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क्रिप्टो और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर साइबर ठग लगा रहे करोड़ों की चपत, ग्वालियर में जनवरी से अब तक 49 घटनाएं

By Amit MishraEdited By: Ravindra Soni
Published: Mon, 13 Jul 2026 09:48 PM (IST)

ग्वालियर में ऑनलाइन ट्रेडिंग और क्रिप्टो करेंसी के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जिसमें ...और पढ़ें

ऑनलाइन ठगी (प्रतीकात्मक चित्र)

ऑनलाइन ठगी (प्रतीकात्मक चित्र)

HighLights

  1. ग्वालियर में ऑनलाइन ट्रेडिंग और क्रिप्टो से 21 करोड़ की ठगी।

  2. मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड, 49 मामले सामने आ चुके।

  3. फर्जी ऐप और आकर्षक मुनाफे से ठग फंसाते हैं लोगों को जाल में।

अमित मिश्रा, ग्वालियर। वाट्सएप या टेलीग्राम एप पर किसी अज्ञात ग्रुप से घर बैठे ऑनलाइन ट्रेडिंग कर लाखों कमाने का ऑफर आए, तो सावधान हो जाइए। साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के साथ अब ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग और क्रिप्टो करेंसी के नाम पर धोखाधड़ी का नेटवर्क बिछाया है, जहां मोटी कमाई का झांसा देकर लोगों को ठगा जा रहा है। हाल ही में ग्वालियर के सीए अशोक विजयवर्गीय से क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर 21.05 करोड़ रुपये की ठगी की गई। इस मामले की जांच में जुटी पुलिस ने पाया है कि इस नेटवर्क के तार 14 राज्यों और विदेश से जुड़े हैं।

यह मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी साइबर ठगी बताई जा रही है। ऐसा सिर्फ एक मामला नहीं है, अकेले ग्वालियर में ही जनवरी से अब तक 49 घटनाएं ऐसी हुई हैं, जिनमें ऑनलाइन ट्रेडिंग और क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर लोगों को ठगा गया।

ऐसे बुना जाता है ठगी का चक्रव्यूह

  • लालच और फर्जी ग्रुप : ठग सबसे पहले इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म जैसे- इंस्टाग्राम, वाट्सएप या टेलीग्राम पर फेक प्रोफाइल बनाकर लोगों से संपर्क करते हैं। वे खुद को किसी बड़ी इंवेस्टमेंट कंपनी का मैनेजर या एक्सपर्ट बताते हैं और 'फ्री टिप्स' देने वाले ग्रुप में जोड़ लेते हैं। इन पर आकर्षक निवेश स्कीम के बारे में बताया जाता है।
  • नकली एप्स और वर्चुअल मुनाफा : पीड़ितों को झांसा देने के लिए एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराया जाता है। जिसमें निवेश सिर्फ दिखावा होता है। जब पीड़ित इसमें शुरुआती 5,000 या 10,000 रुपये डालता है, तो एप के डेशबोर्ड पर उसका मुनाफा बढ़कर 50,000 रुपये दिखने लगता है। यह मुनाफा सिर्फ स्क्रीन पर दिखने वाला एक फर्जी आंकड़ा होता है, असलियत में कोई ट्रेडिंग नहीं हो रही होती। कई बार छोटा मुनाफा का विड्राल भी ठग करा देते हैं। इसके बाद लोग बड़ी रकम फंसाते हैं।
  • विड्राल के नाम पर अंतिम वार : जब लोग बड़ी रकम लगा देते हैं और उन्हें स्क्रीन बड़ा मुनाफा नजर आने लगता है तो विड्राल करते समय फिर फंसाते हैं। यह इनकम टैक्स, रिस्क मार्जिन मनी और अलग-अलग टैक्स के नाम पर और रुपये मांगते हैं। लोग पहले ही लाखों-करोड़ों रुपये लगा चुके होते हैं। मुनाफा निकालने के चक्कर में यह शर्त भी मान लेते हैं, इसके बाद भी रकम नहीं आती, तब ठगी का पता लगता है।

यह भी पढ़ें- ग्वालियर में 21.05 करोड़ की क्रिप्टो महाठगी: 14 राज्यों के 20000 से ज्यादा खातों में पहुंची रकम, पहली बार 12 लेयर में ट्रांजेक्शन

ये सावधानियां ही बचाएंगी

  • सेबी रजिस्ट्रेशन : किसी भी तरह की ऑनलाइन ट्रेडिंग के लिए सेबी द्वारा कुछ वेबसाइट, एप को अधिकृत किया गया है। इसकी वैधता जांचने के लिए सेबी की वेबसाइट से इसकी सूची में नाम देखा जा सकता है।
  • लिंक से न करें एप डाउनलोड : इंस्टा, टेलीग्राम, वाट्सएप के ग्रुप से मिली लिंक से किसी भी तरह के एप डाउनलोड न करें।
  • स्क्रीन शेयरिंग न करें : टीम व्यूअर या एनीडेस्क जैसे एप डाउनलोड कराकर आपके मोबाइल पर ठग कंट्रोल कर लेते हैं।

अब डिजिटल अरेस्ट से ज्यादा क्रिप्टो करेंसी में निवेश और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर ठगी की घटनाएं सामने आ रही हैं। लोगों को सावधान होने की जरूरत है। किसी भी अनाधिकृत प्लेटफार्म से ट्रेडिंग न करें। इसके लिए सेबी द्वारा वेबसाइट, एप निर्धारित किए गए हैं। वैधता की जांच जरूर कर लें।
-संजीव नयन शर्मा, डीएसपी, राज्य साइबर सेल, मप्र