बच्चे की आंख से दिमाग तक धंसा 5 फीट लंबा त्रिशूलनुमा बाण, ग्वालियर के डॉक्टरों ने 5 घंटे जटिल सर्जरी कर बचाई जान
ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल के डॉक्टरों ने 14 वर्षीय शिवम आदिवासी के दिमाग तक धंसे 5 फीट लंबे त्रिशूलनुमा बाण ...और पढ़ें

बच्चे की आंख में धंसा तीर, सर्जरी के बाद डॉक्टर के साथ बालक।
HighLights
ग्वालियर में 14 वर्षीय किशोर के दिमाग से निकला बाण।
जयारोग्य अस्पताल के डॉक्टरों ने की 5 घंटे की जटिल सर्जरी।
बच्चे की जान, आंखों की रोशनी और मस्तिष्क सुरक्षित।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। ग्वालियर के जयारोग्य चिकित्सालय (जेएएच) के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और दुर्लभ सर्जरी कर 14 वर्षीय किशोर शिवम आदिवासी को नया जीवन दिया। छतरपुर जिले के किशनगढ़ (झरकुआ) गांव निवासी शिवम की बाईं आंख के बाहरी हिस्से से पांच फीट लंबा त्रिशूलनुमा बाण (सेंगरी) मस्तिष्क तक जा धंसा था। चिकित्सकों ने पांच घंटे तक चले ऑपरेशन में बाण को सफलतापूर्वक निकाल लिया। सबसे बड़ी बात यह रही कि न केवल बच्चे की जान बच गई, बल्कि उसकी आंखों की रोशनी और मस्तिष्क की कार्यक्षमता भी पूरी तरह सुरक्षित रही।
छत पर खेलते समय दर्दनाक हादसा
जानकारी के अनुसार, शिवम अपने दोस्तों के साथ घर की छत पर खेल रहा था। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे स्थित माता मंदिर के चबूतरे पर लगे त्रिशूलनुमा लोहे के बाण पर जा गिरा। हादसे में एक बाण उसकी बाईं आंख के बाहरी हिस्से से प्रवेश कर मस्तिष्क तक पहुंच गया, जबकि दूसरा बाण उसके बाएं पैर में गहराई तक धंस गया।
गंभीर हालत में पहले उसे स्थानीय अस्पताल, फिर जिला अस्पताल छतरपुर ले जाया गया। वहां से चिकित्सकों ने उसे ग्वालियर के जेएएच ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया।
डॉक्टरों के सामने थी बड़ी चुनौती
जेएएच पहुंचने पर जांच में सामने आया कि बाण मस्तिष्क की महत्वपूर्ण नसों और रक्त वाहिकाओं के बेहद करीब था। ऐसे में इसे निकालने के दौरान आंख, ब्रेन या प्रमुख रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने का गंभीर खतरा था।
ऑपरेशन से पहले चिकित्सकों ने सीटी स्कैन, सीटी एंजियोग्राफी, वेनोग्राफी, एक्स-रे और कलर डॉपलर जैसी जांचें कर पूरी रणनीति तैयार की।
पांच घंटे चला हाई-रिस्क ऑपरेशन
26 जून को न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अविनाश शर्मा के नेतृत्व में न्यूरोसर्जरी और जनरल सर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने करीब पांच घंटे तक ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान पहले खोपड़ी की हड्डी हटाई गई, फिर विशेष तकनीक से बाण को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञों की दो टीमें लगातार निगरानी करती रहीं ताकि मस्तिष्क, आंख और रक्त वाहिकाओं को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
संक्रमण रोकना भी था बड़ी चुनौती
बाण निकालने के बाद चिकित्सकों ने मस्तिष्क और आंख के बीच बने छिद्र को विशेष तकनीक से बंद किया, ताकि मस्तिष्कमेरु द्रव (सीएसएफ) का रिसाव और संक्रमण न हो। इसके बाद शिवम को दो सप्ताह तक आईसीयू में निगरानी में रखा गया और हाई-एंड एंटीबायोटिक उपचार दिया गया।
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पूरी तरह स्वस्थ होकर लौटा घर
प्रो. डॉ. अविनाश शर्मा ने बताया कि शिवम अब पूरी तरह स्वस्थ है। उसके हाथ-पैर सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं और सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसकी आंखों की रोशनी तथा मस्तिष्क की कार्यक्षमता पूरी तरह सुरक्षित है। मंगलवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
