MP में आदिवासियों की जमीन से बेदखली के मामलों को जोर-शोर से उठाएगी कांग्रेस, 10 सदस्यीय दल करेगा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा
मध्य प्रदेश में आदिवासियों को जमीन से बेदखल किए जाने के मामलों को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरने की ...और पढ़ें

कांग्रेस नेता उमंग सिंघार।
HighLights
कांग्रेस आदिवासियों की जमीन से बेदखली का मुद्दा उठाएगी।
10 सदस्यीय दल प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रिपोर्ट देगा।
वन अधिकार पट्टों और गैर-आदिवासियों को जमीन बिक्री पर सवाल।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। प्रदेश में आदिवासियों को जमीन से बेदखल किए जाने के मामलों को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरने की तैयारी शुरू कर दी है। सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र के अलावा सिंगरौली, देवास, बुरहानपुर, बड़वानी, पन्ना और छतरपुर सहित कई जिलों में ऐसी कार्रवाई होने का दावा करते हुए पार्टी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अध्यक्षता में गठित 10 सदस्यीय दल मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लेगा। वहीं, प्रदेश कांग्रेस ने आदिवासी कांग्रेस को भी प्रभावित इलाकों में टीमें भेजकर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि एक ओर आदिवासियों के वन अधिकार पट्टों से जुड़े मामलों का निपटारा नहीं हो रहा है, वहीं दूसरी ओर अतिक्रमण के नाम पर लंबे समय से जमीन पर काबिज परिवारों को हटाया जा रहा है। पार्टी इस मुद्दे को नवंबर में प्रस्तावित विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उठाने की तैयारी कर रही है।
बुधनी में फसल उजाड़ने और मकान तोड़ने का आरोप
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र में हाल ही में हुई कार्रवाई में आदिवासियों की फसल नष्ट करने के साथ उनके मकान भी ध्वस्त किए गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया है कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी आदिवासी परिवारों को जमीन से हटाए जाने के मामले सामने आए हैं।
पार्टी का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद तैयार रिपोर्ट के आधार पर सरकार के सामने मामला उठाया जाएगा।
वन अधिकार के करीब पौने तीन लाख मामलों पर सवाल
कांग्रेस ने वन अधिकार कानून के तहत लंबित दावों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के अनुसार, वन अधिकार से जुड़े करीब पौने तीन लाख मामलों पर अब तक निर्णय नहीं हुआ है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इन मामलों की समीक्षा कर जल्द फैसला लेने का आश्वासन देती रही है, लेकिन लंबित दावों के निपटारे में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।
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कांग्रेस इस मुद्दे को आदिवासी परिवारों के जमीन पर अधिकार और उनकी आजीविका से जोड़कर विधानसभा में उठाएगी।
गैर-आदिवासियों को जमीन बेचने और नामांतरण का मुद्दा भी उठेगा
जमीन से बेदखली के अलावा कांग्रेस आदिवासियों की भूमि गैर-आदिवासियों को बेचे जाने और उसके नामांतरण के मामलों को भी विधानसभा में उठाने की तैयारी में है। जीतू पटवारी ने दावा किया है कि पिछले वर्षों में करीब 1.26 लाख हेक्टेयर यानी लगभग तीन लाख एकड़ जमीन गैर-आदिवासियों को बेची गई है। कांग्रेस इस संबंध में सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है।
