सागर में उल्दन बांध के डूब क्षेत्र में सूखे पेड़ पर फंसे बंदर, भूखे-प्यासे झुंड को बचाने में जुटा वन विभाग; दो का सुरक्षित निकाला
सागर जिले के बंडा क्षेत्र में नवनिर्मित उल्दन बांध के डूब क्षेत्र में एक सूखे पेड़ पर बंदरों का झुंड ...और पढ़ें

पेड़ पर फंस गया है बंदरों का झुंड, बांध में पानी दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। (वीडियो ग्रैब)
HighLights
उल्दन बांध के डूब क्षेत्र में पेड़ के आसपास 10 फीट तक भरा पानी।
वन विभाग ने नाव की मदद से दो बंदरों को सुरक्षित बाहर निकाला।
शेष बंदरों को बचाने पेड़ काटने या रस्सी बांधने पर भी विचार।
डिजिटल डेस्क, सागर। जिले के बंडा क्षेत्र में नवनिर्मित उल्दन बांध की डुबान में एक सूखे पेड़ पर बंदरों का झुंड फंस गया है। पेड़ के आसपास 10 फीट तक पानी भर चुका है और बंदर वहां से निकल नहीं पा रहे हैं। कई दिनों से बंदरों को वहां भूखे-प्यासे देखकर ग्रामीणों ने वन विभाग को इसकी सूचना दी। रविवार को वन विभाग के अधिकारियों ने नाव की मदद से दो बंदरों को वहां से बाहर निकाला। शेष को पकड़ने और वहां से निकालने के उपाय किए जा रहे हैं।
पहली बार भर रहा बांध का जलाशय
दरअसल, बंडा तहसील के उल्दन गांव के पास धसान नदी उल्दन सिंचाई परियोजना का बांध बना है। इस सीजन इस बांध में पहली बार पानी भर रहा है। करीब दो हजार 610 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना के डूब में 28 गांव प्रभावित हो रहे हैं। सबसे पुराना सलैया खुर्द गांव बांध के भरने के बाद पूरी तरह से डूब चुका है।
ग्रामीणों ने दी वन विभाग को सूचना
कुछ ग्रामीणों ने वन विभाग को बताया था कि तट से करीब 200 मीटर भीतर एक सूखे पेड़ पर बंदरों का झुंड कई दिनों से भूखा-प्यासा बैठा है। रविवार को पहुंचे वनकर्मियों ने नाव से केले आदि पहुंचाकर बंदरों को आकर्षित करने की कोशिश की। चार बंदर नाव के पास आए, जिन्हें लेकर वनकर्मी आगे बढ़े, लेकिन दो उछलकर फिर पेड़ पर चढ़ गए। दो बंदरों को सुरक्षित किनारे पर पहुंचा दिया गया।
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बंदरों को सुरक्षित निकालने विकल्पों पर विचार
रेंजर विपुल प्रभात ने बताया कि बंदरों को सुरक्षित निकालने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। यदि बंदर सूखे पेड़ से नहीं हटते हैं तो पेड़ को कटवाने पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा पेड़ पर रस्सी बांधने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि बंदर रस्सी के सहारे किनारे पहुंच सकें।
