है। सेमेस्टर और वार्षिक दोनों ही सिस्टम पढ़ाई के लिए बेहतर है।

सेमेस्टर सिस्टम इसलिए भी लागू किया गया था, ताकि बच्चे परीक्षा के कारण छह महीने में ही तैयारी कर लें, लेकिन जब रिजल्ट देरी से आए और दूसरे सेमेस्टर के लिए पढ़ाई का समय ही नहीं मिला तो फिर से बदलाव करना पड़ा। स्कूलों और कॉलेजों में काउंसलिंग कोर्स चलाना जरूरी है, जिससे कि विद्यार्थियों को पता चले कि वह जो पढ़ाई कर रहा है, वह भविष्य के लिए सही है या नहीं।
- अजय वर्मा, प्रभारी रजिस्ट्रार, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय

चुनाव आयोग की तरह बने शिक्षा आयोग
शिक्षा का क्षेत्र ऐसे लोगों के हाथ में है, जिनका शिक्षा से दूर-दूर तक वास्ता नहीं। शिक्षक सीधे बच्चों से और शिक्षा से जुड़ा हुआ होता है, शिक्षा सुधार में शिक्षक की राय ही नहीं ली जाती। नियम बनाने वाले ऐसे लोग होते हैं, जिन्हें यह पता नहीं होता कि इसका शिक्षा और उसे प्राप्त करने वाले बच्चे पर क्या असर होगा। इसे सही करने के लिए चुनाव आयोग की तरह ही शिक्षा के लिए एक आयोग बनाना होगा, जो केवल शिक्षा पर काम करे। सरकारी स्कूलों में सुधार नहीं हो रहा है, इसलिए बच्चे निजी स्कूलों की तरफ जा रहे हैं। समाज को स्वस्थ माहौल तैयार करना होगा।
- मोहित यादव, चेयरपर्सन, सहोदय ग्रुप

जीएसटी आने वाले समय की प्लानिंग
जीएसटी आने वाले समय को देखकर बनाया गया है। इसमें समाहित कर लगाए गए हैं, जबकि पहले व्यापारियों को अलग-अलग कर देना होता था, जिसमें व्यापारियों को ही परेशानी होती थी। बदलाव व्यापार ध्वस्त करने के उद्देश्य से नहीं किया गया, बल्कि उसे और आगे ले जाने के हिसाब से किया गया है। एक समय जब टीडीएस आया था तो उसे कम्प्यूटर पर आने में लगभग 10 साल लग गए। इस तरह जीएसटी है, इसमें भी समय लगेगा। इसमें व्यापारियों को भी सहयोग करना होगा। इससे अर्थ व्यवस्था मजबूत होगी, साथ ही विकास में भी मदद मिलेगी।
- जेपी सर्राफ, सीए और सेकेट्री टैक्स और प्रैक्टिसनर्स एसोसिएशन

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By Nandlal Sharma