विदिशा में अवैध संबंध के शक में पति बना जल्लाद : पत्नी की हत्या कर 2 साल के बेटे को जंगल में छोड़ा, 20 घंटे भटकता रहा मासूम
मध्य प्रदेश के विदिशा में एक व्यक्ति ने अवैध संबंध के शक में अपनी पत्नी की पत्थर से हत्या कर ...और पढ़ें

पुलिस ने बच्चे को खोजकर अस्पताल में भर्ती कराया।

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक सनसनीखेज वारदात ने रिश्तों को झकझोर कर रख दिया। अवैध संबंध के संदेह में एक युवक ने अपनी पत्नी की पत्थर से हत्या कर दी और घटना के इकलौते गवाह अपने दो साल के बेटे को जंगल में मरने के लिए छोड़ आया। हैरानी की बात यह रही कि करीब 20 घंटे बाद वही मासूम जिंदा मिला, जिसे पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर लिया।
खरीदारी के बहाने ले गया, रास्ते में बना हत्यारा
पुलिस के मुताबिक, हैदरगढ़ थाना क्षेत्र के हिनोतिया गांव निवासी 29 वर्षीय राजेंद्र अहिरवार शनिवार सुबह पत्नी ज्योति (27) और बेटे को मोटरसाइकिल से घर से ले गया था। सेमरी गांव के पास रास्ते में कथित अवैध संबंध को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद गुस्से में आकर उसने पास पड़ा पत्थर उठाकर पत्नी के सिर पर जोर से प्रहार कर दिया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

बेटे को 12 किमी दूर जंगल में छोड़ा
वारदात के बाद आरोपी ने पत्नी का शव वहीं छोड़ दिया और बेटे को करीब 12 किलोमीटर दूर झिरिया के जंगल में एक सुनसान झोपड़ी के पास छोड़ आया। पुलिस ने महिला का शव मिलने के बाद संदेह के आधार पर आरोपी को पकड़ा, जहां उसने हत्या कबूल कर ली। देर रात उसने बच्चे को जंगल में छोड़ने की बात भी स्वीकार की।
रातभर चला सर्च ऑपरेशन, सुबह मिला बच्चा
जंगली जानवरों के खतरे को देखते हुए पुलिस ने रात में ही सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। टॉर्च की रोशनी में खेतों, पगडंडियों और नालों में तलाश जारी रही। रविवार सुबह फिर सर्च तेज किया गया और करीब 9 बजे झिरिया मंदिर के पास एक गहरे नाले के किनारे बच्चा रोता हुआ मिला। वह छोड़ी गई जगह से करीब 2 किलोमीटर दूर पैदल पहुंच गया था।
भूखा-प्यासा, डरा-सहमा मिला मासूम
बच्चा बिना कपड़ों और चप्पलों के भटक रहा था। लंबे समय तक जंगल में अकेले रहने के कारण वह बेहद थका और डिहाइड्रेशन का शिकार था। पुलिस ने उसे पानी और भोजन देने के बाद अस्पताल में उपचार कराया।
नाना-नानी के सुपुर्द किया गया
एसडीओपी सोनाली गुप्ता ने बताया कि तलाश के दौरान बच्चा रोता-बिलखता पैदल ही एक तरफ चला जा रहा था। उसने पैंट नहीं पहनी थी और पैर में जूते-चप्पल भी नहीं थे। शनिवार दोपहर लगभग 11 बजे से जंगल में छोड़े जाने के बाद अकेले रहने के कारण वह बुरी तरह थक चुका था। भूख-प्यास और डर की वजह से वह बेहद सहमा हुआ था। पुलिस ने पहले उसे पानी पिलाया, बिस्किट खिलाया। उसके बाद अस्पताल में उसका उपचार किया गया। बच्चे को उसके नाना-नानी को सुपुर्द कर दिया गया है।
