इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

'जब तक मैं अपने घर यानि कंपनी के लोगों को अच्छे से नहीं रख पाऊं, तब तक मैं बाहर के लोगों की मदद की सोच कैसे सकती हूं। जो हमें आज दूसरों की मदद करने लायक बना रहे हैं पहले हमें उनके बारे में तो सोचना होगा। अगर मैं बाहर बहुत काम करुं और मेरी खुद की कंपनी के कर्मचारियों का परिवार थोड़े से पैसे के लिए संघर्ष करता रहे तो ऐसा सोशल वर्क किसी काम का नहीं।' यह सोच है वायु इंडिया (vaayu india ) की फाउंडर प्रियंका मोक्षमार की। यह कंपनी एसी बनाती है जिसका तापमान ग्रीन टेम्परेचर के हिसाब से ही सेट रहता है।'

मोक्षमार कहती हैं कि कॉरपोरेट सोशल रेस्‍पॉन्‍सबिलिटी (सीएसआर) के लिए कई उद्यमी और कंपनियां बाहर के लोगों के लिए काम करती हैं। इस बारे में हम थोड़ा हटकर सोचते हैं। यही वजह है कि vaayu india कंपनी द्वारा जिन कामों को आउटसोर्स किया जाता है। उनमें से कई काम उन कंपनी के कर्मचारियों की पत्नियों को दिए जाते हैं, जिनकी तन्ख्वाह 10,000 रुपए महीने से कम है।

इससे कर्मचारियों के घरों की आमदनी भी बढ़ती है और रोजगार भी मिलता रहता है। कंपनी में बनने वाले एसी में जो डस्ट फिल्टर लगाया जाता है, उसमें वेलक्रो सिलाई करनी होती है ।उसे उन महिलाओं से करवाते हैं। एक पीस सिलाने की कीमत 150 रुपए होती है और एक सप्ताह में 100 से ज्यादा फिल्टर को सिलना होता है। इस तरह इन महिलाओं की एक सप्ताह में 2 से 3 हजार रुपए की आमदनी हो जाती है, यानी वे महीने में 8000 रुपए कमा लेती हैं।

कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई में करते हैं मदद

कारीगरों के बच्चों को समय-समय पर स्टेशनरी प्रदान करने का काम भी कंपनी करती हैं। प्रियंका कहती हैं 2015 में घर बेचकर पांच लोगों के साथ शुरु की गई वायु इंडिया में आज 25 लोग काम करते हैं। देशभर के 24 शहरों के बाजार में इसकी उपस्थिति है। पहले साल 27 लाख का टर्नओवर रहा, दूसरे साल 1 करोड़ 22 लाख और तीसरे साल 2 करोड़ 77 लाख का। इस साल 11 करोड़ का टारगेट है।

कंपनी को देश की टॉप 100 एसएमई का अवार्ड भी मिल चुका है। कपंनी के को-फाउंडर प्रणव मोक्षमार कहते हैं हमारी मशीनें ग्रीन टेम्परेचर पर काम करती हैं जो कूलर और एसी के बीच का विकल्प है। इसमें 100 फीसदी आक्सीजन अंदर जाती है और बाहर जो नुकसानदायक हीट है वो नहीं जाती उसका मशीन में ही उपयोग हो जाता है। प्रणव के नाम इस तकनीक का पेटेंट भी है।

 

By Krishan Kumar