MP में CPCT बनी पदोन्नति की राह में रोड़ा तो CM ने बदले नियम; हजारों तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
हजारों कर्मचारी हो रहे थे प्रभावित, चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की सहायक ग्रेड तीन के पद पर रुक गई थी ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (फाइल फोटो)
HighLights
सीपीसीटी के कारण हजारों कर्मचारियों की पदोन्नतियां रुकी थीं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अनिवार्यता खत्म करने के निर्देश दिए।
इस निर्णय से 6-7 हजार कर्मचारियों को सीधा लाभ।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। प्रदेश में सीपीसीटी (कंप्यूटर प्रवीणता एवं प्रमाणन परीक्षा) की अनिवार्यता का हवाला देकर हजारों पात्र कर्मचारियों की पदोन्नतियां रोक दी गईं। कृषि और उद्योग विभाग ने तो कई मामलों में पदोन्नति आदेश भी निरस्त कर कर्मचारियों को दोबारा चतुर्थ श्रेणी के पद पर भेज दिया।
इससे कर्मचारियों में नाराजगी भी पनपी और कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अनुरोध किया कि व्यवस्था में परिवर्तन किया जाए। इसे स्वीकार करते हुए उन्होंने बड़ा कदम उठाते हुए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की पदोन्नति में सीपीसीटी परीक्षा के आधार पर पदोन्नति से वंचित या रिवर्ट नहीं करने की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए।
पदोन्नति के बाद फिर चतुर्थ श्रेणी में भेजे गए कर्मचारी
प्रदेश में पदोन्नति नियम 2025 के आधार पर जून 2026 में विभागों ने पदोन्नति प्रक्रिया शुरू हुईं। कई विभागों ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को दो वर्ष की परिवीक्षा पर सहायक ग्रेड तीन के पद पर पदोन्नत किया। इस बीच 22 जुलाई 2026 को उच्च शिक्षा विभाग ने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन द्वारा की गई पदोन्नति को लेकर मार्गदर्शन मांग लिया।
सामान्य प्रशासन विभाग ने 26 मार्च 2026 को स्पष्टीकरण दिया कि सीपीसीटी अनिवार्य है। इसके बाद कृषि और उद्योग विभाग ने जारी पदोन्नति आदेश निरस्त कर कर्मचारियों को फिर पुराने पदों पर कार्य करने के निर्देश दे दिए।
कर्मचारी संगठनों ने उठाया सीपीसीटी की शर्त पर सवाल
जबकि, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ और मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ का कहना था कि सीपीसीटी की अनिवार्यता सीधी भर्ती के लिए लागू की गई थी, जबकि इसे पदोन्नति का आधार बनाना उचित नहीं है। अनुकंपा नियुक्ति या चतुर्थ श्रेणी में नियुक्त कर्मचारी वर्षों बाद पदोन्नति के पात्र बनते हैं। ऐसे में सीपीसीटी की शर्त और प्रमाण-पत्र की सात वर्ष की वैधता उन्हें पदोन्नति से वंचित कर रही है।
अब न पदोन्नति रुकेगी, न कर्मचारी होंगे रिवर्ट
मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कर्मचारियों के हित को ध्यान में रखते हुए बुधवार को निर्देश दिए कि तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की पदोन्नति में सीपीसीटी परीक्षा बाधा नहीं बने।
पदोन्नति में सीपीसीटी परीक्षा को उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता पर जल्द सकारात्मक दृष्टिकोण से निर्णय लिया जाए ताकि सभी पात्र कर्मचारियों को लाभ मिले। कोई भी कर्मचारी सीपीसीटी परीक्षा के कारण पदोन्नति से वंचित या रिवर्ट नहीं हो। अब सामान्य प्रशासन विभाग इसे लेकर दिशानिर्देश जारी करेगा।
छह-सात हजार कर्मचारी होंगे लाभान्वित
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रांतीय महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने मुख्यमंत्री के इस निर्णय को कर्मचारी हितैषी बड़ा कदम बताया। उन्होंने दावा किया कि इस निर्णय से छह से सात हजार कर्मचारी लाभान्वित होंगे। साथ ही जिन कर्मचारियों की पदोन्नतियां निरस्त की गईं थीं, उस आदेश को वापस ले लिया जाएगा।
