धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल : मध्य प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में पीएचडी की डिग्री बांटने का खेल ऐसा चल रहा है कि पिछले दस वर्षों के दौरान देशभर के चार हजार लोगों को डाक्टरेट (पीएचडी) की उपाधि प्रदान कर दी गई। हर डिग्री की कीमत 10 से 15 लाख रुपये वसूली जाती है। यह बात कई राज्यों में पकड़े गए फर्जीवाड़े से सामने आई है। तेलंगाना पुलिस ने कई ऐसे एजेंट की गिरफ्तारी भी की है, जो पैसे लेकर मप्र के निजी विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्री दिला रहे थे। नई दुनिया ने निजी विश्वविद्यालयों द्वारा बांटी गई पीएचडी डिग्रीधारियों का ब्योरा सूचना के अधिकार के तहत मांगा तो उच्च शिक्षा विभाग ने सूचना नहीं दी। जाहिर है विभागीय मिलीभगत से ही अब तक डिग्रियों का फर्जीवाड़ा चल रहा था।

यह हैं नियम :

विश्व विद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के अनुसार, पीएचडी की उपाधि या डिग्री के लिए आवश्यक गाइड विवि में कार्यरत प्राध्यापक स्तर का होना अनिवार्य है। यह बात सामने आई है कि सत्यसाई विश्वविद्यालय, एपीजे अब्दुल कलाम विश्वविद्यालय, स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय सहित कई अन्य विश्वविद्यालों ने जितनी संख्या में पीएचडी की डिग्री बांटी, उतने प्राध्यापक उनके पास नहीं हैं। इन्होंने गाइड के नाम का इस्तेमाल कर उन्हें भी उपकृत कर दिया।

निजी विश्वविद्यालयों की धांधली रोकने का रोडमैप तैयार :

निजी विश्वविद्यालयों द्वारा फर्जी डिग्री बांटने की धांधली को रोकने का राज्य सरकार ने रोडमैप तैयार कर लिया है। उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव शैलेंद्र सिंह ने कहा कि अब प्रवेश लेने के साथ ही विश्वविद्यालय को छात्र का सारा ब्योरा निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के पोर्टल पर आनलाइन करना होगा। इसके बाद परीक्षा के लिए जारी किए गए प्रवेश पत्र और परीक्षा परिणाम भी आनलाइन करना अनिवार्य होगा। इन्हें डिजी लाकर में भी डालना होगा।ऐसा होने के बाद किसी भी तरह की फर्जी डिग्री बांटने का खेल स्वत: ही समाप्त हो जाएगा।

सिंह ने कहा कि पीएचडी की डिग्री बड़ी संख्या में बांटने के मामले में आयोग से पूछा जाएगा कि किस विश्वविद्यालय ने अब तक कितने लोगों को पीएचडी की डिग्री बांटी है। मप्र निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के अध्यक्ष भारत शरण सिंह ने कहा कि पिछले वर्षों में निजी विश्वविद्यालयों ने अधिक संख्या में पीएचडी कराई है, लेकिन अब इसे नियंत्रित किया जा रहा है। पीएचडी में पंजीयन से पहले निजी विश्वविद्यालयों को अपने गाइड या पात्र सुपरवाइजर की जानकारी देना होगी। इसके आधार पर ही उन्हें पीएचडी के लिए पात्र माना जाएगा और आयोग द्वारा अनुमति दी जाएगी।

कुछ विश्वविद्यालय ही गड़बड़ :

आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि मप्र में 41 निजी विश्वविद्यालय हैं, जिनमें कुछ ही गड़बडि़यां कर रहे हैं। बाकी बहुत अच्छा काम भी कर रहे हैं। उनके विश्वविद्यालय में प्लेसमेंट की स्थिति बहुत अच्छी है। हम भी चाहते हैं कि निजी विश्वविद्यालय में किसी तरह की गड़बडि़यां न हों। इस दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही इसके सार्थक परिणाम सामने आएंगे। फिलहाल निजी विश्वविद्यालय में 25,197 छात्र पंजीकृत हैं। 

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Edited By: Piyush Kumar

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