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MP में UCC पर बड़ा अपडेट: राष्ट्रपति की मंजूरी से पहले केंद्र ने राज्य सरकार से पूछा- कैसे तैयार किया कानून?

Published: Thu, 08 Oct 2026 08:24 PM (IST)

मध्य प्रदेश विधानसभा से पारित समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया है। केंद्रीय गृह ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. UCC विधेयक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी हेतु भेजा गया।

  2. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संहिता तैयार करने की प्रक्रिया पूछी है।

  3. बहुविवाह पर रोक, समान उत्तराधिकार जैसे प्रावधान शामिल हैं।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा से 21 जुलाई को पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की अनुमति के लिए भारत सरकार को भेज दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से संहिता तैयार करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया के बारे में पूछा है। विधि एवं विधायी विभाग अब संहिता तैयार करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का ब्योरा भेजेगा।

बहुविवाह पर रोक से लेकर उत्तराधिकार में समान अधिकार तक

यूसीसी में बहुविवाह पर रोक, विवाह और तलाक का पंजीयन अनिवार्य करने, बेटे-बेटियों को उत्तराधिकार में समान अधिकार देने और दत्तक ग्रहण से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। यूसीसी तैयार करने के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति बनाई थी। समिति ने विभिन्न राज्यों में लागू या प्रस्तावित प्रावधानों का अध्ययन करने के साथ प्रदेश में जनपरामर्श भी किया।

आदिवासी क्षेत्रों को प्रस्तावित कानून से बाहर रखा

बता दें, देश में यूसीसी उत्तराखंड और गुजरात में लागू हो चुका है। मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों को प्रस्तावित यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है। लिव-इन रिलेशन को यूसीसी के दायरे में लिया गया है। पंजीयन की अनिवार्यता के साथ संपत्ति सहित अन्य अधिकार को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।

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9.58 लाख सुझावों के बाद तैयार हुआ मसौदा

प्रदेश में यूसीसी का मसौदा सभी जिलों में जनसुनवाई और ऑनलाइन सुझाव प्राप्त करने के बाद तैयार किया गया। 9.58 लाख सुझाव और प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। उत्तराखंड और गुजरात के यूसीसी के साथ भारत सरकार के विभिन्न अधिनियम और नियमों का अध्ययन किया गया। सामान्य प्रशासन विभाग में सभी सुझावों का डाटा सुरक्षित रखा है ताकि भविष्य में कभी इसके संबंध में कोई विषय आए तो उसे प्रस्तुत किया जा सके।