इंदौर में अब भी हाल बेहाल : निगम अफसरों के सामने नर्मदा पाइप लाइन ने उगला गंदा, बदबूदार पानी, 500 मीटर पहुंचते ही TDS 773
इंदौर में भागीरथपुरा त्रासदी के बाद नर्मदा पेयजल की शुद्धता पर गंभीर सवाल उठे हैं। मालवीय नगर, चंद्रभागा और जबरन ...और पढ़ें

HighLights
जबरन कॉलोनी में निगम अधिकारियों के सामने निकला दूषित पानी।
मालवीय नगर, चंद्रभागा में भी नर्मदा जल की गुणवत्ता खराब।
विशेषज्ञों ने लीकेज को दूषित पानी का मुख्य कारण बताया।
डिजिटल डेस्क, इंदौर। भागीरथपुरा दूषित जल त्रासदी के बाद अब इंदौर की कई अन्य कॉलोनियों में भी नर्मदा पेयजल की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के रहवासी दूषित और जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन नईदुनिया ने मंगलवार को विशेषज्ञों की मौजूदगी में शहर की कई कॉलोनियों में नर्मदा जल की गुणवत्ता की जांच की। जांच में टीडीएस मीटर और क्लोरोस्कोप के जरिए पानी की कठोरता और क्लोरीन की मात्रा मापी गई, जिससे पानी की बैक्टीरिया नाशक क्षमता का पता चल सके।
जांच के दौरान मालवीय नगर, चंद्रभागा और जबरन कॉलोनी में नर्मदा पेयजल सप्लाई के दौरान ही दूषित पानी सामने आया, जबकि पलसीकर कॉलोनी में वितरित जल अपेक्षाकृत बेहतर गुणवत्ता का पाया गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि जबरन कॉलोनी में नगर निगम के अधिकारियों की मौजूदगी में ही नर्मदा पेयजल लाइन से सीवरेज मिला काला, बदबूदार पानी बाहर आया।
शुरुआत में गंदा, बाद में साफ - यही बन गया नियम
सिर्फ ये तीन इलाके ही नहीं, बल्कि शहर के अधिकांश नर्मदा जल उपभोक्ताओं की शिकायत है कि सप्लाई शुरू होते ही नलों से 2 से 15 मिनट तक गंदा और बदबूदार पानी आता है। इसके बाद लोग उसे सड़कों पर बहा देते हैं और पानी साफ दिखने पर पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार केवल रंग के आधार पर पानी को सुरक्षित मानना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। यह स्थिति शहर की पाइपलाइनों में बड़े पैमाने पर लीकेज की ओर इशारा करती है।
इन विशेषज्ञों ने की पानी की जांच
- सुधींद्र मोहन शर्मा, पूर्व नेशनल नोडल अधिकारी (पेयजल सुरक्षा), भारत सरकार
- दिलीप वाघेला, पूर्व वैज्ञानिक, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- डॉ. सुनील व्यास, पूर्व वैज्ञानिक, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
टंकी से 500 मीटर में ही दूषित हुआ पानी
मालवीय नगर–कृष्णबाग कॉलोनी | समय: सुबह 7:50 | वार्ड 30, जोन 8
मालवीय नगर में सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्य के दौरान पुरानी नर्मदा और ड्रेनेज लाइनों के चेम्बर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बर्फानी धाम स्थित टंकी में सप्लाई से पहले नर्मदा जल का टीडीएस 137 मिग्रा/लीटर पाया गया, लेकिन टंकी से सिर्फ 500 मीटर दूर पहुंचते ही पानी दूषित हो गया।
