चीता प्रोजेक्ट के चार साल... भारत में अफ्रीकी देशों से डेढ़ गुना से अधिक रही शावकों के जीवित रहने की दर; जानिए कैसे हुआ यह कमाल
भारत में चीता पुनर्स्थापना परियोजना के चार साल पूरे होने पर यह बड़ी सफलता दिखा रही है, जहां शावकों के ...और पढ़ें

कूनो अभयारण्य में चीते। (फाइल फोटो)
HighLights
कूनो में चीता परियोजना के चार साल में बड़ी सफलता मिली।
भारत में शावकों की जीवित रहने की दर 65% से अधिक।
समन्वित मानवीय निगरानी व तकनीकी साधनों का उपयोग सफल।
दीपक दंडौतिया, श्योपुर। भारत में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को बसाने के चार साल होने पर यह पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट सभी आशंकाओं को धता बताते हुए बड़ी सफलता दिखा रहा है। यहां अब तक तीन चरणों में 29 चीते लाए जा चुके हैं। इनमें से 19 जीवित हैं। केवल 10 की ही मौत हुई है, जो प्रोजेक्ट के प्रारंभ में अनुमानित 50 प्रतिशत की मृत्यु दर से काफी कम 34 प्रतिशत ही है।
यही नहीं, भारत की धरती पर जन्म लेने वाले चीता शावकों के जीवित रहने की दर 65 प्रतिशत है, जो इनके मूल अफ्रीकी देशों की औसत दर 40 प्रतिशत से डेढ़ गुना से अधिक है। भारत में जन्मी दो मादा चीता कई शावकों को जन्म दे चुकी हैं जो कूनो में विचरण कर रहे हैं।
समन्वित तरीके से किया काम
प्रोजेक्ट के प्रारंभ में विशेषज्ञों के अनुमान से कहीं अधिक मिली सफलता के पीछे सबसे अहम बात सुरक्षा व निगरानी का समन्वित तरीका रहा। कूनो में चीतों और उनके शावकों के लिए केवल तकनीकी साधनों के भरोसे न रहकर मानवीय निगरानी पर भी जोर दिया गया, जबकि अफ्रीकी देशों में चीतों को प्रसव के बाद मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाता है।
गुफा के पास भी रखी नजर
कूनो में चीता मां को परेशान किए बिना गुफा की पास से निगरानी की गई, ताकि अधिकांश शावकों को सुरक्षित रखा जा सका। कूनो नेशनल पार्क के मुख्य वन संरक्षक उत्तम शर्मा के अनुसार प्रसव के दौरान डेन साइट यानी गुफा के पास जाने से मादा चीता का व्यवहार बदलने, जगह बदलने या शावक को छोड़ने की आशंका रहती है। हमने यह जोखिम उठाकर परखा कि क्या बिना परेशान किए निगरानी संभव है।
चौबीस घंटे सतत निगरानी
100 से अधिक वनरक्षक-ट्रैकर, 24 घंटे सीसीटीवी, सैटेलाइट कालर का रियल-टाइम डाटा और ड्रोन से निगरानी के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि जब चीता मां प्रसव के तीन-चार दिन बाद बाहर शिकार पर जाए, तब टीम सुरक्षित दूरी से शावकों के स्वास्थ्य की जांच करे। यह नया तरीका गहन निगरानी और गैर-हस्तक्षेप की दूरी के बीच संतुलन बनाने में कारगर रहा। बता दें, अब कूनो प्रबंधन इस पर एक मैनुअल भी बनाएगा ताकि अन्य जंगलों में आवश्यकता पड़ने पर इनका पालन किया जा सके।
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इस तरह चली प्रोजेक्ट की सफल यात्रा
चीताः 17 सितंबर, 2022 को नामीबिया से आठ, इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से 12 और बोत्सवाना से नौ चीते लाए गए। 29 चीतों में से 19 जीवित यानी जीवितता दर 65% से अधिक। पहली बार चीतों को पीएम नरेन्द्र मोदी ने छोड़ा।
शावकः कूनो में अब तक 49 शावकों का जन्म हुआ। इनमें 33 जीवित हैं। इनके जीवित रहने की दर 67% से अधिक है।
अब 52 चीते- चार साल में भारत में अब कुल 52 चीते हैं। कूनो में 49- इनमें 15 नर, 15 मादा, 19 शावक हैं। गांधीसागर अभयारण्य में तीन चीते। इनमें दो नर, एक मादा।
मादा चीता जब शावकों को जन्म देती थी, तब उसके पास कोई नहीं जाता था लेकिन कूनो में नया सिस्टम तैयार किया गया। इससे मादा चीता के साथ नन्हे शावकों की देखरेख की जा सकती है। यह प्रयोग दुनिया में कहीं नहीं हुआ। जहां भी और जब भी परिस्थितियों ने अनुमति दी, कड़ी निगरानी रखी और हम इसमें सफल रहे।
- उत्तम शर्मा, मुख्य वन संरक्षक, कूनो नेशनल पार्क, श्योपुर
