इंदौर में व्यापारियों का No UPI Day: QR कोड पर काला कपड़ा ढंककर MDR शुल्क का जताया विरोध; मशाल रैली निकाली
इंदौर के व्यापारियों ने यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के विरोध में 'नो यूपीआई डे' मनाया। उन्होंने ...और पढ़ें
HighLights
इंदौर के व्यापारियों ने यूपीआई एमडीआर के खिलाफ 'नो यूपीआई डे' मनाया।
क्यूआर कोड ढंककर और मशाल रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया गया।
व्यापारियों का तर्क है कि एमडीआर का बोझ अंततः ग्राहकों पर आएगा।
डिजिटल डेस्क, इंदौर। अगले माह के मध्य से यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर इंदौर के व्यापारियों ने विरोध का मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को शहर के प्रमुख बाजारों में ‘नो UPI डे’ मनाया जा रहा है। राजवाड़ा, सियागंज, मारोठिया और सराफा समेत पुराने बाजारों में व्यापारी यूपीआई शुल्क के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।
इंदौर के व्यापारिक संगठनों का दावा है कि यूपीआई के प्रस्तावित शुल्क का असर केवल कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लेनदेन की लागत बढ़ने से इसका प्रभाव आगे ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है। विरोध के तहत मंगलवार शाम टाइल्स एवं सेनेटरी व्यापारियों ने मशाल रैली निकालकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
UPI ट्रांजेक्शन में इंदौर प्रदेश में नंबर-1
यूपीआई लेनदेन के आंकड़ों में इंदौर मध्य प्रदेश में पहले स्थान पर है। अगस्त के ट्रांजेक्शन के आधार पर देशभर में इंदौर 21वें स्थान पर रहा। प्रदेश में भोपाल दूसरे, ग्वालियर तीसरे और उज्जैन चौथे स्थान पर हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भोपाल 37वें, ग्वालियर 111वें और उज्जैन 129वें स्थान पर रहे।
125 से ज्यादा व्यापारी संगठन आंदोलन में शामिल
एमडीआर के विरोध का आह्वान अहिल्या चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने किया है। चेंबर से शहर के करीब सवा सौ व्यापारी संगठन जुड़े हैं। विरोध में पुराने बाजारों के अलावा पेट्रोल-डीजल पंप, प्लायवुड, लोहा, सेनेटरी और टाइल्स कारोबारियों के संगठन भी शामिल हैं।
रिटेल रेडीमेड गारमेंट व्यापारी एसोसिएशन ने बुधवार को राजवाड़ा पर दुकानों के यूपीआई क्यूआर कोड एकत्र कर उन्हें काले कपड़े से ढंककर विरोध दर्ज कराया। इससे पहले इंदौर सेनेटरी एंड टाइल्स व्यापारी एसोसिएशन ने मशाल रैली निकालकर गांधी प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया था।
व्यापारियों का तर्क- लागत बढ़ी तो असर ग्राहक पर आएगा
अहिल्या चेंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल का कहना है कि शुल्क का बोझ व्यापारी पर पड़ने की बात कही जा रही है, लेकिन कारोबार में किसी भी अतिरिक्त लागत को लंबे समय तक व्यापारी अकेले वहन नहीं करता। उनके अनुसार, यह लागत वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल होकर अंततः ग्राहक तक पहुंच सकती है।
व्यापारियों का तर्क है कि कारोबार की श्रृंखला में एक व्यापारी दूसरे के लिए ग्राहक होता है। ऐसे में एक स्तर पर लगने वाला शुल्क आगे के लेनदेन की लागत को भी प्रभावित कर सकता है।
निवेशकों पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका
कर सलाहकार आरएस गोयल के अनुसार प्रस्तावित एमडीआर का प्रभाव केवल खुदरा बाजार तक सीमित नहीं रह सकता। उनके मुताबिक, स्टॉक ब्रोकर के माध्यम से होने वाले कुछ बड़े लेनदेन में भी अतिरिक्त लागत की स्थिति बन सकती है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि कोई निवेशक ब्रोकर को 5 लाख रुपये ट्रांसफर करता है और उसमें से 1 लाख रुपये ही बाजार में निवेश होता है, जबकि शेष राशि नियमानुसार बाद में वापस की जाती है, तो लेनदेन की पूरी राशि पर शुल्क लागू होने की स्थिति में लागत बढ़ सकती है।
किराना और रेस्टोरेंट में सबसे ज्यादा यूपीआई इस्तेमाल
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, देश में यूपीआई लेनदेन का सबसे बड़ा हिस्सा किराना और सुपरमार्केट से जुड़ा है। कुल यूपीआई ट्रांजेक्शन में इनकी हिस्सेदारी करीब 25.8 प्रतिशत है, जबकि लेनदेन की कुल वैल्यू में हिस्सा करीब 9.7 प्रतिशत है।
इसके बाद रेस्टोरेंट बिल भुगतान में यूपीआई का इस्तेमाल करीब 18.2 प्रतिशत है। वहीं वैल्यू के लिहाज से लोन और ईएमआई भुगतान में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 8.3 प्रतिशत बताई गई है।
