व्यावसायिकता के इस दौर में जहां व्यक्ति मिनट-मिनट का दोहन और उपयोग करने का इरादा रखता है। वहां एक शख्स तीस सालों से भी ज्यादा समय से अपने शहर और वहां के लोगों की समस्या दूर कर रहा है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए वे मसीहा से कम नहीं हैं।अपने पिता के साथ शुरू हुए मदद के इस सफर को अब हजारों हाथों का साथ मिल चुका है। अब तक लाखों मरीजों को इलाज, जांच, उपकरण आदि में मदद मिल रही है। ये शख्स हैं डॉ. अनिल भंडारी।

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1986 तक केआर भंडारी, प्रबलसिंह सुराणा, जैनावतजी एमवाय अस्पताल में घूम-घूम कर मरीजों को दवाइयां बांटते थे। 1988 में डॉ. अनिल भंडारी और उनके इंजीनियर पिता कमल भंडारी कैंसर अस्पताल की मशीन रिपेयर करने पहुंचे तो संस्था का विचार आया।

1988 में सहायता संस्था की स्थापना एमवायएच में सुप्रीटेंडेंट ऑफिस के सामने आठ बाय आठ की जगह में हुई। कई बार इसकी जगह बदली। वर्तमान में यह पुलिस चौकी के पास से संचालित हो रही है। जगह बदलती रही लेकिन संस्था का सेवा का सफर अनवरत चलता रहा।

डॉ. अनिल भंडारी बीते 30 सालों से अनवरत सेवा कार्य में जुटे हैं। उनकी संस्था द्वारा मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के 15 शहरों के सरकारी अस्पतालों में भी अपने सेंटर स्थापित किए गए। इंदौर के तीन अस्पतालों में सेवा के साथ संस्था ने खुद के 4 अस्पताल शुरू किए, ये सभी शाम को संचालित होते हैं।

 

5 लोगों से शुरू हुई सहायता संस्था में लोगों का कारवां जुड़ता गया। वर्तमान में 350 से ज्यादा समाजसेवी इससे जुड़े हैं। इनमें कई रिटायर प्रोफेसर, डॉक्टर, इंजीनियर, उद्योगपति और रिटायर ब्यूरोक्रेट्स शामिल हैं। ये सभी रोजाना पांच से छ: घंटे नि: शुल्क सेवाएं अलग-अलग केंद्रों पर देते हैं।

सभी केंद्रों पर निशुल्क दवा वितरण किया जाता है। मरीजों की जांच में भी उनकी मदद की जाती है। समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं। मरीजों को पौष्टिक आहार का वितरण किया जाता है। जरूरतमंदों को कपड़ों का वितरण भी किया जाता है।

सहायता संस्था पिछले 19 सालों से निशुल्क प्लास्टिक सर्जरी शिविर का आयोजन भी कर रही है। एक मोबाइल अस्पताल भी संचालित किया जा रहा है। यह अस्पताल रोजाना 5 गांवों में जाता है, इसमें डॉक्टर और दवाइयां उपलब्ध रहती हैं। प्राकृतिक आपदाओं के वक्त भी संस्था ने अपनी सेवाएं देकर अमिट छाप छोड़ी है।

सहायता संस्था द्वारा इंदौर में केंद्रों पर रोजाना करीब 2 हजार मरीजों की मदद की जाती है। संस्था द्वारा मार्च 2018 तक करीब डेढ़ करोड़ रुपए की दवाई का वितरण किया जा चुका है। अब तक 8 हजार से ज्यादा एमआरआई करवाई गई। 18 हजार सीटी स्कैन करवाए गए। एक लाख से ज्यादा अन्य जांचों में मदद की गई।

रक्तदान सेवा में करीब 22 हजार यूनिट का रक्तदान करवाया गया। पौष्टिक आहार वितरण के तहत एक लाख से ज्यादा गर्भवती महिलाएं और रोगियों को पौष्टिक आहार वितरण किया गया। एमवायएच में लगभग 80 लाख रुपए के उपकरण दिए गए और आयुष्मति भवन का जीर्णोद्धार किया गया।

अस्पताल के कायाकल्प अभियान में सहायता संस्था ने अपने सहयोगियों के माध्यम से पूर्व में 10 लाख और वर्तमान में करीब 35 लाख रुपए का योगदान किया। संस्था यह सारे कार्य संस्था के सहायतार्थियों द्वारा मूक भाव से किए जाते हैं। संस्था के सदस्य कोई सम्मान स्वीकार नहीं करते।

By Krishan Kumar