फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में रिटायर्ड IPS अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा पर FIR दर्ज, ST आरक्षण का लाभ लेने का आरोप
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा के खिलाफ फर्जी अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र के आधार पर आरक्षण का लाभ ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
सेवानिवृत्त IPS रघुवीर सिंह मीणा पर फर्जी ST प्रमाण पत्र का आरोप।
पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच समिति ने 1984 में जारी ST प्रमाण पत्र को अमान्य बताया।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा में अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग का अभ्यर्थी बनकर आरक्षण का लाभ लेने के आरोप में पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने सेवानिवृत्त IPS अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा और अन्य के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। यह कार्रवाई गुना निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी की शिकायत के आधार पर की गई है।
पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी सहित भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। फिलहाल सतर्कता शाखा पूरे मामले की जांच कर रही है।
जांच समिति ने ST प्रमाणपत्र को बताया था अमान्य
मामले से जुड़े जाति प्रमाणपत्र की जांच शासन स्तर पर गठित 'अनुसूचित जनजाति संदेहास्पद जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति' ने की थी। उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों की पड़ताल के बाद समिति ने वर्ष 1984 में विदिशा जिले के क्षेत्र संयोजक, आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा जारी अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किया था।
जांच के दौरान मीणा के मूल निवासी होने से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों को लेकर भी सवाल सामने आए। समिति के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1984 में विदिशा जिले से उनके पक्ष में ST वर्ग का प्रमाणपत्र जारी किया गया था।
शिक्षक की नौकरी में OBC, बाद में ST प्रमाणपत्र का मामला
सतर्कता शाखा की जांच में एक और तथ्य सामने आया है। पुलिस के अनुसार, पुलिस सेवा में नियुक्ति से पहले सरकारी शिक्षक के रूप में सेवा के दौरान मीणा ने खुद को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत किया था। इसके बाद ST प्रमाणपत्र जारी होने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है।
पुलिस यह पता लगा रही है कि वर्ष 1984 में जारी किए गए जाति प्रमाणपत्र के लिए निर्धारित नियमों और आवश्यक दस्तावेजों का पालन किया गया था या नहीं। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
2009 में IG विजिलेंस ने की थी शिकायत
रिकॉर्ड के मुताबिक, तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (विजिलेंस) ने वर्ष 2009 में मीणा की जाति को लेकर छानबीन समिति में शिकायत की थी। इसके बाद वर्ष 2016 में समिति ने भी शिकायत को सही ठहराया था।
अब पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने इस पूरे प्रकरण में आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। जांच के दौरान जाति प्रमाणपत्र जारी होने से लेकर आरक्षण का लाभ लेने तक के सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।
1986 में DSP बने थे मीणा
रघुवीर सिंह मीणा वर्ष 1986 में DSP के पद पर पुलिस सेवा में भर्ती हुए थे। वर्ष 2002 में उन्हें IPS अवार्ड मिला था। सेवानिवृत्ति के बाद वह गुना जिला पंचायत सदस्य हैं। उनकी पत्नी ममता मीणा भी जिला पंचायत सदस्य हैं और वर्ष 2013 से 2018 तक चाचौड़ा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रह चुकी हैं।
SI के विरुद्ध भी ऐसे ही मामले में अपराध दर्ज, बर्खास्तगी की तैयारी
पुलिस के एक उप निरीक्षक (एसआई) के विरुद्ध भी अनुसूचित जनजाति का सदस्य होने का फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने के आरोप में सीआईडी थाने में अपराध पंजीबद्ध किया गया है। उसने इस प्रमाण पत्र के आधार पर वर्ष 2000-01 में पुलिस में नियुक्ति प्राप्त की थी। शासन स्तर पर गठित छानबीन समिति की जांच में उसका जाति प्रमाण पत्र फर्जी बताया गया था।
आरोपित उप निरीक्षक के दो जाति प्रमाण पत्र क्रमशः वर्ष 1998 एवं 2024 में अनुविभागीय अधिकारी, जबलपुर द्वारा जारी किए गए थे। जांच में सामने आया कि उसने वर्ष 1997-98 में एक कूटरचित अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र तैयार किया था और इसके आधार पर उप निरीक्षक का पद प्राप्त किया था। आरोपित को सेवा से बर्खास्त करने की भी कार्रवाई की जा रही है।
