विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

MP के स्टेट हाईवे होंगे गोवंश मुक्त, हर 5 किमी पर बनेगी गोशाला; सरकार ला रही नई SOP

By Saurabh SoniEdited By: Ravindra Soni
Published: Mon, 06 Jul 2026 07:23 PM (IST)

मध्य प्रदेश सरकार सड़कों पर बेसहारा गोवंश से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जल्द नई एसओपी लागू करेगी। ...और पढ़ें

सड़क पर गोवंश (प्रतीकात्मक चित्र)

सड़क पर गोवंश (प्रतीकात्मक चित्र)

HighLights

  1. सड़कों पर गोवंश से दुर्घटनाएं रोकने नई एसओपी।

  2. हर 5 किमी पर टीन शेड युक्त गोशालाएं बनेंगी।

  3. सड़क निर्माण एजेंसियां करेंगी गोशालाओं का संचालन।

सौरभ सोनी, भोपाल। मध्य प्रदेश में सड़कों पर विचरण करने वाले बेसहारा गोवंश से होने वाली दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार जल्द नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने जा रही है। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) ने इसका मसौदा तैयार कर शासन को भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही इसे प्रदेशभर के स्टेट हाईवे पर लागू किया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत राज्य राजमार्गों के किनारे गोवंश के लिए टीन शेड युक्त बाड़े (गोशाला) और चबूतरे बनाए जाएंगे। साथ ही सड़क निर्माण करने वाली एजेंसियों को ही इनका निर्माण और संचालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

हर पांच किमी पर होगी विशेष व्यवस्था

एमपीआरडीसी की योजना के अनुसार, प्रत्येक पांच किलोमीटर के दायरे में गोवंश के लिए टीन शेड वाला आश्रय और चबूतरे बनाए जाएंगे, ताकि पशु सड़क पर बैठने के बजाय सुरक्षित स्थानों पर रह सकें। इसके अलावा एक बड़े रेस्क्यू वाहन की व्यवस्था भी होगी, जो सड़क पर बैठे बेसहारा गोवंश को सुरक्षित रूप से गोशालाओं तक पहुंचाएगा।

नई सड़कों के निर्माण के लिए जारी होने वाले टेंडरों में इन व्यवस्थाओं को अनिवार्य शर्त के रूप में शामिल किया जाएगा। संबंधित निर्माण एजेंसियां स्थानीय प्रशासन के समन्वय से गोवंश को सड़क से हटाकर निर्धारित आश्रय स्थलों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाएंगी।

बारिश में बढ़ जाती है दुर्घटनाओं की आशंका

अधिकारियों के अनुसार, बारिश के दौरान सड़कें आसपास के क्षेत्रों की तुलना में जल्दी सूख जाती हैं। इसी कारण गोवंश बड़ी संख्या में सड़कों पर बैठ जाता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। नई एसओपी का उद्देश्य इसी समस्या का स्थायी समाधान करना है।

विधानसभा में भी उठा था मुद्दा

सड़कों पर गोवंश की मौजूदगी और उससे होने वाली दुर्घटनाओं का मुद्दा विधानसभा में भी कई बार उठ चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। सत्ता और विपक्ष दोनों के विधायकों ने गोवंश संरक्षण और सड़क सुरक्षा को लेकर सुझाव दिए थे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के सुझावों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

यह भी पढ़ें- MP के डेढ़ लाख शिक्षकों की TET पर नया मोड़, परीक्षा की तैयारी तेज... राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट भी जाएगी सरकार

नेशनल हाईवे पर पहले से चल रही है व्यवस्था

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के भोपाल प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवांश नवल के अनुसार, गोवंश के कारण सबसे अधिक दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों पर होती हैं। इसे देखते हुए एनएचएआई ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर विशेष रेस्क्यू दल गठित किए हैं।

टोल प्लाजा पर उपलब्ध काऊ कैचिंग व्हीकल की मदद से सड़क पर मौजूद गोवंश को पकड़कर नजदीकी गोशालाओं तक पहुंचाया जाता है। लगभग 60 किलोमीटर के दायरे में यह वाहन दिन और रात में दो-दो बार गश्त करता है। रायसेन, नर्मदापुरम, गुना समेत कई जिलों में यह व्यवस्था पहले से लागू है। इसके अलावा गोवंश की गर्दन और सींग पर रेडियम पट्टी भी लगाई जा रही है, ताकि रात के समय वाहन चालक उन्हें दूर से देखकर समय रहते गति कम कर सकें।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग की पहले से एसओपी लागू है। हम अपनी नई सड़कों पर गोवंश प्रबंधन के लिए एसओपी बना रहे हैं, जिसमें प्रयोग के तौर पर कुछ नई सड़कों के किनारे गोशालाएं बनाई जाएंगी। टेंडर की शर्तों में इसके प्रावधान कर रहे हैं। परिणामों के आधार पर आगे कार्रवाई करेंगे।
- भरत यादव, प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम।