ग्‍वालियर, जेएनएन। हिंदू धर्म में महिलाएं संतान प्राप्ति और उनकी लंबी आयु के लिए अहोई अष्टमी व्रत रखती हैं। ये व्रत पंचांग के अनुसार प्रतिवर्ष करवा चौथ से चार दिन बाद यानि अनुसारकार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष ये व्रत (Ahoi Ashtami On 28th October) 28 अक्टूबर (वीरवार) को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत का पालन करते हुए अहोई माता, भगवान शिव व माता पार्वती की विधि विधान से पूजा अर्चना करती हैं। रात को तारों को अर्घ्य दे महिलाएं व्रत का पारण करती हैं। खास बात ये है कि इस साल 28 अक्टूबर को गुरु पुष्य अमृत योग बन रहा है।

क्‍यों खास है गुरु पुष्य अमृत योग

इस बार कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की 28 अक्टूबर को गुरु पुष्य अमृत योग बन रहा है। जिससे इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 27 नक्षत्र हैं और उनमें पुष्य नक्षत्र का अपना खास महत्व है। जब यह नक्षत्र गुरुवार के दिन होता है तो इसे गुरुपुष्य योग कहा जाता है। इस नक्षत्र के स्‍वामी गुरु बृहस्पति देव हैं। इस योग को बेहद दुर्लभ और श्रेष्ठतम योगों में से एक माना गया है। कार्तिक मास के कृष्णपक्ष ये योग 28 अक्‍टूबर से प्रात : 9 बजकर 41 मिनट पर शुरू होकर 29 अक्‍टूबर सुबह 6 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। पंचांग के अनुसार ये वीरवार और पुष्य नक्षत्र में बनने वाला ये योग अपने साथ कई शुभ संयोग भी ला रहा है।

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा के अनुसार इस दिन महिलाएं अहोई अष्‍टमी व्रत रखेंगी, विधि विधान से पूजा कर शाम को तारों को अर्घ्‍य देंगी। इस दिन चंद्रमा कर्क राशि और गुरु, शनि देव के साथ मकर राशि में होंगे।ऐसी मान्‍यता है कि इस दिन खरीदी गई नई वस्तु, जमीन-मकान, वाहन, स्वर्ण आभूषण आदि से शुभ फल प्राप्‍त होता है। इस खास योग में नया व्‍यापार शुरू करना भी बेहद लाभकारी रहता है। मां लक्ष्‍मी की विशेष कृपा मिलती है और सभी कार्य आसानी से संपन्‍न हो जाते हैं।

अहोई अष्टमी व्रत कथा (Ahoi Ashtami Vrat Katha)

एक नगर में एक साहूकार अपने सात बेटों के साथ रहता था। दीवाली का समय करीब था ऐसे में साहूकार की पत्नी अपना घर लीपने के लिए अष्टमी तिथि को मिट्टी लेने गई। उसने जैसे ही मिट्टी खोदने के लिए कुदाल चलाई अनजाने में वह कुदाल साही के मांद पर लग गई। कुदाल लगने से साही का एक बच्चा मर गया। जिसके बाद साहूकार की पत्नी को बड़ा पछतावा हुआ। इस घटना के बाद एक-एक करके साहूकार के सातों लड़के मर गए। बच्‍चों के मर जाने के बाद साहूकार और उसकी पत्नी शोक में रहने लगे। एक दिन बातों-बातों में साहूकार की पत्नी ने अपनी सारी व्‍यया पड़ोस में रहने वाली एक औरत को बतायी।

पड़ोसन ने साहूकार की पत्‍नी को अहोई अष्‍टमी का व्रत रखने की सलाह दी और कहा कि साही और उसके बच्‍चों का चित्र बनाकर तुम मां भगवती की पूजा करो और अनजाने में हुए इस अपराध के लिए क्षमा मांगो। इससे तुम्‍हारे सारे दुख दूर हो जाएंगे। साहूकार की पत्‍नी ने ऐसा ही किया और हर साल कार्तिक मास की अष्टमी को मां अहोई की पूजा और व्रत करने लगी। माता की कृपा से साहूकर की पत्‍नी गर्भवती हुई और हर साल इस व्रत को रखने लगी जिसके बाद उसे सात बेटे हुए। तब से ही महिलाएं अहोई अष्‍टमी का व्रत रखती आ रही हैं।

Edited By: Babita Kashyap