इंदौर में EV अग्निकांड : एक साथ जली सात चिताएं, मासूम को मिट्टी में सुलाकर रो पड़ा शहर
इंदौर के तिलक नगर में इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग से हुए अग्निकांड में आठ लोगों की दुखद मौत हो गई, जिसमें ...और पढ़ें

अग्निकांड के सभी मृतकों का तिलक नगर मुक्तिधाम में अतिंम संस्कार किया गया।

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डिजिटल डेस्क, इंदौर। शहर के तिलक नगर क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड में आठ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इलेक्ट्रिक कार में चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई, जिसने तीन मंजिला मकान को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में रबर कारोबारी मनोज पुगलिया, उनकी गर्भवती बहू सिमरन समेत 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 लोग घायल हैं। मृतकों में 6 साल का बच्चा भी शामिल है।
एक साथ सात चिताएं, सन्नाटे में डूबा मुक्तिधाम
तिलक नगर मुक्तिधाम में जब एक साथ सात चिताएं सजाई गईं, तो हर तरफ सिर्फ सन्नाटा और सिसकियां थीं। जैसे ही एक-एक कर चिताओं को अग्नि दी गई, माहौल चीखों और आंसुओं से भर गया।

हादसे में छह वर्षीय मासूम की भी जान चली गई। परंपरा के अनुसार, मासूम का दाह संस्कार नहीं किया गया, बल्कि उसे मिट्टी में सुला दिया गया। जब छोटे से शव को दफनाया गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। उसके अंग अलग-अलग हो चुके थे।

अपनों का चेहरा तक नहीं देख सके
आग में जलने के कारण परिवार के सदस्य अंतिम बार इनका चेहरा तक नहीं देख सके। मनोज पुगलिया और बहू सिमरन के शव इतने ज्यादा जल चुके थे कि घर लाने पर उन्हें एंबुलेंस से नीचे तक नहीं उतारा जा सका। एंबुलेंस के भीतर ही विधि-विधान से पूजन किया गया और फिर उसी स्थिति में उन्हें मुक्तिधाम के लिए रवाना कर दिया गया।
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इंदौर से बिहार तक मातम, अपने शहर भी नहीं लौट सके शव
मृतकों में छह लोग मनोज के रिश्तेदार थे और बिहार के किशनगंज के रहने वाले थे। पोस्टमार्टम के बाद उनके शव सीधे मुक्तिधाम लाए गए। शवों की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें उनके गृह जिले ले जाना संभव नहीं था। ऐसे में स्वदन ने इंदौर में ही अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया गया। अंतिम संस्कार के लिए बिहार से स्वजन इंदौर आए।
मोहल्ले में पसरा मातम, हर चेहरा गम में डूबा
हादसे के बाद मोहल्ले में मातम पसरा हुआ है। लोग एक-दूसरे को ढांढस बंधा रहे हैं। रहवासियों ने बताया कि ऐसा दर्दनाक मंजर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। जो लोग कल तक हंसते-खेलते नजर आते थे, आज वे जिंदा नहीं बचे हैं।
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अस्पताल में तड़पता बेटा, पिता की अर्थी को नहीं दे सका कंधा
हादसे में मनोज का सबसे छोटा बेटा हर्षित भी घायल हुआ है। उसे इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। वह पिता और भाभी के अंतिम संस्कार में आने के लिए जिद करने लगा, लेकिन डाक्टर और स्वजन ने उसे समझाइश दी। अस्पताल में वह बार-बार अपने परिवार को याद कर रहा है। वह हादसे को भूला नहीं पा रहा है।