घरों में शुरुआत में काले रंग का पानी आया। क्लोरीन 0.5 मिग्रा/लीटर और टीडीएस 429 मिग्रा/लीटर दर्ज किया गया। वहीं सार्वजनिक बोरिंग के पानी का टीडीएस 733 मिग्रा/लीटर पाया गया, जिसे लोग पीने में उपयोग कर रहे थे।
सीवरेज चेम्बर से गुजर रही नर्मदा लाइन
चंद्रभागा हनुमान मंदिर, महल कचहरी | वार्ड 62, जोन 12 | सुबह 8 बजे
ऊंचाई पर स्थित चंद्रभागा क्षेत्र में पंपिंग के जरिए पानी सप्लाई होता है। यहां सीवरेज चेम्बर के अंदर से नर्मदा लाइन गुजर रही है और पास में ही बोरिंग भी है। सीवरेज चेम्बर लीक होने से बोरिंग का पानी भी दूषित और बदबूदार हो गया है।
नर्मदा जल का टीडीएस 151 मिग्रा/लीटर और क्लोरीन मात्र 0.2 मिग्रा/लीटर पाया गया, जो बैक्टीरिया नियंत्रण के लिए अपर्याप्त है।

15 मिनट तक नलों से निकला काला, बदबूदार पानी
जबरन कॉलोनी | वार्ड 61, जोन 12 | सुबह 11:30 बजे
पागनीसपागा टंकी से सीधे सप्लाई वाली इस बस्ती में नलों से शुरुआत में काला और बदबूदार पानी आया। लोगों ने घरों के बाहर बने गड्ढों में गंदा पानी बहाया और बाद में साफ पानी भरकर उपयोग किया।
मौके पर मौजूद निगम के जोन-12 के सहायक यंत्री देवकीनंदन वर्मा और उनकी टीम के सामने ही नलों से दूषित पानी निकला, जिसका टीडीएस 515 मिग्रा/लीटर था। करीब 15 मिनट बाद पानी साफ हुआ, लेकिन ड्रेनेज चेम्बर भरे हुए पाए गए।
यह बोले रहवासी
मंगलवार सुबह जब नर्मदा पाइप लाइन में पानी आया तो शुरुआत में पानी बहाया और उसके पानी उपयोग के लिया। बोरिंग के पानी में बदबू आ रही हम उपयोग नहीं करते है।
-हेमलता, रश्मि कटारिया, जितेंद्र चौहान, रहवासी महल कचहरीशुरुआत में गंदा पानी आता है उसे बहा देते है। नल में साफ पानी आने पर उपयोग के लिए भरते है और पीते है। पानी में फिटकरी व क्लोरीन भी डालते है। 311 पर शिकायत की लेकिन समस्यां हल नहीं हुई।
-रेशम बाई, पप्पू चौहान, रहवासी मालवीय नगर
जिम्मेदार का यह कहना
ड्रेनेज चेम्बर की सफाई करवाएंगे। नई पाइप लाइन डालने के प्रस्ताव दिए है। इन्हें बदला जाएगा। इसके बाद यहां की समस्यां हो होगी।
- देवकीनंदन वर्मा, सहायक यंत्री, जोन 12
विशेषज्ञ बोले, इस वजह से आता है दूषित पानी
जब नल खाली रहते है उसमें सीवरेज का पानी लीक होने पर भर जाता है। यही वजह है कि जब नल चालू होते तो शुरुआत में गंदा पानी आता है। पहले जो नलों में वैक्यूम के कारण हवा रहती और गंदा पानी नहीं भर पाता था। अब नर्मदा व ड्रेनेज लाइन में लीकेज होने से गंदा पानी नर्मदा पेयजल में पहुंचता है।
विशेषज्ञों के सुझाव
- नर्मदा व ड्रेनेज लाइन को अलग-अलग किया जाए । वो एक दूसरे क्रॉस नहीं करे। ड्रेनेज लाइन के पास से नर्मदा लाइन जाने से रोके।
- नियमित नर्मदा जल वितरण की जांच हो। सैम्पल लिए जाए।
- ड्रेनेज चेम्बर न भरे व और ड्रेनेज व नर्मदा पाइप लाइन में लीकेज न हो सुनिश्चित करें।
