भोपाल [धनंजय प्रताप सिंह]। Madhya Pradesh: उज्जैन में नवनिर्मित श्रीमहाकाल लोक के लोकार्पण के लिए 11 अक्टूबर को होने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे का असर मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन पर दिखाई पड़ने लगा है। तैयारियों के बीच पार्टी के दिग्गजों में एकजुटता की अलग ही तस्वीर सामने आ रही है।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बड़े नेताओं से मेल-जोल लगातार बढ़ रहा है तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती शराबबंदी अभियान के बहाने एक साथ मंच पर दिख रहे हैं। दरअसल, बीते दिनों प्रदेश में हुए निकाय चुनाव में महापौर की 16 सीटों में से भाजपा को सात पर हार का सामना करना पड़ा। अब नौ महापौर ही भाजपा के हैं। भाजपा को बड़ा नुकसान ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में हुआ।

जबलपुर में भी भाजपा को जीत नहीं मिल सकी, जबकि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से सत्ता और संगठन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व है। सिंधिया और तोमर ग्वालियर चंबल क्षेत्र के ही प्रभावशाली नेता हैं और दोनों के बीच मतभेद तब से रहे हैं जब ज्योतिरादित्य कांग्रेस में हुआ करते थे। निकाय चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भी इस वर्ष की शुरुआत में मतभेद की खबरें सामने आई थीं।

...तो सिंधिया ने बढ़ाया दोस्ती का कदम:

निकाय चुनाव में हार के बाद पुरानी अदावत पीछे छोड़ बदली सियासी तस्वीर में ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर अब एक साथ देखे जा रहे हैं। बीते दिनों विमान से तोमर और सिंधिया जब एक साथ भोपाल पहुंचे तो दोनों के समर्थक स्वागत के लिए विमानतल पर उत्साहित थे, लेकिन सिंधिया ने अपने समर्थकों से भी खुद के बजाय तोमर का स्वागत करवाया।

दोनों दिग्गज एक ही वाहन से रातापानी की बैठक में भी पहुंचे। इससे पहले दोनों को परस्पर विरोधी ध्रुव माना जाता था। ऐसा लगता है जैसे दोस्ती का कदम सिंधिया ने आगे बढाया है। उन्होंने दिल्ली से भोपाल आने वाले विमान में नरेंद्र तोमर के साथ बैठने वाली फोटो इंटरनेट मीडिया पर भी जारी की।

सीएम के घर भी गए सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया हालिया दौरे में सीएम शिवराज सिंह चौहान के निवास पर भी गए और उनके साथ मिलकर नारियल का एक पौधा भी लगाया। बाद में दोनों नेताओं ने अपने ट्विटर अकाउंट से यह तस्वीर भी साझा की। इससे कुछ ही पहले प्रदेश सरकार में सिंधिया खेमे के दो मंत्रियों ने राज्य की ब्यूरोक्रेसी पर सवाल उठाए थे।

जिन्हें अप्रत्यक्ष रूप से सरकार पर प्रश्न माना जा रहा था। यह दोनों मंत्री वर्ष 2020 में सिंधिया के साथ कांग्रेस से भाजपा में आए थे। इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया कई अवसरों पर कैलाश विजवर्गीय को भी भरपूर सम्मान देते देखे गए हैं। वह अपने पुत्र के साथ विजयवर्गीय के घर भी जा चुके हैं।

शराबबंदी के बहाने

सीएम शिवराज सिंह चौहान व पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी दो अक्टूबर को नशा मुक्ति अभियान के बहाने एक साथ मंच पर दिखे और एक-दूसरे की जमकर तारीफ की। गौरतलब है कि उमा भारती प्रदेश में शराबबंदी की मांग को लेकर लगातार शिवराज सरकार पर हमलावर रही हैं। उन्होंने संगठन में केंद्रीय स्तर पर भी इस संबंध में अपनी बात रखी थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के उज्जैन दौरे से पहले उनके सुर बदल गए हैं और वह शराबबंदी के लिए चौहान के साथ आ गई हैं।

निकाय चुनाव में प्रदेश की नब्ज टटोल कर भाजपा को महसूस हो चुका है कि एकजुटता के बिना मिशन 2023 में अपेक्षित सफलता मुश्किल है। ऐसे में जब मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित संगठन के राष्ट्रीय स्तर के दिग्गजों का दौरा बढ़ रहा है, तो एकजुटता के बिना काम चलने वाला नहीं है।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari

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