अमित जलधारी, जागरण संवाददाता

देश के अन्य प्रदेशों को देखें और मध्यप्रदेश की तुलना करें तो एक बात गौर करने लायक है। हर प्रदेश की राजधानी वहां का सबसे बड़ा शहर होती है, लेकिन मध्य प्रदेश इस मामले में अनूठा है। यहां राजनीतिक रूप से राजधानी भले ही भोपाल हो, लेकिन सबसे बड़ा, सबसे विकसित और सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला शहर तो इंदौर ही है।

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विकास के मामले में भोपाल के अलावा ग्वालियर और जबलपुर जैसे दूसरे बड़े शहर भी इंदौर के सामने नहीं टिकते। विकास के लिए लगातार तड़प इस शहर का स्थायी चरित्र है और यही वजह है कि ज्यादातर मामलों में भोपाल से ज्यादा तवज्जो इंदौर को मिलती है।

स्वच्छता के मामले में दो साल से टॉप टेन में
इंदौर देश के टॉप-10 तेजी से विकसित होते शहरों में शुमार है। इसके पीछे असल वजह इंदौर के लोगों का अपने शहर से बेइंतहा प्यार है। कभी सड़कों के लिए कुख्यात रहे शहर ने देश के सामने जनभागीदारी का ऐसा नमूना पेश किया कि हजारों करोड़ों रुपए की सड़कें खुद जनता ने बनवा दी। इंदौर को व्यावसायिक राजधानी का तमगा भी ऐसे ही नहीं मिल गया। मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर, अच्छा माहौल, खुशनुमा मौसम और हर तरह से सुविधा संपन्न इस शहर ने मध्यप्रदेश में एक आधुनिक महाशहर की कमी पूरी की है।

प्रदेश सरकार को कोई बड़ा आयोजन करना हो तो सबसे पहले इंदौर की ही याद आती है। इन्वेस्टर्स समिट इसका जीता-जागता प्रमाण है। केंद्र ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन इंदौर ने बखूबी किए हैं। वर्ल्ड स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस हो या थ्री-आर कॉन्फ्रेंस की मेजबानी। वर्ल्ड बैंबू समिट हो या नेशनल माइंस एंड मिनिरल्स कॉनक्लेव जैसे आयोजन, इंदौर ने सफलतापूर्वक उन्हें आयोजित कर मध्यप्रदेश का सिर हमेशा ऊंचा रखा है।

रेल, वायु और सड़क मार्ग से देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा होने के साथ हॉस्पिटैलिटी में भी इंदौर के देश के अन्य महाशहरों से पीछे नहीं है। शहर के इन्फ्रास्ट्रक्चर को आने वाले समय के लिए तैयार करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के साथ स्थानीय निकाय यहां बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर के पुराने भाग को अपग्रेड करने पर चार करोड़ रुपए की योजनाएं लाई गई हैं।

अमृत योजना के तहत शहरी परिवहन, सीवरेज और वॉटर सप्लाई के लिए 1600 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं, जिन पर तेजी से काम हो रहा है। एक समय इंदौर के पास आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग ही था, लेकिन अब नए हाइवे इंदौर के खाते में आ गए हैं। इंदौर-अहमदाबाद रोड का ज्यादातर हिस्सा फोर लेन हो चुका है, जबकि इंदौर-बैतूल और इंदौर-इच्छापुर को फोर लेन में बदलने की प्रक्रिया तेजी से हो रही है।

इंदौर-खलघाट फोर लेन को सिक्स लेन में बदलने के लिए सर्वे जारी है। आने वाले तीन-चार साल में ये परियोजनाएं पूरी होंगी तो इंदौर नए हब के रूप में विकसित होगा। इंदौर और उससे जुड़े हाईवे के विकास पर केंद्र सरकार 10000 से 12000 करोड़ रुपए की राशि खर्च कर रही है।

इंदौर के पास पीथमपुर में एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत से एशिया का सबसे बड़ा और आधुनिक सुविधाओं से लैस ऑटो टेस्टिंग ट्रैक शुरू हो चुका है, जहां कंपनियां नए-नए वाहनों के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट का काम कर सकेंगी। यह सुविधा वहां ऑटोमोबाइल कंपनियों का ध्यान खींचने में कामयाब रही है।

पीथमपुर में ही जापानी कंपनी की टाउनशिप आ रही है। टीसीएस, इन्फोसिस जैसी कंपनियों ने इंदौर को आईटी के नक्शे पर भी अंकित कर दिया है। नरजीमुंजी और सिंबायोसिस जैसे नामी शिक्षण संस्थानों ने सुपर कॉरिडोर के प्रति लोगों का आकर्षण और बढ़ा दिया है।

आईआईटी और आईआईएम यहां पहले से ही हैं। इंदौर में मेट्रो ट्रेन लाने की कवायद राज्य सरकार पहले ही शुरू कर चुकी है। 7522 करोड़ रुपए की लागत से पहला मेट्रो कॉरिडोर बनाने के लिए टेंडर बुलाए जा रहे हैं। रेलवे की बात करें तो इंदौर-दाहोद रेल लाइन पर 1600 करोड़, इंदौर-खंडवा ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट पर तीन हजार करोड़ के साथ इंदौर-उज्जैन रेल लाइन के दोहरीकरण पर 600 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। भविष्य में 10 हजार करोड़ रुपए से इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन काम शुरू होगा।

इंदौर एयरपोर्ट विस्तार के लिए 20 एकड़ जमीन देने की प्रक्रिया शासन स्तर पर अंतिम चरण में है। इससे एयरपोर्ट को भव्य अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने का काम हो सकेगा और यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने का रास्ता प्रशस्त होगा।

इंदौर से रोजाना 80 से ज्यादा उड़ानें देशभर के शहरों के लिए उपलब्ध हैं जो प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं। इस तरह इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर इंदौर और इसके आसपास बड़ी संख्या में निवेश हो रहा है। अब जिन सुविधाओं पर सबसे ज्यादा ध्यान देने जरूरत है, उनमें शहर के चारों ओर आधुनिक बस टर्मिनल और शहर का नया आधुनिक रेलवे स्टेशन प्रमुख है।

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By Krishan Kumar