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मध्य प्रदेश: डिप्टी सीएम के पूर्व ओएसडी दीपम रायचुरा पर लोकायुक्त का शिकंजा, फर्जी FDR मामले में एफआईआर दर्ज

Published: Sat, 24 Oct 2026 11:33 PM (IST)

मध्य प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम के ओएसडी दीपम रायचुरा और शराब ठेकेदार जसवंत सिंह के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने ...और पढ़ें

फर्जी एफडीआर मामले में डिप्टी सीएम के पूर्व ओएसडी दीपम रायचुरा पर लोकायुक्त का शिकंजा (फाइल फोटो)

फर्जी एफडीआर मामले में डिप्टी सीएम के पूर्व ओएसडी दीपम रायचुरा पर लोकायुक्त का शिकंजा (फाइल फोटो)

HighLights

  1. दीपम रायचुरा पर फर्जी ई-एफडीआर उपयोग का आरोप।

  2. लोकायुक्त ने शराब ठेकेदार जसवंत सिंह को भी आरोपी बनाया।

  3. पद के दुरुपयोग और षड्यंत्र रचने का मामला दर्ज।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के ओएसडी रहे (अब निलंबित) सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचुरा के विरुद्ध लोकायुक्त पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।

भोपाल में वर्ष 2024 में शराब दुकान का ठेका लेने के लिए पौने तीन करोड़ रुपये की फर्जी ई-एफडीआर (फिक्स्ड डिपाजिट रिसीट) और फर्जी सत्यापन रिपोर्ट को गारंटी के रूप में उपयोग के मामले में शनिवार को एफआईआर दर्ज की गई। इसमें शराब दुकान ठेकेदार जसवंत सिंह को भी आरोपित बनाया गया है।

दीपम पर जसवंत सिंह के साथ मिलकर षड्यंत्र रचने और पद के दुरुपयोग का आरोप है। डीजी लोकायुक्त योगेश देशमुख ने बताया कि स्वतः संज्ञान लेकर प्रथमदृष्ट्या अनियमितता पाए जाने पर प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।

अब संबंधित शासकीय सेवकों और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में 15 से अधिक मामलों में ठगी के आरोप में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद मोहित गोगिया के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को दिए कथित बयान में शराब का ठेका प्राप्त करने के लिए दीपम को एक करोड़ रुपये रिश्वत देने की बात सामने आई थी।

आरोप के अगले ही दिन नौ अक्टूबर को जगदीश देवड़ा ने दीपम को ओएसडी के प्रभार से मुक्त कर दिया था। लोकायुक्त संगठन की एफआईआर में रिश्वत लेने के आरोप का उल्लेख नहीं है।
इसी तरह से आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना की जांच रिपोर्ट भी सिर्फ फर्जी एफडीआर तक सीमित रही। इसके बाद दीपम को निलंबित किया गया था।

पुलिस की एफआईआर में दीपम का नाम नहीं

लोकायुक्त संगठन ने दीपम के विरुद्ध केस दर्ज कर लिया, लेकिन इसी मामले में आबकारी विभाग द्वारा कोहेफिजा थाने में दर्ज कराई एफआईआर में दीपम का नाम नहीं है। इसमें केवल जसवंत सिंह को आरोपित बनाया गया है, जबकि आबकारी आयुक्त की सात बिंदुओं वाली रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि दीपम ने फर्जी एफडीआर स्वीकृत कराने में ठेकेदार का कई स्तर पर सहयोग किया था।