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MP के 58 लाख स्कूली बच्चों को यूनिफॉर्म की जगह मिलेंगे ₹600! सरकार फिर बदलेगी नियम

Published: Mon, 28 Sep 2026 11:08 PM (IST)

मध्य प्रदेश के 58 लाख से अधिक स्कूली छात्रों को अब यूनिफॉर्म की जगह सीधे 600 रुपये मिलेंगे। सरकार ने ...और पढ़ें

शासकीय स्कूल के बच्चे। (प्रतीकात्मक चित्र)

शासकीय स्कूल के बच्चे। (प्रतीकात्मक चित्र)

HighLights

  1. 58 लाख छात्रों को यूनिफॉर्म के बदले 600 रुपये मिलेंगे।

  2. कानूनी विवाद के कारण यूनिफॉर्म टेंडर प्रक्रिया रुकी।

  3. मुख्यमंत्री मोहन यादव की कैबिनेट बैठक में होगा फैसला।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ने वाले 58 लाख से अधिक विद्यार्थियों को इस बार ड्रेस के बजाय नकद राशि मिल सकती है। सरकार प्रति विद्यार्थी 600 रुपये डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खाते में भेजने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर निर्णय लिया जा सकता है।

सरकार ने जून 2026 में विद्यार्थियों को दो-दो ड्रेस सिलवाकर देने का फैसला किया था। इसके लिए मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम ने 3 जून को करीब 350 करोड़ रुपये की निविदा जारी की थी। हालांकि, निविदा प्रक्रिया से जुड़ा मामला हाई कोर्ट पहुंचने के बाद अंतरिम रोक लग गई। सितंबर खत्म होने को है और अब तक टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।

समय पर ड्रेस पहुंचाना मुश्किल 

स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि यदि अब निविदा प्रक्रिया शुरू की जाती है तो ड्रेस तैयार कराने और उन्हें प्रदेशभर के स्कूलों तक पहुंचाने में काफी समय लगेगा। ऐसे में विद्यार्थियों को ड्रेस देने के बजाय सीधे राशि उपलब्ध कराने का विकल्प तैयार किया गया है।

विभाग ने इसी आधार पर कैबिनेट के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में लिया जाएगा।

पहले भी कई बार बदली व्यवस्था

सरकारी स्कूलों के बच्चों की गणवेश को लेकर व्यवस्था पहले भी कई बार बदली जा चुकी है। वर्ष 2020 में ड्रेस सिलाई का काम महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा गया था, लेकिन समय पर वितरण नहीं हो सका। मार्च 2021 में सत्र बीतने के बाद ड्रेस स्कूलों तक पहुंची। कोरोना काल में स्कूल बंद होने के कारण शिक्षकों को घर-घर जाकर गणवेश वितरित करनी पड़ी।

इसके बाद भी देरी का सिलसिला जारी रहा। वर्ष 2022 की ड्रेस कई विद्यार्थियों को 2023 में मिली, जबकि कुछ बच्चों को 2024 का सत्र खत्म होने तक भी गणवेश नहीं मिल सकी।

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पहले नकद राशि दी, फिर क्यों बदली गई व्यवस्था?

लगातार हो रही देरी को देखते हुए सरकार ने विद्यार्थियों के खातों में सीधे राशि भेजने की व्यवस्था अपनाई थी। हालांकि, बाद में इसे बदलने का निर्णय लिया गया। विभाग का तर्क था कि कुछ अभिभावक गणवेश के लिए दी गई राशि का उपयोग अन्य जरूरतों में कर लेते हैं, जिससे योजना का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता।

इसी वजह से विद्यार्थियों को तैयार ड्रेस उपलब्ध कराने का फैसला किया गया था। लेकिन टेंडर प्रक्रिया कानूनी विवाद में फंसने के बाद सरकार अब फिर सीधे खाते में राशि भेजने के विकल्प पर विचार कर रही है।

गणवेश के अलावा मंगलवार की कैबिनेट बैठक में दमोह जिले के नए मार्गों से जुड़े प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया जा सकता है। साथ ही वर्ष 2031 तक निरंतर जारी रखी जाने वाली योजनाओं के लिए वित्तीय स्वीकृति देने से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक में रखे जाने हैं।