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MP में भाजपा के कोर ग्रुप से नरोत्तम मिश्रा बाहर, दतिया उपचुनाव के बाद बढ़ी थी दूरी

Published: Tue, 27 Oct 2026 06:25 PM (IST)

मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक बदलावों के बीच पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को पार्टी के प्रदेश कोर ग्रुप से ...और पढ़ें

-नरोत्तम मिश्रा। (फाइल फोटो)

-नरोत्तम मिश्रा। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. नरोत्तम मिश्रा को भाजपा कोर ग्रुप से हटाया गया।

  2. दतिया उपचुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण बदले।

  3. कभी प्रदेश भाजपा में दूसरे सबसे ताकतवर नेता माने जाते थे।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक बदलाव के बीच पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश कोर ग्रुप के पुनर्गठन में उनका नाम शामिल नहीं किया गया है। भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब के दूसरे प्रवास के बाद यह बदलाव किया गया। पहले कोर ग्रुप में 20 सदस्य थे, जबकि नई सूची में 19 नेताओं को जगह मिली है। इसे प्रदेश भाजपा में बदलते राजनीतिक समीकरणों और संगठन के भीतर नरोत्तम मिश्रा की भूमिका को लेकर अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।

नरोत्तम मिश्रा लंबे समय तक पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार में प्रभावशाली मंत्री रहे हैं। उन्हें कभी सरकार में दूसरे सबसे ताकतवर नेताओं में गिना जाता था और मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों में भी उनका नाम चर्चा में रहा। ऐसे में कोर ग्रुप से उनकी अनुपस्थिति ने प्रदेश भाजपा की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

दतिया उपचुनाव के बाद बिगड़े समीकरण

नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की शुरुआत इसी साल दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव से जोड़कर देखी जा रही है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट से हारने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि उपचुनाव में पार्टी उन्हें फिर से मौका देगी। उन्होंने उपचुनाव के लिए तैयारियां शुरू कर दी थीं और नामांकन पत्र भी खरीद लिया था, लेकिन भाजपा ने उनकी जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया।

टिकट नहीं मिलने के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की नाराजगी सामने आई थी। उनके समर्थकों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे और चुनाव के दौरान संगठन में असंतोष की स्थिति बनी। भाजपा को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद पार्टी ने नरोत्तम समर्थक जिलाध्यक्ष और जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया था।

हालांकि, उपचुनाव के परिणाम और कोर ग्रुप से नरोत्तम मिश्रा का नाम हटाए जाने के बीच पार्टी ने किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद घटनाक्रमों के क्रम को संगठन के भीतर उनकी स्थिति में आए बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

अक्टूबर की बैठकों से भी रहे दूर

प्रदेश भाजपा के कोर ग्रुप की अहम बैठकों में अक्टूबर के दौरान नरोत्तम मिश्रा को आमंत्रित नहीं किए जाने की चर्चा भी रही। अब प्रदेश प्रभारी और प्रदेश संगठन महामंत्री में बदलाव के बाद कोर ग्रुप की सूची को नए सिरे से तैयार किया गया है। इस सूची में भी नरोत्तम मिश्रा को जगह नहीं मिली।

पार्टी के सत्ता और संगठन के बीच समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश भाजपा में वर्ष 2020 में कोर ग्रुप की व्यवस्था शुरू की गई थी। इस मंच पर संगठन और सरकार से जुड़े महत्वपूर्ण राजनीतिक व रणनीतिक विषयों पर चर्चा होती है। ऐसे में इस समूह से किसी वरिष्ठ नेता का बाहर होना राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जाता है।

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भाजपा में पीढ़ीगत बदलाव के संकेत

प्रदेश भाजपा में हाल के संगठनात्मक फेरबदल को पार्टी के भीतर नेतृत्व और जिम्मेदारियों के पुनर्संतुलन के तौर पर भी देखा जा रहा है। केंद्रीय संगठन की प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रदेश में नई टीम और समन्वय व्यवस्था विकसित करने की कोशिशों के बीच नरोत्तम मिश्रा का कोर ग्रुप से बाहर होना चर्चा का विषय बन गया है।

फिलहाल इस बदलाव को लेकर नरोत्तम मिश्रा की भविष्य की संगठनात्मक भूमिका पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। लेकिन कोर ग्रुप की नई सूची ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि मध्य प्रदेश भाजपा में कभी बेहद प्रभावशाली रहे इस नेता की राजनीतिक भूमिका आने वाले समय में किस दिशा में आगे बढ़ेगी।