ग्वालियर, दीपक सविता। मध्य प्रदेश में बागियों के कारण चर्चित ग्वालियर-चंबल संभाग में बदलाव की बयार देखना सुखद है। जहां मामूली विवाद में बंदूकें निकल जाया करती थीं, वहां अब गांवों के छोटे-बड़े विवाद आपसी सुलह-समझौते से हल हो जा रहे हैं। सुलह का काम हवलदार और पटवारी मिलकर करा ले रहे हैं। ऐसे मामलों का भी निपटारा हो रहा है, जो वर्षों से न्यायालय में थे। नतीजा देखें कि अब 1204 गांव विवाद रहित घोषित कर दिए गए हैं। 2021 के मध्य में शुरू की गई इस पहल में अब तक 3,260 केस निराकृत हो चुके हैं। आम रास्ते पर कब्जा, खेत की मेड़ों को लेकर विवाद, मारपीट और कई ऐसे छोटे-छोटे मामले जो शुरू तो जरा सी बात से होते हैं, लेकिन अदालतों में सालों चलते हैं। इसमें न सिर्फ दोनों पक्षों का कीमती समय और पैसा बर्बाद होता है, मनमुटाव और रंजिश के कारण बड़े अपराध की आशंका बनी रहती है। इसके चलते ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर गांवों को विवादरहित बनाने के लिए दोनों संभागों में समझौता समाधान केंद्र स्थापित किए गए। प्रशासन, पुलिस और न्यायपालिका के सहयोग से गांव में ही हर मंगलवार को विवादों को पंजीबद्घ और मौके पर ही निराकरण किया गया।

इंटरनेट मीडिया के माध्यम से सुनवाई और निराकरण

मंगलवार को सुबह 10.30 से इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म गूगल मीट के माध्यम से संभागायुक्त, जिलों के कलेक्टर, एडीएम, एसडीएम, थाना प्रभारी, पुलिस अधीक्षक आदि जुड़ते हैं। इस दौरान 11 बजे से जनसुनवाई भी प्रारंभ हो जाती है, इसमें जिस गांव का प्रकरण कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचता है उसके निराकरण के लिए संबंधित पटवारी, तहसीलदार आदि को प्रकरण दे दिया जाता है। जो मामले न्यायालय एवं राजस्व विभाग में चल रहे होते हैं उनके लिए दोनों पक्षों को घर से बुलवाकर पटवारी एवं तहसीलदार काउंसलिंग करते हैं, इस दौरान थाने के हवलदार, दीवान व एएसआइ व एसआइ तक जरूरत के हिसाब से काउंसलिंग में पहुंचते हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद विवादों का निराकरण कर दिया जाता है। जमीन के मामलों में पटवारी द्वारा नपाई आदि कर निराकरण किया जाता है तो पुलिस के छोटे, मारपीट आदि के प्रकरणों में दोनों पक्षों को समझाकर राजीनामा कराया जाता है।

ग्वालियर चंबल संभाग में 50 हजार से ज्यादा प्रकरण लंबित

|ग्वालियर चंबल संभाग के संभागायुक्त आशीष सक्सेना के मुताबिक, ग्वालियर चंबल संभाग में 50 हजार से ज्यादा प्रकरण न्यायालय व राजस्व विभाग में लंबित हैं। इनके निराकरण के लिए समझौते से समाधान योजना शुरू की गई है। हमारी योजना है कि जो गांव पूरी तरह से विवाद रहित हुए हैं वहां के लोगों को सभी शासकीय योजनाओं का लाभ दिया जाए।

Edited By: Sachin Kumar Mishra