MP में PNG कनेक्शन की धीमी रफ्तार: दो लाख घरों तक पहुंची पाइपलाइन, आधे ही जले चूल्हे
मप्र में दो लाख घरों तक पीएनजी कनेक्शन पहुंच गए हैं, लेकिन केवल एक लाख परिवार ही नियमित उपभोक्ता हैं। ...और पढ़ें

घर में पीएनजी कनेक्शन (AI Generated image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, भोपाल। प्रदेश में पीएनजी यानी पाइप्ड नैचुरल गैस का कनेक्शन दो लाख घरों तक पहुंच गया है, लेकिन इसके नियमित उपभोक्ता केवल एक लाख परिवार ही हैं। कई जगहों पर उपभोक्ताओं तक कनेक्शन पहुंचने के बावजूद गैस की आपूर्ति शुरू नहीं की जा सकी है। नए आदेश आने के बाद इसमें तेजी लाने की बात कही जा रही है।
पाइपलाइन बिछी, लेकिन चूल्हे ठंडे
राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के अनेक जिलों में पिछले तीन सालों से पाइपलाइन बिछाने का काम बहुत तेजी से किया जा रहा है। इसके तहत अधिकांश क्षेत्रों में पाइपलाइन तो बिछ गई, लेकिन लोगों के घर-घर कनेक्शन देने का काम अभी धीमा है और जहां पर उपभोक्ताओं को कनेक्शन मिल गए हैं, वहां पर आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसका मुख्य कारण पाइपलाइन होने के बावजूद घर तक अंतिम कनेक्शन में देरी, लोगों में जानकारी की कमी और अधिक शुरुआती खर्च बताया जा रहा हैं।
इंदौर आगे, भोपाल फिसड्डी
जानकारी के अनुसार पीएनजी कनेक्शन देने में इंदौर पहले, ग्वालियर दूसरे स्थान पर है जबकि भोपाल में यह काम काफी पिछड़ा हुआ है। इंदौर ने 50 हजार लक्ष्य के बदले में एक लाख 23 हजार 804 घरेलू पीएनजी कनेक्शन दिए हैं, जो तय लक्ष्य से अधिक हैं। इसी तरह, ग्वालियर ने भी तय लक्ष्य 44 हजार के बदले में 63 हजार 150 कनेक्शन दिए हैं। वहीं भोपाल में पांच लाख 50 हजार 222 का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बदले में अब तक महज 40 हजार कनेक्शन ही दिए गए हैं।
पिछड़ रहा है काम
बता दें सरकार और कंपनियों ने बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे गैस पाइपलाइन और कनेक्शन) की योजना बनाकर उसे स्थापित तो कर दिया, लेकिन लोगों को कनेक्शन व आपूर्ति समय से शुरू नहीं होने से काम पिछड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में पीएनजी पाइपलाइन स्वीकृत हो चुकी है या फिर निर्माणाधीन है। अभी तक घरेलू कनेक्शन देने का काम धीमी गति से चल रहा था लेकिन अब इसे तेजी से पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
पीएनजी नेटवर्क की स्थिति
क्लस्टर - लक्ष्य - कनेक्शन
रायसेन, सीहोर, शाजापुर - 4,00,001 - 7,913
देवास - 40,000 - 23,063
मुरैना -8,160 - 4,014
शिवपुरी - 27,229 - 3,126
रीवा - 7,861 - 2,830
गुना - 4,900 - 1,767
अशोक नगर - 3,885 - 1,804
जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी - 15,00,000- 00
नर्मदापुरम, सागर - विदिशा - 6,63,000 - 00
खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर -5,11,000 - 00
बैतूल, छिंदवाड़ा, बालाघाट,सिवनी - 4,00,000 – 145
(स्रोत: केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की रिपोर्ट)
इन वजहों से पीएनजी से परहेज
- लोग पाइप्ड गैस की निर्बाध आपूर्ति पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
- कनेक्शन की शुरुआती लागत अधिक है, इसलिए लोग एलपीजी छोड़कर पीएनजी पर शिफ्ट नहीं हो रहे हैं।
- एलपीजी सिलिंडर को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में आसानी होती है, यह सुविधा स्थायी पाइप वाली पीएनजी में नहीं मिलेगी इससे भी हिचकिचाहट।
- पीएनजी हल्की है और एलपीजी की अपेक्षा इसकी आंच कम तीखी है, यह धारणा भी बनी हुई है।
- पाइप्ड गैस में पानी की पाइपलाइन की तरह रोज की टूटफूट और लीकेज से आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी लोगों को डरा रही है।
(कई क्षेत्रों में लोगों ने जैसे बातचीत में बताया)
जहां पीएनजी उपलब्धता वहां एलपीजी बंद होगी
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पिछले दिनों नया आदेश जारी किया है। इसके तहत जिन क्षेत्रों में पीएनजी की उपलब्धता है, वहां के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को तीन माह के अंदर इसका कनेक्शन लेना होगा। समय सीमा में ऐसा नहीं करने पर उनके यहां एलपीजी की आपूर्ति रोक दी जाएगी।
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भोपाल में थिंक गैस कंपनी ने अभी तक 40 हजार उपभोक्ताओं को कनेक्शन उपलब्ध करवा दिए हैं, जिनमें से अधिकांश को आपूर्ति भी शुरू कर दी गई है। केंद्र सरकार द्वारा दिए गए आदेश के बाद कंपनी प्रबंधन को तेजी से कनेक्शन उपलब्ध करवाने और आपूर्ति शुरू करने के लिए कहा गया है।
- चंद्रभान सिंह जादौन, जिला आपूर्ति नियंत्रक भोपाल।
