मध्य प्रदेश: निवाड़ी के जेरोन खालसा में 4 नवंबर को 'राइट टू रिकॉल' वोटिंग, तय होगा नगरपरिषद के अध्यक्ष का भविष्य
मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले की जेरोन खालसा नगर परिषद में 4 नवंबर को 'राइट-टू-रिकॉल' चुनाव होगा। इसमें मतदाता तय करेंगे कि वर्तमान अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे या नहीं।

निवाड़ी में 4 नवंबर को राइट-टू-रिकॉल चुनाव (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)
HighLights
जेरोन खालसा में 4 नवंबर को राइट-टू-रिकॉल मतदान।
मतदाता तय करेंगे नगर परिषद अध्यक्ष का भविष्य।
मध्य प्रदेश का 2018 के बाद दूसरा ऐसा चुनाव।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले के जेरोन खालसा नगर परिषद में 4 नवंबर को 'राइट-टू-रिकॉल' के तहत मतदान होगा। इस चुनाव में स्थानीय मतदाता यह तय करेंगे कि वर्तमान नगर परिषद अध्यक्ष अपने पद पर बने रहेंगे या उन्हें पद से हटा दिया जाएगा।
मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, 4 नवंबर को मतदान के बाद 6 नवंबर को सुबह 9 बजे से मतगणना होगी। इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग ने निवाड़ी कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
साल 2018 में इस व्यवस्था के दोबारा बहाल होने के बाद, मध्य प्रदेश में इस साल आयोजित होने वाला यह दूसरा राइट-टू-रिकॉल चुनाव है। इससे पहले इसी साल जनवरी में सागर जिले की देवरी नगर परिषद में ऐसा चुनाव हुआ था, जहां जनता ने अध्यक्ष को पद पर बनाए रखने के पक्ष में वोट दिया था।
क्या है राइट-टू-रिकॉल चुनाव?
राइट-टू-रिकॉल एक अनोखा और सशक्त लोकतांत्रिक जवाबदेही टूल है, यह चुनाव मतदाताओं को यह अधिकार देता है कि वे अपने चुने हुए जनप्रतिनिधि को कार्यकाल के बीच में ही पद से हटा सकें। मध्य प्रदेश में निकाय प्रमुखों के लिए इस व्यवस्था की शुरुआत पहली बार साल 2000 में हुई थी।
इस व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि इसमें वोटिंग के दौरान दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं होता, बल्कि मतदाता प्रतीक के रूप में भरी हुई कुर्सी और खाली कुर्सी में से एक को चुनते हैं।
यदि खाली कुर्सी को अधिक वोट मिलते हैं तो मौजूदा अध्यक्ष को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना पड़ता है। वहीं, भरी हुई कुर्सी को अगर ज्यादा वोट मिलता है तो मौजूदा अध्यक्ष अपनी कुर्सी पर बरकरार रहते हैं।
राइट-टू-रिकॉल वोटिंग की व्यवस्था एमपी में साल 2000 से ही लागू है, लेकिन 2018 में राज्य में सिविक बॉडी हेड के इन-डायरेक्ट चुनाव होने के बाद यह प्रकिया बंद हो गई थी। इसके बाद नवंबर 2025 में राज्य कैबिनेट ने निकाय चुनावों में फिर से प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली लागू को लागू किया।
