बढ़ते तापमान में भी बेहतर होगी फसलों की पैदावार, आइसर भोपाल के वैज्ञानिकों ने किया नया शोध
आइसर भोपाल के वैज्ञानिकों ने बीबीएक्स 28 प्रोटीन की पहचान की है, जो पौधों को बढ़ते तापमान में तने की लंबाई बढ़ाकर अनुकूलन में मदद करता है।

आइसर भोपाल का नया शोध
HighLights
आइसर भोपाल ने बीबीएक्स 28 प्रोटीन की भूमिका खोजी।
यह प्रोटीन पौधों को उच्च तापमान में अनुकूलन में मदद करता है।
भविष्य में जलवायु-अनुकूल फसलें विकसित करने में सहायक होगा।
अंजली राय, भोपाल। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के बीच फसलों की पैदावार बनाए रखना कृषि के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइसर), भोपाल के विज्ञानियों का नया शोध उम्मीद जगाता है। बायोलाजिकल साइंसेस विभाग में विज्ञानी सौरव दत्ता की टीम ने पौधों में बीबीएक्स 28 प्रोटीन की भूमिका का पता लगाया है, जो अधिक तापमान में तने की लंबाई बढ़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है।
यह प्रोटीन वृद्धि नियंत्रित करने वाले दो अन्य प्रोटीनों के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है। अमेरिकी जर्नल साइंस एडवांसेस में प्रकाशित इस शोध के आधार पर यह समझने में मदद मिल सकती है कि बढ़ते तापमान के प्रति पौधे किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं।
इस खोज के जरिये भविष्य में ऐसी जलवायु अनुकूल फसलें विकसित करने की संभावनाओं की पड़ताल हो सकेगी, जो तापमान में उतार-चढ़ाव के बावजूद बेहतर वृद्धि और उत्पादकता बनाए रख सकें। इस शोध में शोधार्थी शुभी द्विवेदी सहित तीन अन्य शोधार्थी शामिल थे।

जलवायु परिवर्तन के कारण धरती का तापमान बढ़ रहा है। इसका असर केवल मनुष्यों और जानवरों पर ही नहीं, पौधों की वृद्धि पर भी पड़ रहा है। ऐसे में पौधे बढ़ते तापमान के प्रति किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं,यह समझना भविष्य की कृषि के लिए महत्वपूर्ण है। इसी कड़ी में आइसर के जैविक विज्ञान विभाग के विज्ञानियों ने करीब चार वर्ष तक अध्ययन कर पौधों में तापमान के प्रति प्रतिक्रिया से जुड़ी प्रक्रिया को समझने का प्रयास किया।
शोध में पाया गया कि सामान्य से अधिक तापमान होने पर पौधे अपनी संरचना में बदलाव करते हैं। इनमें तने के निचले हिस्से का लंबा होना भी शामिल है। इससे पौधे का ऊपरी हिस्सा गर्म मिट्टी की सतह से ऊपर हो जाता है। हालांकि, यह प्रतिक्रिया हर परिस्थिति में पौधे को गर्मी से होने वाले नुकसान से बचाने की गारंटी नहीं देती।
शोधकर्ताओं ने पाया कि बीबीएक्स 28 प्रोटीन, पीआइएफ 4 और एचवाय 5 नामक दो नियामक प्रोटीनों की गतिविधियों के बीच संतुलन को प्रभावित करता है। पीआइएफ 4 पौधों की वृद्धि से जुड़े कुछ जीनों को सक्रिय करने में मदद करता है, जबकि एचवाय 5 उनकी गतिविधि को सीमित करने में भूमिका निभाता है। बीबीएक्स 28 इन दोनों के प्रभाव को बदलकर तने की लंबाई बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
माडल पौधे पर किए गए प्रयोग
विज्ञानियों ने प्रयोगों में अराबिडोप्सिस थालियाना नामक माडल पौधे का उपयोग किया। अध्ययन में 28 डिग्री सेल्सियस तापमान पर बीबीएक्स 28 जीन की अभिव्यक्ति बढ़ती पाई गई। इस प्रोटीन की कमी वाले पौधों में तापमान बढ़ने पर तने के निचले हिस्से की लंबाई बढ़ने की प्रतिक्रिया कमजोर रही, जबकि इसकी अधिक अभिव्यक्ति वाले पौधों में यह प्रतिक्रिया ज्यादा दिखाई दी।
फसल सुधार के लिए आगे के अध्ययन जरूरी
यह शोध पौधों में तापमान के प्रति अनुकूलन की आणविक प्रक्रिया को समझने में मदद करता है। भविष्य में इस जानकारी के आधार पर ऐसी फसल किस्मों के विकास की दिशा में काम किया जा सकता है, जो बदलती तापमान परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। हालांकि, अभी यह साबित नहीं हुआ है कि बीबीएक्स 28 के आधार पर गेहूं, धान या अन्य कृषि फसलों की गर्मी सहने की क्षमता अथवा उपज बढ़ाई जा सकती है। इसके लिए प्रमुख फसलों में आगे प्रयोग और परीक्षण करने होंगे।
शोध का फायदा
इस शोध से हमें यह पता चल गया है कि बीबीएक्स 28 पौधों के तने की लंबाई बढ़ाकर उन्हें गर्मी से बचाने में मदद करते हैं। ऐसे में बाकी पौधों के जीन में बदलाव कर इस प्रोटीन की मात्रा को बढ़ाकर उन्हें जलवायु के हिसाब से तैयार किया जा सकता है। बाद में फिर यह गुण बीज में आ जाएंगे और यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहेगी।
इस शोध में पौधे में मौजूद बीबीएक्स 28 प्रोटीन की पहचान की गई है। इसके कारण तापमान वृद्धि होने पर पौधे अपनी लंबाई को बढ़ा लेते हैं। यह शोध भविष्य में जलवायु-अनुकूल फसलें विकसित करने में उपयोगी हो सकता है।
- सौरव दत्ता,विज्ञानी,बायोलाजिकल साइंसेस विभाग,आइसर
