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‘पहले वादा पूरा कराइए’... अतिथि विद्वानों ने भोपाल में रोका शिवराज का काफिला, मंत्री के बंगले के बाहर धरने पर डटे

Published: Wed, 16 Sep 2026 10:32 PM (IST)

मध्य प्रदेश में अतिथि विद्वानों ने नियमितीकरण और नौकरी के स्थायित्व की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। ...और पढ़ें

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के सामने अतिथि विद्वानों का प्रदर्शन। (फोटो- जागरण)

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के सामने अतिथि विद्वानों का प्रदर्शन। (फोटो- जागरण)

HighLights

  1. अतिथि विद्वानों ने भोपाल में शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोका।

  2. नियमितीकरण और नौकरी स्थायित्व की मांग को लेकर आंदोलन तेज।

  3. उच्च शिक्षा मंत्री आवास के बाहर धरना, फॉलन आउट रोकने की मांग।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में नियमितीकरण और नौकरी के स्थायित्व की मांग को लेकर अतिथि विद्वानों का आंदोलन बुधवार को और तेज हो गया। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के भोपाल स्थित आवास के बाहर धरना दे रहे करीब 200 अतिथि विद्वानों ने वहां से गुजर रहे केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोक लिया। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें 11 सितंबर 2023 की महापंचायत में किए गए आश्वासनों की याद दिलाई।

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, शिवराज सिंह चौहान ने उनकी बात सुनने के बाद कहा कि “एक मुख्यमंत्री की घोषणा दूसरे मुख्यमंत्री को पूरी करनी चाहिए।” उन्होंने अतिथि विद्वानों की मांगें सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिया।

मंत्री से मुलाकात हुई, लेकिन सहमति नहीं

इससे पहले बुधवार सुबह उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अतिथि विद्वानों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के अनुसार मंत्री ने नीति बनने तक फॉलन आउट प्रक्रिया तत्काल रोकने पर सहमति नहीं दी। इसके बाद मंत्री आवास के बाहर आंदोलन जारी रहा।

अतिथि विद्वानों की प्रमुख मांग है कि नियमितीकरण और नौकरी के स्थायित्व के लिए समयबद्ध नीति बनाई जाए और जब तक यह नीति लागू नहीं होती, तब तक प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में फॉलन आउट की प्रक्रिया रोक दी जाए।

2023 की महापंचायत के आश्वासन का दिया हवाला

आंदोलनकारी 11 सितंबर 2023 को भोपाल में हुई महापंचायत में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणाओं का हवाला दे रहे हैं। उस दौरान उन्होंने लगातार अध्यापन कर रहे अतिथि विद्वानों को बाहर नहीं किए जाने और फॉलन आउट की स्थिति से बचाने की बात कही थी। साथ ही फॉलन आउट अतिथि विद्वानों को रिक्त पदों पर फिर से अवसर देने समेत कई घोषणाएं की गई थीं।

अतिथि विद्वान 10 जुलाई 2026 को भोपाल के रवींद्र भवन में हुए सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की ओर से नीति बनाने के दिए गए भरोसे का भी उल्लेख कर रहे हैं। उनके अनुसार, उस समय हरियाणा मॉडल से बेहतर नीति बनाने की बात कही गई थी।

रक्षाबंधन पर भी मुख्यमंत्री से रखी थी मांग

आंदोलनकारियों के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के अवसर पर उज्जैन में मुख्यमंत्री आवास पर अतिथि विद्वान महिलाओं ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को रक्षा सूत्र बांधकर नीति बनने तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने का आग्रह किया था। इसके बाद भी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर अतिथि विद्वानों ने मंत्री आवास के बाहर धरना शुरू किया।

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अतिथि विद्वानों की दो प्रमुख मांगें

समयबद्ध नीति: नियमितीकरण और नौकरी के स्थायित्व के लिए निश्चित समयसीमा तय कर नीति लागू की जाए।
फॉलन आउट पर रोक: स्थायी नीति लागू होने तक सरकारी कॉलेजों में अतिथि विद्वानों को फॉलन आउट करने की प्रक्रिया रोकी जाए।

क्या है फॉलन आउट?

सरकारी कॉलेज में किसी नियमित सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति या स्थानांतरण के बाद उस पद पर पहले से कार्यरत अतिथि विद्वान की सेवाएं समाप्त हो जाती हैं। इसे आमतौर पर ‘फॉलन आउट’ कहा जाता है। मौजूदा आंदोलन में अतिथि विद्वान इसी प्रक्रिया को रोकने की मांग कर रहे हैं।