MP में खाद लेने के नियम बदले: Farmer ID नहीं तो टोकन नहीं, जानिए क्या करें किसान
मध्य प्रदेश में रबी फसलों की बोवनी के बीच खाद वितरण के नियम बदल गए हैं। अब किसानों को खाद ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
खाद वितरण के लिए ई-विकास पोर्टल पर टोकन अनिवार्य।
फार्मर आईडी के बिना नहीं मिलेगा खाद का टोकन।
प्रदेश में 11.50 लाख टन खाद उपलब्ध, वितरण तेज।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। प्रदेश में रबी फसलों की बोवनी तेज होने के साथ खाद की मांग भी बढ़ने लगी है। किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराने और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने ई-विकास पोर्टल के जरिए टोकन की व्यवस्था लागू की है। अब खाद प्राप्त करने के लिए किसानों के पास फार्मर आईडी होना अनिवार्य है। इसके बिना टोकन जनरेट नहीं किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित करने और खाद वितरण को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
प्रदेश में फिलहाल यूरिया, डीएपी और एनपीके सहित कुल 11.50 लाख टन खाद उपलब्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को कलेक्टरों और संभागायुक्तों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में स्थानीय स्तर पर खाद वितरण की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों को जरूरत के समय परेशानी का सामना न करना पड़े।
अक्टूबर में ही बांटी गई 2.90 लाख टन खाद
कमजोर मानसून के चलते मालवांचल सहित प्रदेश के कई इलाकों में सितंबर के अंतिम सप्ताह से ही रबी फसलों की बोवनी शुरू हो गई थी। अब कृषि गतिविधियों में तेजी आने के साथ खाद की मांग भी बढ़ रही है। इसे देखते हुए सरकार ने खरीफ सीजन से ही रबी के लिए खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी शुरू कर दी थी।
विभागीय जानकारी के मुताबिक, किसानों के लिए अब तक आठ लाख टन खाद का अग्रिम भंडारण कराया जा चुका है। वहीं, अक्टूबर महीने में ही 2.90 लाख टन खाद का वितरण किया जा चुका है। सरकार का जोर अब उपलब्ध भंडार को जरूरत के मुताबिक किसानों तक पहुंचाने पर है।
ई-विकास पोर्टल से बनेगा टोकन, फार्मर आईडी जरूरी
खाद वितरण में पारदर्शिता लाने और वास्तविक किसानों तक खाद पहुंचाने के लिए ई-विकास पोर्टल के माध्यम से टोकन जनरेट करने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए फार्मर आईडी अनिवार्य होगी। इस आईडी में किसान की भूमि से संबंधित जानकारी दर्ज रहती है, जिसके आधार पर उसकी पहचान और पात्रता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
प्रदेश में अब तक एक करोड़ से अधिक किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। जिन किसानों की आईडी अभी नहीं बनी है, उन्हें इसके लिए आवेदन करना होगा। संबंधित एसडीएम द्वारा सत्यापन के बाद टोकन जनरेट कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
खाद की उपलब्धता
यूरिया- 5.75 लाख टन का भंडार है। गत वर्ष इस अवधि में तीन लाख टन था।
डीएपी- दो लाख टन है। गत वर्ष 1.70 लाख टन था।
एनपीके- 3.75 लाख टन है, जो गत वर्ष 2.30 लाख टन था।
