बांग्लादेशियों के पासपोर्ट रैकेट में बड़ा खुलासा: भोपाल-डबरा के 2 साइबर कैफे से हुए 57 आवेदन, STF के रडार पर संचालक
एसटीएफ ने बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामले में साइबर कैफे कनेक्शन का खुलासा किया है। भोपाल और ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
STF ने बांग्लादेशी पासपोर्ट रैकेट में साइबर कैफे कनेक्शन उजागर किया।
भोपाल और डबरा के दो कैफे से 57 फर्जी आवेदन मिले।
आरोपी रियाल चौधरी का साइबर कैफे संचालकों से संबंध जांचा जा रहा।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। जाली दस्तावेजों के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट बनवाने के मामले की जांच में साइबर कैफे कनेक्शन सामने आया है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने ऑनलाइन पासपोर्ट आवेदनों के लिए जनरेट हुई आईडी के आईपी एड्रेस को ट्रेस किया तो भोपाल और डबरा के दो साइबर कैफे जांच के दायरे में आ गए। दोनों कैफे संचालकों से पूछताछ की तैयारी है।
भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र के अन्नानगर स्थित साइबर कैफे के संचालक से STF ने पूछताछ शुरू कर दी है। यह कैफे बौद्ध मठ से करीब 500 मीटर की दूरी पर बताया गया है। इसी तरह डबरा में बौद्ध विहार और आंबेडकर पार्क से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित साइबर कैफे से भी पासपोर्ट के ऑनलाइन आवेदन किए जाने की जानकारी जांच में सामने आई है।
रियाल चौधरी से कनेक्शन की भी जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय रैकेट के कथित सरगना रियाल चौधरी की दोनों साइबर कैफे संचालकों से करीबी की जानकारी सामने आई है। पूछताछ में यह भी पता चला है कि रियाल इन कैफे में लंबे समय तक बैठता था और इंटरनेट के जरिए अलग-अलग वेबसाइट खोलता था। आरोप है कि वह इन्हीं स्थानों से जाली दस्तावेजों के आधार पर तैयार किए गए आवेदनों को ऑनलाइन अपलोड करता था।
हालांकि, साइबर कैफे संचालकों की भूमिका महज आवेदन करने तक सीमित थी या वे फर्जी दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया में भी शामिल थे, इसकी जांच STF कर रही है।
डबरा से 17, भोपाल से 40 पासपोर्ट आवेदन
जांच के मुताबिक डबरा स्थित साइबर कैफे से 17 और भोपाल के गोविंदपुरा स्थित कैफे से 40 पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए। यानी दोनों स्थानों से कुल 57 आवेदन सामने आए हैं।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि रियाल खुद को अनपढ़ बताता था, लेकिन साइबर कैफे में वह लंबे समय तक इंटरनेट का इस्तेमाल करता था और हिंदी-अंग्रेजी समेत विभिन्न वेबसाइटों पर काम करता था।
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जाली दस्तावेजों के आवेदन भी इन्हीं कैफे से
पूछताछ में कथित तौर पर यह जानकारी सामने आई है कि जिन 57 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनवाए गए, उनके लिए जाली दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया से जुड़े ऑनलाइन आवेदन भी इन्हीं साइबर कैफे से किए गए थे।
जांच एजेंसी अब इस पहलू की पड़ताल कर रही है कि ग्राम पंचायत से लेकर नगर निगम स्तर तक जरूरी दस्तावेज किस तरह तैयार हुए और इनमें संबंधित विभागों के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत थी या नहीं। दस्तावेजों की सत्यता और उन्हें जारी करने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है।
फर्जी 10वीं की अंकसूची का भी कनेक्शन तलाश रही STF
जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित लोगों की 10वीं की अंकसूचियां कथित तौर पर फर्जी हैं। आरोप है कि उन्होंने वास्तविक रूप से परीक्षा नहीं दी थी। अब STF यह पता लगाने में जुटी है कि इन कथित फर्जी अंकसूचियों को तैयार कराने में साइबर कैफे संचालकों की कोई भूमिका थी या नहीं।
2002 के सर्कुलर में पुलिस सत्यापन को बताया गया था अहम
पासपोर्ट के लिए पुलिस सत्यापन को लेकर गृह विभाग पहले ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। 14 जनवरी 2002 के सर्कुलर में पुलिस सत्यापन को महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताते हुए इसकी जिम्मेदारी जिला विशेष शाखा के डीएसपी या पुलिस अधीक्षक द्वारा नामित राजपत्रित अधिकारी को दी गई थी।
थाना स्तर पर थाना प्रभारी द्वारा बीट प्रभारी को आवेदक का भौतिक सत्यापन करने के लिए भेजे जाने की व्यवस्था है। बीट प्रभारी की रिपोर्ट के आधार पर थाना प्रभारी आगे सत्यापन रिपोर्ट भेजता है।
सर्कुलर में यह भी चिंता जताई गई थी कि कुछ मामलों में प्रतिकूल रिकॉर्ड होने के बावजूद सत्यापन रिपोर्ट सही पाई गई और ऐसे लोगों के पासपोर्ट बन गए। इसी वजह से पुलिस सत्यापन में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए थे। मौजूदा मामले में STF अब यह भी जांच कर रही है कि निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।
साइबर कैफे संचालक रडार पर हैं। ग्वालियर और भोपाल के साइबर कैफे से 57 पासपोर्ट के लिए आवेदन हुए हैं। आइपीए एड्रेस से यह दोनों चिह्नित किए गए हैं।
राजेश सिंह भदौरिया, एसपी, एसटीएफ।
