विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

MP में प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु रोकने की नई व्यवस्था, लेबर रूम में रक्तस्राव मापने लगेंगे विशेष ड्रेप; खून की हर बूंद का होगा हिसाब

Published: Tue, 15 Sep 2026 06:04 PM (IST)

मध्य प्रदेश के अस्पतालों में प्रसव के दौरान होने वाली मातृ मृत्यु को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग एक नई ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु रोकने स्वास्थ्य विभाग की नई व्यवस्था।

  2. लेबर रूम में रक्तस्राव मापने विशेष 'आब्स्ट्रेटिक ड्रेप' का उपयोग।

  3. पीपीएच की समय पर पहचान, उपचार से मातृ मृत्यु दर में कमी।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश के अस्पतालों में प्रसव के दौरान होने वाली मातृ मृत्यु रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है। अब लेबर रूम में प्रसव के बाद होने वाले रक्तस्राव का अंदाजा नहीं लगाया जाएगा, बल्कि उसकी वास्तविक मात्रा मापी जाएगी। इसके लिए प्रदेश के सभी प्रसव कक्षों में आब्स्ट्रेटिक ड्रेप यानी प्रसूति रक्तस्राव मापने वाले विशेष बैग उपलब्ध कराए जाएंगे।

प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव को पोस्ट पार्टम हैमरेज (पीपीएच) कहा जाता है। यह मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। ड्रेप में रक्त एकत्र होने से चिकित्सकों को यह तुरंत पता चल सकेगा कि प्रसूता का कितना रक्तस्राव हुआ है और स्थिति पीपीएच की ओर बढ़ रही है या नहीं। इससे जरूरत पड़ने पर तत्काल उपचार और रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

1500 से ज्यादा लेबर रूम में पहुंचेंगे बैग

प्रदेश में 1500 से अधिक प्रसव कक्ष हैं। स्वास्थ्य विभाग इन सभी में चरणबद्ध तरीके से आब्स्ट्रेटिक ड्रेप उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। इनकी खरीदी मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कारपोरेशन के माध्यम से की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि अभी प्रसव के दौरान रक्तस्राव की मात्रा का आकलन कई बार अनुमान के आधार पर किया जाता है। ऐसे में वास्तविक मात्रा का पता चलने में देरी हो सकती है। ड्रेप से रक्तस्राव को मापने की सुविधा मिलने पर पीपीएच की पहचान शुरुआती चरण में ही हो सकेगी।

प्रदेश में मातृ मृत्यु अनुपात 159

मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 2020-22 में प्रति एक लाख प्रसूताओं पर 159 था। वहीं, दुनियाभर में प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में है। भारत में करीब 19.9 प्रतिशत मातृ मौतें पीपीएच से जुड़ी बताई जाती हैं।

स्वास्थ्य विभाग के सामने एनीमिया भी बड़ी चुनौती है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के मुताबिक प्रदेश में 15 से 49 वर्ष की 54.7 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। ऐसे में प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव की समय पर पहचान और उपचार बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

यह भी पढ़ें- MP में मेधावी विद्यार्थियों को बड़ा तोहफा, 19 सितंबर को खातों में आएगी स्कूटी की राशि; 7500+ छात्रों को मिलेगा लाभ

अस्पतालों में व्यवस्था, लेकिन घर पर प्रसव अब भी चुनौती

स्वास्थ्य विभाग की यह व्यवस्था संस्थागत प्रसव को सुरक्षित बनाने में मदद करेगी, लेकिन घर पर होने वाले प्रसव अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 के अनुसार मध्य प्रदेश में 89.8 प्रतिशत प्रसव संस्थागत होते हैं। यानी करीब 10 प्रतिशत प्रसव अब भी घरों में होते हैं।

घर पर प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होने पर समय पर इसकी पहचान और उपचार नहीं मिल पाने से मातृ मृत्यु का जोखिम बना रहता है। ऐसे में अस्पतालों में रक्तस्राव की सटीक माप की यह व्यवस्था मातृ स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।