भोपाल, जेएनएन । भोपाल के कोलार के सर्वधर्म कालोनी निवासी अमित शर्मा ने मेसर्स राय गैस एजेंसी, इंडियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया कंपनी लिमिटेड के खिलाफ 2009 में राज्य उपभोक्ता आयोग में याचिका लगाई और क्षतिपूर्ति राशि की मांग की थी। दरअसल 12 साल पहले इस शख्‍स के घर में खाना बनाते समय रसोई गैस सिलिंडर से गैस रिसने व सिलिंडर फटने के कारण आग लग गई थी। इस घटना में उपभोक्ता की पत्नी गंभीर रूप से जल गई थी। एक माह तक दिल्ली के अस्पताल में इलाज चला, लेकिन उसकी मौत हो गई।

मालूम हो कि घटना में उपभोक्ता की मां, बहन और बेटी भी घायल हो गई थीं। घटना में घरेलू सामान भी जलकर नष्ट हो गया था। घटना की सूचना पुलिस और फायर ब्रिगेड को भी दी गई। उपभोक्ता ने इसकी शिकायत राज्य उपभोक्ता आयोग में की थी। आयोग के अध्यक्ष शांतनु एस केमकर, सदस्य एसएस बंसल की बेंच ने फैसला सुनाया। आयोग ने गैस एजेंसी को कुल 12 लाख 60 हजार रुपये क्षतिपूर्ति राशि देने के आदेश दिए। आयोग ने गैस एजेंसी को जिम्मेदार ठहराते हुए फटकार भी लगाई, इस मामले में आयोग ने मृतक के वारिसों को 10 लाख रुपये, आवेदक के उपचार में खर्च हुए 60 हजार रुपये और सामान के लिए दो लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि देने के आदेश दिए।

जानकारी हो कि कोलार के सर्वधर्म कालोनी निवासी अमित शर्मा ने मेसर्स राय गैस एजेंसी, इंडियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया कंपनी लिमिटेड के खिलाफ 2009 में राज्य उपभोक्ता आयोग में याचिका लगाई और क्षतिपूर्ति राशि की मांग की थी। गैस एजेंसी ने क्षतिपूर्ति राशि देने से इन्कार कर दिया। आवेदक ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की। इसके बाद उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। गैस एजेंसी को 12.60 लाख क्षतिपूर्ति राशि दो माह के अंदर छह प्रतिशत ब्याज के साथ देने के आदेश दिए हैं।

बता दें कि उपभोक्ता अमित शर्मा की पत्नी सुमन शर्मा 16 फरवरी 2009 को रसाई में खाना बना रही थीं। तभी रसोई गैस सिलिंडर में तेजी से रिसाव होने के कारण वह फट गया और आग लग गई। जिसमें उपभोक्ता की पत्नी गंभीर रूप से जल गई। उसे भोपाल के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां से उसे सफदरगंज अस्पताल में रेफर किया गया। जहां इलाज के दौरान 5 मार्च 2009 को उनकी मौत हो गई। उसके इलाज में साढ़े तीन लाख रुपये भी खर्च हो गए।

वहीं, परिवार के कई सदस्य घायल हो गए और घरेलू समान भी जलकर राख हो गया। गैस एजेंसी ने तर्क रखा कि उपभोक्ता की लापरवाही के कारण आग लगी है, लेकिन इस संबंध में गैस एजेंसी कोई ठोस सबूत नहीं दे पाई, जबकि उपभोक्ता ने पुलिस द्वारा दायर की गई विवेचना रिपोर्ट और फोटोग्राफ्स भी जमा किए। गैस एजेंसी ने तर्क रखा कि सिलिंडर में हरे रंग की रबर पाइप का उपयोग किया गया था। इस कारण रबर पाइप के ज्वाइंट से गैस लीकेज होने से घटना घटित हुई। सभी तर्क को आयोग ने खारिज कर दिया और गैस एजेंसी को दोषी ठहराया।

उपभोक्ता यहां करें शिकायत

- अगर किसी भी वस्तु को खरीदने में ठगे जाते हैं तो जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत करें।

- दो साल के अंदर आप प्रकरण की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

- पांच लाख रुपये तक की कीमत के लिए आवेदन निश्शुल्क है। कोई न्यायालय शुल्क नहीं लगेगा।

- जिला उपभोक्ता आयोग में एक करोड़ रुपये तक और राज्य उपभोक्ता आयोग में 10 करोड़ रुपये तक के मामले की सुनवाई होगी। 

Edited By: Priti Jha