MP के गांधी सागर अभयारण्य को मिली दूसरी मादा चीता 'राधा', CM मोहन यादव ने बाड़े में छोड़ा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गांधी सागर अभयारण्य में बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता 'राधा' को छोड़ा, जो कूनो के बाद मध्य प्रदेश में चीतों का दूसरा घर है।

गांधी सागर अभयारण्य में आई नई मादा चीता राधा
HighLights
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मादा चीता 'राधा' को छोड़ा
गांधी सागर अभयारण्य चीतों का दूसरा घर बना
'राधा' को प्रजनन प्रयासों के लिए लाया गया
डिजिटल डेस्क, मंदसौर । मध्य प्रदेश में कूनो नेशनल पार्क के बाद चीतों का दूसरा घर बन चुके मंदसौर-नीमच जिलों में स्थित गांधी सागर अभयारण्य में रविवार शाम को एक और मादा चीता छोड़ी गई।
मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने बोत्सवाना से 28 फरवरी को भारत लाई गई मादा चीता सीसीबी-2 को गांधीसागर अभयारण्य में छोड़ा। इसके साथ ही उसे राधा नाम भी दे दिया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री डा. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 100 साल पहले एशिया से विलुप्त हुए चीतों के भारत में पुनर्स्थापना की जो योजना बनाई, वह मध्य प्रदेश में साकार हो रही है।
अभी प्रदेश में 56 से ज्यादा चीते हैं। बता दें कि राधा से पहले 20 अप्रैल 2025 में गांधी सागर में दो नर चीते- प्रभास और पावक के बाद 17 सितंबर 2025 को मादा चीता धीरा को यहां छोड़ा गया था। प्रभास और पावक एक बाड़े में रह रहे हैं। धीरा अलग बाड़े में हैं।
करीब एक साल में धीरा के पावक व प्रभास के साथ मेटिंग के सारे प्रयास नाकाम हो गए, जबकि वन विभाग के अधिकारी कई बार तीनों को एक साथ बाड़े में छोड़ चुके हैं, लेकिन धीरा ने कोई सकारात्मक रुख नहीं दिखाया।
इसके बाद से ही कूनो से एक और मादा चीता के आने का इंतजार किया जा रहा था। अब राधा को कुछ दिन अलग बाड़े में रखने के बाद प्रभास व पावक से मेटिंग के प्रयास कराए जाएंगे।
64 वर्ग किमी क्षेत्र में तैयार किया गया आवास
गांधीसागर में चीतों के लिए करीब 64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बाड़े तैयार किए गए हैं। इनमें आठ क्वारंटाइन बाड़े भी है। यहां व्यवस्थाओं को मजबूत करने के साथ चीतों के अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है।
