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MP: रेलवे भर्ती परीक्षा में डमी बनकर दोबारा मैदान में उतरे फर्जी अभ्यर्थी, रेटिना ने खोल दिया फर्जीवाड़ा

Published: Thu, 10 Sep 2026 11:19 PM (IST)

पश्चिम रेलवे ग्रुप डी की शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) में रतलाम में डमी अभ्यर्थियों के जरिए फर्जीवाड़ा सामने आया है, ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. रतलाम में रेलवे ग्रुप डी पीईटी में डमी अभ्यर्थी पकड़े गए।

  2. एक ही व्यक्ति ने सीबीटी और पीईटी दोनों में फर्जीवाड़ा किया।

  3. रेलवे पहचान सत्यापन प्रणाली पर सवाल, मुख्यालय स्तर पर जांच जारी।

डिजिटल डेस्क, रतलाम। पश्चिम रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ की ग्रुप डी (लेवल-1) शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) में डमी अभ्यर्थियों के जरिए फर्जीवाड़े का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश से जुड़े मामले में भी पहचान जांच को चकमा देकर डमी अभ्यर्थियों के परीक्षा में बैठने का खुलासा हुआ है। मामले में अब तक पांच आरोपित गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं, जबकि दो अभ्यर्थियों की तलाश की जा रही है।

जांच में सामने आया कि उत्तर प्रदेश का एक आरोपित इसी भर्ती प्रक्रिया में हैदराबाद में हुई रेलवे ग्रुप डी की कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) में भी डमी अभ्यर्थी बनकर शामिल हो चुका था। इसके बाद वही व्यक्ति रतलाम में पीईटी देने पहुंच गया। एक ही भर्ती प्रक्रिया में डमी अभ्यर्थियों के दोबारा परीक्षा में शामिल होने से रेलवे की पहचान सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रेलवे मुख्यालय ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

रेटिना जांच में खुला फर्जीवाड़ा, तीन पकड़े गए

9 सितंबर को उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद निवासी पंकज यादव, गौरव यादव और अनुज दिवाकर को रेटिना जांच के दौरान पकड़ लिया गया। पंकज, मनीष सिंह की जगह और गौरव, अनुज दिवाकर की जगह पीईटी देने पहुंचा था। मनीष स्वयं रतलाम नहीं आया था।

तीनों रेलवे स्टेशन क्षेत्र के एक होटल में ठहरे हुए थे और एक-दूसरे को जानते थे। पूछताछ में सामने आया कि पंकज इससे पहले हैदराबाद में मनीष सिंह की जगह रेलवे ग्रुप डी की सीबीटी दे चुका था। इस बार पीईटी के लिए वह हैदराबाद से विमान के जरिए इंदौर पहुंचा और वहां से रतलाम आया।

पंकज का मनीष से 50 हजार रुपये में सौदा तय हुआ था, हालांकि रकम का भुगतान नहीं हुआ। वहीं गौरव ने अनुज से पैसे लेने से इन्कार किया है। दोनों करीब पांच साल से एक-दूसरे को जानते हैं।

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एक बार डमी बनकर दौड़ा, चार दिन बाद फिर पहुंचा

बिहार के मुंगेर निवासी अजीत कुमार के मामले ने फर्जीवाड़े की गंभीरता और बढ़ा दी। अजीत ने 2 सितंबर को तारापुर क्षेत्र के निरंजन कुमार की जगह पीईटी दी थी। इसके महज चार दिन बाद वह 6 सितंबर को शंभूपुरा निवासी कुंदन कुमार की जगह दोबारा परीक्षा देने पहुंच गया।

शाम करीब छह बजे तकनीकी जांच के दौरान अजीत को पकड़ लिया गया। पूछताछ में उसने बताया कि दोनों अभ्यर्थियों से 40-40 हजार रुपये में डमी बनकर परीक्षा देने का सौदा तय हुआ था।

इसके बाद निरंजन कुमार को 7 सितंबर को रतलाम रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म से गिरफ्तार किया गया। अजीत और निरंजन को 8 सितंबर को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया। अब पुलिस कुंदन कुमार की तलाश कर रही है।

एक ही भर्ती में बार-बार कैसे चकमा दे रहे डमी?

इस पूरे मामले ने रेलवे की परीक्षा व्यवस्था में पहचान सत्यापन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जब एक डमी अभ्यर्थी पहले सीबीटी और बाद में उसी भर्ती प्रक्रिया की पीईटी में शामिल हो गया, तो पहचान सत्यापन की अलग-अलग चरणों वाली व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। रेलवे मुख्यालय ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि फर्जी अभ्यर्थी किस स्तर पर पहचान जांच को चकमा देने में सफल रहे।