भोपाल, जेएनएन। कोरोना के कारण इस सत्र में स्कूल सितंबर में खुले हैं। ऐसे में विद्यार्थियों में सीखने की क्षमता कम होने की वजह सेे उपजे मानसिक एवं भावनात्मक दबाव को कम करने के लिए कोर्स को कम किया गया है। साथ ही सरकारी स्कूलों के पहली से आठवीं कक्षा के पाठ को फिर से नियोजित कर 60 और 40 के अनुपात में बांटा गया है। इसमें 40 अंक का प्रोजेक्ट होगा, जिसमें सातवीं के कक्षा के बच्चे भोपाल के प्रसिद्ध स्थलों की सूची बनाकर चित्र भी बनाएंगे, अपने घर के आस-पास पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना, पानी देना है। साथ ही प्रोजेक्ट में मिट्टी के खिलौने, गमला, मटका बनाने के लिए दिया गया है।

मालूम हो कि पहली कक्षा के बच्चों को रेत या मिट्टी में अपना नाम लिखना है। अभिभावकों से कहानियां सुनकर सुनाना है। पुराने कपड़ों से मास्क बनाना, बच्चे अपने आसपास की समस्या सड़क, पानी, बिजली आदि की समस्या को लेकर पत्र लिखना है। इस तरह के कई समस्याओं पर प्रोजेक्ट अभिभावकों की मदद से बच्चों को पूरा करना है। इससे बच्चों में सृजन क्षमता का विकास होगा। 

Edited By: Priti Jha