'राउंडअप' के नाम पर यात्रियों की जेब पर डाका! प्रति टिकट एक से चार रुपये अतिरिक्त वसूल रहा रेलवे का सिस्टम; 5 साल में वसूले 458.14 करोड़
भारतीय रेलवे में टिकट के मूल्य निर्धारण का 'राउंडअप' फॉर्मूला यात्रियों पर भारी पड़ रहा है, जिससे प्रति टिकट एक ...और पढ़ें

ऑनलाइन रेलवे टिकट बुक करने में लग रही चपत।
HighLights
रेलवे 'राउंडअप' फॉर्मूले से प्रति टिकट एक से चार रुपये अतिरिक्त वसूल रहा।
पिछले पांच वर्षों में यात्रियों से 458.14 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूले गए।
अधिकांश यात्रियों को इस अतिरिक्त शुल्क के बारे में जानकारी नहीं है।
अंजली तोमर, भोपाल। भारतीय रेलवे में टिकट का मूल्य तय करने का राउंडअप फॉर्मूला यात्रियों की जेब पर भारी पड़ रहा है। इससे प्रत्येक टिकट पर एक से चार रुपये तक अतिरिक्त वसूली की जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसकी जानकारी अधिकांश यात्रियों को नहीं है। वर्तमान में आईआरसीटीसी के पोर्टल के माध्यम से प्रतिदिन 17 लाख से अधिक ऑनलाइन टिकट बुक हो रहे हैं।
प्रत्येक टिकट पर औसत दो रुपये ही वसूली मानी जाए तो एक दिन में रेलवे के पास 34 से 35 लाख रुपये की बड़ी रकम जमा होती है। वर्ष भर में यह रकम 124 से 127 करोड़ हो जाती है। आईआरसीटीसी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में विक्रय कुल 229.07 करोड़ ऑनलाइन टिकट से यात्रियों से लगभग 458.14 करोड़ रुपया अतिरिक्त लिया गया।
कुल किराया राशि में अंतर
दरअसल, ऑनलाइन बुक किए गए टिकट के किराए के विवरण में बेस फेयर, रिजर्वेशन चार्जेस, सुपरफास्ट चार्जेस, डायनेमिक चार्जेस, जीएसटी, कैटरिंग चार्जेस जैसे मद दिखते हैं। सबसे अंत में कुल देयक में वह रकम दिखती है, जिसका यात्री ने वास्तव में भुगतान किया। लेकिन इन सभी मदों का योग कुल देयक धनराशि से मेल नहीं खाता।

उदाहरण के लिए, दिल्ली से भोपाल तक के एक टिकट में बेस फेयर 892, उस पर 40 रुपये का रिजर्वेशन चार्ज, 45 रुपये का सुपरफास्ट चार्ज, 357 रुपये का डायनेमिक चार्ज, 67 रुपये जीएसटी और 310 रुपये कैटरिंग चार्ज का ब्यौरा दर्ज है। इनको जोड़ने पर कुल देयक धनराशि होती है- एक हजार 711 रुपये। लेकिन टिकट पर कुल देयक धनराशि लिखी है- एक हजार 715 रुपये। यात्री को इसी का भुगतान करना होता है, यानी उसको चार रुपये अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं, जिसका कोई ब्यौरा नहीं है।
भोपाल के सेवानिवृत्त अभियंता अरुण शुक्ला ने रेलवे बोर्ड को इसकी शिकायत भेजी है। उनका कहना है कि ऑनलाइन भुगतान में तो खुदरा पैसे की समस्या नहीं होती। ऐसे में 1711 रुपये के किराए पर 1715 रुपये भुगतान लेने की व्यवस्था समझ से परे है।

पांच के गुणक का यह है खेल
दरअसल, रेलवे में नियम है कि द्वितीय श्रेणी साधारण (उपनगरीय) किराए को छोड़कर सभी श्रेणियों के किराए में विविध शुल्क जोड़ने के बाद प्राप्त राशि को अगले उच्चतम पांच रुपये के गुणक में पूर्णांकित (राउंडअप) किया जाएगा। यानी यदि सभी शुल्कों का जोड़ 102 रुपये आता है तो लिया जाएगा 105 रुपये। पहले गुणक से एक रुपया ऊपर होने पर नीचे वाली पूर्णांकित संख्या ली जाती थी। यानी 101 रुपया होने पर 100 रुपया लिया जाता था, लेकिन कोरोना काल के बाद दूसरा वाला नियम लगभग खत्म ही कर दिया गया है। पहला नियम ही चल रहा है।
प्रतिस्पर्धा आयोग में भी उठ चुका मामला
यह मामला प्रतिस्पर्धा आयोग के सामने भी उठ चुका है, तब रेलवे का तर्क था कि काउंटर पर खुदरा की समस्या दूर करने के लिए राउंडअप नियम लाया गया था। ऑनलाइन और काउंटर दोनों माध्यमों में एक ही किराया नीति लागू करने के लिए ऑनलाइन में भी यही नीति लागू है। एक और तर्क था कि यात्री किराया कई श्रेणियों में सेवा की वास्तविक लागत से कम रखा जाता है, इसलिए किराया निर्धारण में सामाजिक दायित्व और राजस्व की जरूरत दोनों को ध्यान में रखा गया है।
पिछले पांच वर्षों में टिकटों का ब्यौरा
वर्ष - कुल आरक्षित टिकट – ऑनलाइन टिकट - ऑनलाइन टिकट की हिस्सेदारी
2025-26 - 54.40 - 48.25 – 88.7 प्रतिशत
2024-25 – 58.64 - 50.65 – 86.38 प्रतिशत
2023 –24 – 54.79 – 45.30 – 82.68 प्रतिशत
2022-23 – 53.25 – 43.13 – 81 प्रतिशत
2021-22 – 51.90 – 41.74 – 80 प्रतिशत
(स्रोत: रेलवे, आईआरसीटीसी का ब्यौरा। केवल 2025-26 के आंकड़े अप्रैल 25 से फरवरी 26 तक के हैं। आंकड़े करोड़ में।)
किराये से जुड़े नियम और नीतिगत निर्णय रेलवे बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में हैं और आईआरसीटीसी उन्हीं नियमों के अनुसार टिकट बुक करता है।
- एके सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, आईआरसीटीसीआईआरसीटीसी पर लिए जाने वाले सभी शुल्क रेलवे के निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं। ऑनलाइन टिकट बुकिंग में लागू शुल्क तय प्रावधानों के अनुसार ही वसूले जाते हैं और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है।
- डा. मधुर वर्मा, सीपीआरओ, पमरे जबलपुर
