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MP में साढ़े 4 लाख शासकीय कर्मचारियों को मिल सकता है UPS का विकल्प, दिसंबर में सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी समिति

Published: Mon, 19 Oct 2026 07:02 PM (IST)

प्रदेश में 2005 के बाद भर्ती हुए अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए लागू है अंशदान आधारित राष्ट्रीय पेंशन योजना। अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव की अध्यक्षता में बनाई है समिति।

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. MP सरकार साढ़े चार लाख कर्मचारियों को UPS का विकल्प देगी।

  2. एकीकृत पेंशन योजना NPS से बेहतर निश्चित पेंशन प्रदान करेगी।

  3. गठित समिति दिसंबर अंत तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। प्रदेश के साढ़े चार लाख से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पेंशन को लेकर अहम फैसला हो सकता है। राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को राज्य सरकार एकीकृत पेंशन योजना (UPS) का विकल्प देने पर विचार कर रही है। इसके लिए गठित समिति कर्मचारी संगठनों से चर्चा करने के साथ दूसरे राज्यों में लागू प्रावधानों का अध्ययन कर रही है। समिति को दिसंबर के अंत तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है।

पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग के बीच राज्य सरकार ने UPS लागू करने की संभावनाओं और उससे जुड़े प्रशासनिक व वित्तीय पहलुओं का आकलन शुरू किया है। अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली समिति यह देख रही है कि प्रदेश में इस योजना को लागू करने से सरकार पर कितना वित्तीय भार आएगा और कर्मचारियों के लिए इसके क्या लाभ हो सकते हैं।

अंतिम वेतन का 50% पेंशन का प्रावधान

केंद्र सरकार ने अप्रैल 2025 से एकीकृत पेंशन योजना लागू की है। इसके तहत पात्र कर्मचारियों को निश्चित पेंशन का प्रावधान किया गया है। योजना के प्रमुख प्रावधानों के अनुसार, 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले पात्र कर्मचारी को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन की गारंटी दी गई है।

वहीं, 25 वर्ष या उससे अधिक की अर्हकारी सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी को सेवानिवृत्ति से पहले के अंतिम 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलने का प्रावधान है। पेंशनभोगी की मृत्यु होने पर पात्र परिवार को कर्मचारी की पेंशन का 60 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में देने की व्यवस्था भी है।

इन प्रावधानों के चलते UPS को NPS के मुकाबले निश्चित पेंशन की सुरक्षा चाहने वाले कर्मचारियों के लिए एक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, प्रदेश में इसे लागू करने पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।

दूसरे राज्यों के नियमों का अध्ययन

समिति केवल योजना के लाभों का आकलन नहीं कर रही, बल्कि इसे मध्य प्रदेश में लागू करने से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर भी विचार कर रही है। इसके लिए कर्मचारी संगठनों से सुझाव लिए जा रहे हैं और दूसरे राज्यों में अपनाए गए प्रावधानों का अध्ययन किया जा रहा है।

एकीकृत पेंशन योजना को लेकर कर्मचारियों के बीच अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। ऐसे में समिति योजना की स्वीकार्यता, प्रशासनिक व्यवस्था और राज्य के वित्तीय संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखकर अपनी अनुशंसा तैयार करेगी।

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दिसंबर अंत तक सरकार को मिलेगी रिपोर्ट

अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव के अनुसार, समिति प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं का आकलन कर रही है। कर्मचारी संगठनों के साथ भी विचार-विमर्श जारी है। निर्धारित समयसीमा के भीतर रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी।

रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार तय करेगी कि मध्य प्रदेश में UPS का विकल्प दिया जाए या नहीं और यदि दिया जाता है, तो इसे लागू करने की प्रक्रिया क्या होगी।