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भोजशाला के बाद अब धार की लाट मस्जिद पर नया विवाद, विजय मंदिर होने का दावा; 15 सितंबर को 'वराह मार्च' का एलान

Published: Sun, 13 Sep 2026 02:00 AM (IST)

धार की लाट मस्जिद को सनातन प्रहरी समिति द्वारा विजय मंदिर होने का दावा किया जा रहा है, जिसके समर्थन में 15 सितंबर को 'वराह मार्च' प्रस्तावित है।

धार की लाट मस्जिद के विजय मंदिर होने का दावा

धार की लाट मस्जिद के विजय मंदिर होने का दावा

HighLights

  1. लाट मस्जिद को विजय मंदिर बताने का दावा तेज।

  2. सनातन प्रहरी समिति ने 'वराह मार्च' प्रस्तावित किया।

  3. प्रशासन ने दोनों आयोजनों की अनुमति रद्द की।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर मानने के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के निर्णय के बाद अब धार जिले की लाट मस्जिद को लेकर विवाद तेज हैं। सनातन प्रहरी समिति का दावा है कि वर्तमान लाट मस्जिद का संबंध परमारकालीन मार्तंड प्रसाद यानी विजय मंदिर से है।

इसी दावे को आगे बढ़ाने के लिए 15 सितंबर का ‘वराह मार्च’ प्रस्तावित किया गया है। इसको लेकर प्रशासन की चिंता इसलिए और बढ़ गई है, क्योंकि इसी दिन मुस्लिम समाज की ओर से 11वीं शरीफ के अवसर पर वाहन रैली निकालने के लिए अनुमति मांगी गई थी।

प्रशासन दोनों आयोजनों की अनुमति निरस्त किए जाने की बात कह रहा है।दरअसल, सनातन प्रहरी समिति का दावा है कि लाट मस्जिद वास्तव में विजय मंदिर है और इसके साक्ष्य के रूप में यहां एक स्तंभ पर भगवान वराह की मूर्ति अंकित है। इस ऐतिहासिक प्रतिमा के दर्शन सनातनियों को सामूहिक रूप से कराने के लिए 15 सितंबर को दोपहर दो बजे तक वराह मार्च आयोजित किया गया है।

समिति के संयोजक अंशुल शर्मा और विक्रम रोंदले ने बताया कि मार्च के लिए प्रशासन को सूचना दे दी गई है, चूंकि मार्च शांतिपूर्वक और अनुशासित ढंग से निकाला जाएगा, इसलिए अनुमति की आवश्यकता नहीं समझी गई है।

वराह मार्च में शामिल लोग विजय मंदिर पहुंचकर भगवान वराह (भगवान विष्णु के तीसरे अवतार) के दर्शन करेंगे। इसके लिए 14 हजार लोगों ने पंजीयन करवाया है।

दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि प्रतिबंधात्मक आदेश लागू होने के कारण किसी भी रैली के लिए विधिवत अनुमति जरूरी है। अनुमति नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पुलिस प्रस्तावित वराह मार्च की प्रचार सामग्री भी हटा रही है। इस पर सनातन प्रहरी समिति के पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई।

नगर पुलिस अधीक्षक शशांक सिंह गुर्जर का कहना है कि प्रतिबंधात्मक आदेश लागू होने की स्थिति में किसी भी आयोजन के लिए विधिवत अनुमति लेना जरूरी है। केवल आयोजन की सूचना देना अनुमति नहीं माना जा सकता। बिना अनुमति रैली निकालने पर प्रतिबंधात्मक आदेश के उल्लंघन के तहत कार्रवाई की जाएगी।