भोपाल, संजय मिश्र। लंबे समय से चर्चा का विषय है कि शराब की दुकान और नशामुक्ति का अभियान कोई एक साथ कैसे चला सकता है। राज्यों की आबकारी नीति की आलोचना यह कहकर की जाती है कि जो सरकार नशामुक्ति के अभियान पर करोड़ों रुपये खर्च करती है वही शराब एवं भांग की बिक्री का कोटा भी बढ़ाती है। ऐसे में नशामुक्ति का अभियान कागजों में रह जाता है और शराब, भांग की बिक्री बढ़ती जाती है।

मध्य प्रदेश में तो कई राज्यों से भी अलग आबकारी नीति है। यहां आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सरकार ने पांच लीटर तक देसी शराब बनाने और बेचने की छूट दे रखी है। ऐसी छूट देने के पीछे तर्क है कि अवैध शराब से मौतें न हों इसलिए प्रत्येक आदिवासी परिवार को घर पर ही पांच लीटर तक शराब बनाने-बेचने की सुविधा दी गई है। जाहिर है कि जब आदिवासी बहुल जिलों में देसी शराब बनाने की छूट रहेगी तो वहां नशामुक्ति के अभियान पर लोग हंसेंगे ही। इस नीतिगत जटिलता के बावजूद सरकार ने प्रदेश में व्यापक स्तर पर नशामुक्ति अभियान शुरू करने का संकल्प व्यक्त किया है।

नशा के गैरकानूनी कारोबार पर सरकार हमला बोलेगी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो अक्टूबर को घोषणा की कि नशा के खिलाफ राज्य में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। आबकारी नीति में ऐसी व्यवस्था की जाएगी जिससे नशे का सामान प्राप्त करना आसान न हो। नशा के गैरकानूनी कारोबार पर सरकार हमला बोलेगी। जहां कहीं भी हुक्का बार मिलेगा उस पर बुलडोजर चलाया जाएगा। नशामुक्ति अभियान पर सरकार के जोर देने के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती द्वारा डेढ़ साल पूर्व शुरू किया गया अभियान बड़ा कारण है।

शराब सामाजिक बुराई

भाजपा की आंतरिक राजनीति में अलग-थलग पड़ीं उमा भारती ने जोरशोर से प्रदेश में नशामुक्ति के लिए जन आंदोलन चलाने की घोषणा की थी। राज्य में शराब, भांग की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए सरकार को चेताया कि ऐसा न होने पर वह जनता के साथ सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगी। यह सच है कि उमा भारती किसी भी मुद्दे पर बेबाक बोलती हैं, भले ही उन्हें नुकसान ही क्यों न उठाना पड़े। शराबबंदी का मुद्दा उठाते समय उनका तर्क था कि प्रदेश में शराब की खपत बढ़ती जा रही है, जिससे आए दिन आपराधिक घटनाएं हो रही हैं।

सभी कहते हैं कि शराब सामाजिक बुराई है, पर इसे समाप्त करने के लिए कोई आगे नहीं आता। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार और संगठन के पदाधिकारियों को खुला पत्र लिखा। सरकारी तंत्र पर हमले बोले। एक दिन तो वह समर्थकों के साथ भोपाल में शराब की दुकान पर पहुंच गईं और खुद पत्थर चलाकर शीशे एवं बोतल तोड़ दिए। एक तरह से कानून तोड़कर उन्होंने संदेश देने की कोशिश की कि उनकी बात नहीं सुनी गई तो वह आम जन को इसी तरह आंदोलित करेंगी। सरकार चाहती तो उन पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करती, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐसा करने के बजाय उमा भारती से संवाद किया। उन्हें सुना और खुद भी सुनाया।

शिवराज सिंह से नशामुक्ति के लिए बड़ी पहल करने की अपील

मुख्यमंत्री से मिलने के बाद उमा न सिर्फ नरम पड़ीं, बल्कि यह कहकर शिवराज पर भरोसा जताया कि वह संवेदनशील व्यक्ति हैं और खुद भी नशा के खिलाफ हैं। दोनों के बीच संवाद से विश्वास का ऐसा माहौल बना कि उमा का मुद्दा सरकार की प्राथमिकता में आ गया। उमा भारती भी जानती हैं कि भले ही वह बड़े दावे करें, लेकिन सच यही है कि नशामुक्ति अभियान संगठन, जनभागीदारी और सरकार के सहयोग के बिना सफल होने वाला नहीं है। इसीलिए उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से नशामुक्ति के लिए बड़ी पहल करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने भी गांधी जयंती पर राज्य में नशामुक्ति अभियान चलाने की घोषणा कर स्पष्ट कर दिया कि वह भी सैद्धांतिक रूप से नशा के खिलाफ हैं।

लंबे समय से सरकार और भाजपा के मंचों से अनुपस्थित चल रहीं उमा भारती को मंच पर बुलाकर शिवराज ने स्पष्ट कर दिया कि सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर वह दो कदम आगे ही चलने वाले हैं। उन्होंने नशामुक्ति के लिए उमा की भूमिका को न सिर्फ सराहा, बल्कि यह आश्वासन भी दिया कि वह मिलकर समाज को नशामुक्ति के लिए जागरूक करेंगे। उमा भारती ने भी उन्हें राजा जनक की संज्ञा देते हुए कहा कि शिवराज संवेदनशील हैं और समाज के व्यापक हित से जुड़े मुद्दों को लेकर आगे रहते हैं। ऐसा मुख्यमंत्री ही जनता की रक्षा कर सकता है। यह भी एक तथ्य है कि प्रदेश में राजस्व का बड़ा और सुरक्षित स्रोत आबकारी है। वित्त वर्ष 2022-23 में सरकार ने आबकारी से 13 हजार 255 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा है। इसीलिए राजस्व के बड़े स्रोत को पूरी तरह दरकिनार करना भी आसान नहीं है।

[स्थानीय संपादक, नवदुनिया, भोपाल]

Edited By: Sanjay Pokhriyal

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