सीमित संसाधनों में भी स्कूलों का किया कायाकल्प, नवाचार बने बदलाव की नींव
सीधी के शिक्षक शैलेंद्र प्रताप सिंह ने सीमित संसाधनों के बावजूद दो स्कूलों का कायाकल्प कर उन्हें नवाचार का केंद्र ...और पढ़ें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सम्मानित होते शिक्षक शैलेंद्र सिंह (दाएं) व बाएं खड़े मंत्री प्रहलाद जोशी।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नीलांबुज पांडे, सीधी। जर्जर भवन, सीमित संसाधन और छात्रों की उपस्थिति न के बराबर। देशभर में कई स्कूलों के ऐसे ही हालात हैं। मध्य प्रदेश के सीधी के शिक्षक शैलेंद्र प्रताप सिंह ने सामूहिक प्रयासों से दो स्कूलों का कायाकल्प कर शिक्षा को नवाचार से जोड़कर प्रेरणा का केंद्र बना दिया है।
उन्होंने बच्चों को तकनीक से जोड़ा और खेल-खेल में शिक्षा देकर प्रोत्साहित किया। इसका असर यह हुआ कि उनका स्कूल शून्य शाला त्यागी छात्रों के मामले में माडल बन गया है। उत्कृष्ट कार्यों के लिए शिक्षक दिवस पर उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान 2026 से सम्मानित किया है।
शैलेंद्र बताते हैं कि 22 अक्टूबर 2011 को उनकी प्रथम पदस्थापना के समय शासकीय प्राथमिक शाला अगरियान टोला कंजवार में केवल 11 विद्यार्थी दर्ज थे, लेकिन इनमें से तीन ही स्कूल आते थे। भवन जर्जर था और संसाधनों का अभाव था। शिक्षक पिता रामदेव सिंह के अनुभव और प्रेरणा से शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाने का संकल्प लिया। निरंतर प्रयासों से स्कूल की दर्ज संख्या बढ़कर 121 हुई।

दो जर्जर स्कूलों का कायाकल्प
दो विद्यार्थियों का नवोदय, सैनिक स्कूल और ओलिंपियाड में चयन हुआ तो बच्चों में उत्साह जागा। स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 202 हो गई है। उपस्थिति 96 प्रतिशत से अधिक है। 26 शाला त्यागी विद्यार्थियों का उन्होंने पुनः नामांकन कराया जिससे अब स्कूल में शाला त्यागी बच्चों की संख्या शून्य है। शैलेंद्र को 13 अगस्त 2024 को पूर्व माध्यमिक विद्यालय कंजवार का दायित्व मिला तो फिर वही चुनौतियां थीं।
जर्जर स्कूल, गंदा परिसर और घटता जनविश्वास। उन्होंने ग्रामवासियों, पालकों, विद्यालय प्रबंधन समिति और जनप्रतिनिधियों के साथ जनभागीदारी अभियान चलाया। लगभग पांच लाख रुपये का सहयोग मिला, जिससे 900 फीट बाउंड्रीवाल, पेयजल, मरम्मत, रंगाई-पुताई और फर्नीचर के कार्य कराए।
शिक्षा को आनंददायी बनाने ये नवाचार किए
- 500 शिक्षण सहायक सामग्री तैयार की, प्रोजेक्टर, क्यूआर आधारित शिक्षा, बिरसा मुंडा उद्यान और पोषण वाटिका जैसे नवाचारों से बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं।
- बालिकाओं के स्वास्थ्य के लिए वेतन से दो सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और दो कचरा निष्पादन के उपकरण लगवाए।
- बाल संसद और सप्ताह में एक दिन छात्र को प्रधानाध्यापक बनाया तो वे स्कूल संचालन की कला सीखने लगे।
- 1336 पौधों का रोपण किया, 400 निराश्रित मवेशियों के लिए रिफ्लेक्टिव कालर और पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था की।
- 'समय का प्रबंधन और पर्यावरण अध्ययन क्यों आवश्यक' पुस्तकें लिखीं, छह क्रियात्मक शोध किए।
ये सम्मान मिले
शैलेंद्र सिंह को 2023 में भोपाल में राज्यपाल ने राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया। कलेक्टर ने मई 2026 में स्टार आफ द मंथ से सम्मानित किया। 25 अक्टूबर 2025 को उन्हें विश्वामित्र आदर्श शिक्षक सम्मान मिला।
नए संकल्प की शुरुआत
राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान मिलने के बाद शैलेंद्र सिंह ने कहा कि यह केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी और नए संकल्प की शुरुआत है। उनका प्रयास रहेगा कि उनके विद्यालय के नवाचार अधिक से अधिक शिक्षकों तक पहुंचें। उन्होंने कहा कि कि सीमित संसाधनों में भी इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच से शिक्षा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माता है।
शिक्षक शैलेन्द्र सिंह शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार करते रहे हैं। बाल संसद, पोषण वाटिका सहित पौधारोपण के क्षेत्र में उन्होंने उत्कृष्ट कार्य किए हैं। अब जिले के प्रत्येक स्कूल को उनके इन नवाचारों से जोड़ा जाएगा।
विकास मिश्रा, कलेक्टर सीधी।
