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इंदौर के 'करोड़पति' हेड कॉन्स्टेबल की संपत्तियों में नया खुलासा, महिला मित्र के नाम करोड़ों की जमीन; 22 बैंक खाते लोकायुक्त के रडार पर

Published: Thu, 15 Oct 2026 11:10 PM (GMT+05:30)

लोकायुक्त पुलिस की जांच में प्रधान आरक्षक फिरोज खान की अनुपातहीन संपत्तियों से जुड़े नए तथ्य सामने आए हैं, जिसमें ...और पढ़ें

आरोपित प्रधान आरक्षक फिरोज खान।

आरोपित प्रधान आरक्षक फिरोज खान।

HighLights

  1. प्रधान आरक्षक फिरोज खान की 30 करोड़ से अधिक की संपत्ति।

  2. महिला मित्र रोशनी वर्मा के नाम करोड़ों की बेनामी जमीन।

  3. लोकायुक्त ने फिरोज के 22 बैंक खातों की जांच शुरू की।

डिजिटल डेस्क, इंदौर। लोकायुक्त पुलिस की जांच में प्रधान आरक्षक (चालक) फिरोज खान की अनुपातहीन संपत्तियों से जुड़े मामले में नए तथ्य सामने आ रहे हैं। देवास के राजोदा में एक और जमीन का रिकॉर्ड मिला है, जिसका अनुबंध फिरोज की महिला मित्र रोशनी वर्मा के नाम पर बताया जा रहा है। पिछले साल खरीदी गई इस जमीन के अनुबंध में कीमत 51 लाख रुपये दर्ज है, जबकि इसकी वास्तविक कीमत करोड़ों रुपये होने की बात सामने आई है। हालांकि, जमीन के वास्तविक मूल्य और स्वामित्व से जुड़े तथ्यों का सत्यापन जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

लोकायुक्त पुलिस को फिरोज के 22 बैंक खातों की जानकारी मिली है। इनमें से 17 खातों के स्टेटमेंट की जांच में कुल 10 लाख रुपये जमा होने का पता चला है। पुलिस ने संबंधित बैंकों को खातों से राशि निकालने पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में किए गए संभावित निवेश का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है।

30 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियों के दस्तावेज

लोकायुक्त पुलिस के एसपी डॉ. राजेश सहाय के अनुसार, प्रधान आरक्षक फिरोज खान से जुड़े 15 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। इस दौरान इंदौर और देवास में 30 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज मिले थे। इन संपत्तियों और उनके वित्तीय स्रोतों की जांच की जा रही है।

पुलिस को विभिन्न बैंकों में फिरोज के 22 खातों की जानकारी मिली है। गुरुवार को 17 खातों के स्टेटमेंट निकलवाकर उनकी पड़ताल की गई। जांच एजेंसी ने बैंक खातों के लेनदेन पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश की जानकारी के लिए संबंधित संस्थानों से संपर्क किया गया है।

जमीन विवाद में प्रभाव के इस्तेमाल का आरोप 

छापेमारी के बाद फिरोज से परेशान होने का दावा करने वाले कुछ लोग भी सामने आने लगे हैं। गुरुवार को पुवाड़ादाई (शिप्रा) और देवास के राजोदा क्षेत्र के किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। शिकायतकर्ता गौरव चौधरी ने आरोप लगाया कि फिरोज ने उसके और उसके पिता महेश चौधरी के बीच चल रहे पारिवारिक विवाद का फायदा उठाकर पैतृक जमीन के मामले में हस्तक्षेप किया।

गौरव के मुताबिक, उसके पिता की ओर से सांवेर थाने में शिकायत कराई गई और बाद में जमीन को लेकर राजस्व न्यायालय में मामला पहुंचा। उसका दावा है कि एसडीएम ने पहले उसके पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन इसके बाद फिरोज और रोशनी वर्मा की ओर से अपर कलेक्टर (राजस्व) के समक्ष अपील की गई।

राजस्व फैसले के खिलाफ कमिश्नर से मिला स्थगन

गौरव ने आरोप लगाया कि तत्कालीन अपर कलेक्टर ने उसे बुलाकर फटकार लगाई और उसके खिलाफ फैसला सुनाया। इसके बाद उसने तत्कालीन संभागायुक्त दीपक सिंह के समक्ष अपील की, जहां से उसे स्थगन आदेश मिला। गौरव ने इस पूरे प्रकरण में फिरोज के करीबी बताए जा रहे रविकांत की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। राजस्व प्रकरण के दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका का स्वतंत्र सत्यापन जांच के दौरान महत्वपूर्ण होगा।

दो महीने तक जुटाए दस्तावेज, फिर लोकायुक्त तक पहुंचा मामला

गौरव चौधरी का कहना है कि पैतृक जमीन को बचाने के लिए उसने करीब दो महीने तक दस्तावेज और अन्य जानकारियां जुटाईं। उसके अनुसार, शुरुआत में लोग फिरोज के खिलाफ खुलकर बोलने से बच रहे थे। बाद में कुछ लोगों की मदद से उसे इंदौर, देवास और उज्जैन में जमीन संबंधी मामलों और विभिन्न लोगों से जुड़े संपर्कों की जानकारी मिली।

गौरव का दावा है कि उसने जुटाए गए दस्तावेजों के आधार पर लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद फिरोज की संपत्तियों की जांच आगे बढ़ी।

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CBI अधिकारी बताकर रौब जमाने का भी आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि फिरोज कभी-कभी खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर लोगों पर दबाव बनाता था और बड़े अधिकारियों से करीबी होने का दावा करता था। गौरव के मुताबिक, फिरोज विवादित जमीनों के मामलों में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करता था और कई प्रभावशाली लोगों से उसके संपर्क थे।

शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि फिरोज का पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों से करीबी संबंध था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

फिलहाल लोकायुक्त पुलिस बैंक खातों, जमीन के दस्तावेजों और संभावित निवेश की पड़ताल कर रही है। जांच का प्रमुख पहलू यह पता लगाना है कि सामने आई संपत्तियां किसके नाम पर हैं, उनका वास्तविक वित्तीय स्रोत क्या है और क्या उनका संबंध फिरोज की आय से है।