नर्मदापुरम, जागरण आनलाइन डेस्‍क। पूर्णिमा से लेकर पितृमोक्ष अमावस्या तक सोलह श्राद्ध के तहत श्राद्ध पक्ष में तर्पण के आयोजन होते रहे जिसका समापन आज रविवार को पितरों की विदाई के साथ हो रहा है। आज घर-घर में पितरों को विदाई देने का कार्य हो रहा है। इससे पूर्व नर्मदा तट के सेठानी घाट, मंगलवारा घाट और विवेकानंद घाटों पर हजारों लोगों के द्वारा तर्पण किए गए।

श्राद्ध पक्ष के समापन पर सुबह से ही बड़ी संख्या में तर्पण करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। अपने दिवंगत पूर्वजों को जल अर्पण व तर्पण करने वालों की भीड़ लगी रही। यहां पर पंडितों द्वारा बताए जा रहे विधान के अनुसार तर्पण किया गया। कुशा नामक घास से तर्पण किया जा रहा है।

नर्मदा तट पर पं राजेंद्र शर्मा व उनके पुत्र विष्णु शर्मा द्वारा मंत्रोच्चार से तर्पण कराया गया। बारी-बारी से लोग कतार में तर्पण कार्य करते रहे। उनके द्वारा तर्पण स्थल पर पूजन सामग्री व कुशा भी उपलब्ध कराया गया। तर्पण कार्य सुबह 7 बजे से शुरू होकर दोपहर तक जारी रहा।

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पितृ ऋण से मिलती है मुक्ति- पांडेय

पंडित राजेंद्र पांडेय ने कहा कि श्राद्ध करने से घर में दुख की निवृत्ति होती है और सुख मिलता है। पितरों की पूजा करके मनुष्य आयु, पुत्र, यश, कीर्ति, स्वर्ग और धन-धान्य प्राप्त करता है। देवकार्य से भी पितृकार्य का विशेष महत्व है। देवताओं से पहले पितरों को प्रसन्न करना अधिक कल्याणकारी माना गया है।

श्रद्धा से बना श्राद्ध शब्‍द

श्राद्ध शब्द श्रद्धा से बना है, जो श्राद्ध का प्रथम अनिवार्य तत्व है। 16 दिन पितरों लिए तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में किए गए कार्यों से पूर्वजों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है और कर्ता को पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है। पितरों की श्रद्धापूर्वक विदाई की जानी चाहिए। इस पितृ मोक्ष अमावस्या पर अनेक विशेष योगों की युति होने से तर्पण करने वालों को कई गुना फल मिलता है।

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Edited By: Arijita Sen

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