जबलपुर, जागरण ऑनलाइन डेस्क। विश्व हृदय दिवस 29 सितंबर को मनाया जा रहा है। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन द्वारा वर्ल्ड हार्ट डे मनाने की शुरुआत हुई। आशय यह है कि लोग अपने दिल के साथ दूसरों के दिल का भी ख्याल रखें। हर दिल के लिए दिल का इस्तेमाल करें। बदली जीवन शैली, जंक फूड का अत्यधिक सेवन और कम उम्र में ही अधिक तनाव से युवा तेजी से दिल के रोगी होते जा रहे हैं। उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्राल तो पहले ही युवाओं की आम बीमारी बन चुकी है अब नौबत बायपास सर्जरी की आने लगी है।

जानकारी हो कि आजकल इस तरह की खबरें बहुत आम हैं कि कोई रात में सोया तो सुबह उठ ही नहीं पाया कारण नींद में ही उसका दिल बंद हो गया, किसी को नाचते हुए हार्टअटैक आ गया या जिम में एक्सरसाइज करते समय कार्डिएक अरेस्ट हो गया या। ऐसे में क्या ये सवाल उठना स्वाभाविक नहीं है कि क्या हमारा दिल अचानक बंद हो जाता है या कुछ संकेत देता है? तो इस वर्ल्ड हार्ट डे पर जानिए क्या है वो लक्षण जो दिल के बीमार होने का संकेत देते हैं।

हृदय रोग मौत के तीसरे सबसे बड़े कारण

जानकारी हो कि ऐसा माना जा रहा है कि कैंसर व सड़क हादसों के बाद हृदय रोग मौत के तीसरे सबसे बड़े कारण के रूप में सामने आया है। यह बीमारी महामारी का रूप ले चुकी है। दिल की बीमारी के शुरुआती लक्षण हृदय रोग पूरे विश्व में मृत्यु का सबसे प्रमुख कारण हैं। हृदय रोगों में हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट के मामले सबसे अधिक देखे जाते हैं। हृदय और रक्त परिसंचरण तंत्र की कई छोटी-बड़ी समस्याएं इनका कारण बनती हैं, इसलिए इन समस्याओं से संबंधित संकेतों की पहचान बहुत महत्वपूर्ण है। युवाओं में बढ़ता ह्दय रोग चिंता का विषय है। छाती का हर दर्द हार्ट अटैक नहीं रहता। हार्ट अटैक के बाद भी उचित उपचार से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। दांत, पीठ, गर्दन का दर्द भी हृदय रोग की वजह हो सकता है। हृदय रोग की सही जांच आवश्यक है

चिकित्सकों का कहना है कि किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन (धूम्रपान व गुटका) हृदय रोगों की सबसे बड़ी वजह है। ऐसे लोग जो धूम्रपान करते हैं वे स्वयं के साथ दूसरों के दिल को भी खतरे में डालते हैं तथा पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं। चिंता की बात यह है कि कम उम्र के युवा हृदय रोगों की चपेट में आ रहे हैं। सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में रोजाना लगभग तीन हृदय रोगियों की एंजियोप्लास्टी, सप्ताह में 3-5 मरीजों की बायपास सर्जरी की जा रही है।

हृदय रोग में अब उम्र की कोई सीमा नहीं

विशेषज्ञों के मुताबिक बदली जीवन शैली, लगातार तनाव और उच्च रक्तचाप को गंभीरता से नहीं लेने के दुष्परिणाम भी युवाओं में तेजी से नजर आ रहे हैं। ह्रदयरोग विशेषज्ञ के पास पहुंचने वाले 100 में से तीस मरीज 30 से 40 वर्ष की आयु के होते हैं। डाक्टर जहां कुछ साल पहले 15 से 20 बायपास सर्जरी कर रहे थे अब हर माह 100 से ज्यादा सर्जरी कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि 20 वर्ष पहले तक 55-60 आयु वर्ग के लोग ही बायपास सर्जरी के लिए अस्पताल आते थे लेकिन बीते पांच-सात वर्षों में 30-40 आयुवर्ग के लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। चिंता की बात यह भी है कि किसी समय हृदय रोग को शहरियों का रोग माना जाता था लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में मरीज निकल रहे हैं।  

हृदय रोग के कारण

डॉक्टरों के अनुसार हृदय रोग के कई कारण है, जैसे- विकृत जीवन शैली, व्यायाम की कमी, संतुलित खानपान का अभाव, जंक फूड का सेवन, धू्म्रपान, तंबाकू का सेवन, तनाव, मोटापा, शराब का सेवन, आनुवांशिकता, उच्च रक्तचाप, ज्यादा व्यायाम व फूड सप्लीमेंट का सेवन, मांस पेशियां बढ़ाने के लिए दवाओं का सेवन आदि हृदय रोग के मुख्य कारण हैं।

हृदय रोग के लक्षण-

अगर इसके लक्षण की बात करें तो जैसे- छाती में दर्द, भारीपन व बेचैनी, सांस लेने में कठिनाई, पैरों या बाहों में दर्द व सुन्नता, जबड़ा, गर्दन, गला, पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द, चक्कर आना, बेहोशी आना आदि ह्दय रोग के मुख्य लक्षण हैं।

बचाव के उपाय-

डॉक्टरों के अनुसार ब्लड प्रेशर, शुगर व कोलेस्ट्राल नियंत्रित रखें, तनाव न लें सिगरेट व तंबाकू का सेवन न करें, रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें, हरी सब्जियां व सलाद का सेवन करें ।

Edited By: PRITI JHA

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