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शिवपुरी की तोप से लेकर न्यूयॉर्क में भरहुत यक्षी मूर्ति तक... तस्करों के निशाने पर मध्य प्रदेश की विरासत

Published: Sat, 18 Jul 2026 10:31 AM (GMT+05:30)

शिवपुरी के नरवर किले से 3000 किलो की ऐतिहासिक तोप चोरी हो गई है, जिसकी जांच स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के एंगल से की जा रही है।

16वीं शताब्दी की ऐतिहासिक तोप चोरी

16वीं शताब्दी की ऐतिहासिक तोप चोरी

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के नरवर किले से चोरी हुई ऐतिहासिक तोप की जांच तेजी से चल रही है। 16वीं शताब्दी की इस तोप की चोरी की घटना पिछले दो दशकों में राज्य में गायब हुई बेशकीमती प्राचीन वस्तुओं की कड़ी में सबसे नई घटना है।

दरअसल, नरवर किले में रखी लगभग 3000 किलो वजन की ऐतिहासिक तोप चोरी हो गई। पुलिस का कहना है कि इतना वजन होने की वजह से इसे बिना वाहन के ले जाना मुमकिन नहीं है। बदमाशों ने इस तोप को चोरी करने के लिए क्रेन और वाहन का इस्तेमाल किया।

शिवपुरी करैरा के SDOP प्रशांत शर्मा ने बताया, किला दूर-दराज पहाड़ी इलाके में है। यहां न CCTV है और न निगरानी। हम तकनीकी मदद ले रहे हैं और पुराने मामलों से भी कनेक्शन जोड़ रहे हैं।

नरवर किले का पुराना कनेक्शन

यह पहली बारी नहीं है। 2007 में भी इसी किले से दो ऐतिहासिक तोपें चोरी हुई थीं। एक तो कुछ दिन बाद मिल गई थी, लेकिन दूसरी आज तक नहीं मिली। 2012 में यह मामला और उलझ गया। मुंबई पुलिस ने शिवपुरी के पूर्व शाही परिवार के एक सदस्य को अष्टधातु से बनी तोप के साथ पकड़ा था। वह इसे 1 करोड़ रुपये में बेचने की कोशिश कर रहा था।

लोगों को लगा कि यही नरवर वाली तोप है। लेकिन पकड़ी गई तोप सिर्फ 20.5 इंच लंबी थी, जबकि नरवर से गायब तोप लगभग 5 फीट की थी। सबूत न मिलने से मामला ठंडा पड़ गया। आरोपी ने कहा था कि यह उसके पूर्वजों की संपत्ति है।

न्यूयॉर्क तक पहुंची विरासत

मध्य प्रदेश से चोरी हुई प्राचीन धरोहरों का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है। 2006 में कटनी जिले से 2200 साल पुरानी भरहुत यक्षी की मूर्ति चोरी हुई थी। 2016 में यह मूर्ति अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मैनहट्टन में एक गोदाम में मिली। अमेरिकी न्याय विभाग, होमलैंड सिक्योरिटी और ICE ने प्राचीन वस्तुओं की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह के खिलाफ कार्रवाई के दौरान इसे पकड़ा था।

जांच में पता चला कि इस मूर्ति को अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 80 करोड़ रुपये में बेचने की पेशकश की गई थी। इसी ऑपरेशन में MP से चोरी हुई सालभंजिका मूर्ति और भगवान विष्णु के धड़ का हिस्सा भी बरामद हुआ। अमेरिकी एजेंसियों ने तस्वीरें भारत भेजीं। पुरातत्वविदों ने मूर्ति पर लिखे लेख का मिलान MP में दर्ज FIR से किया, तब जाकर पुष्टि हुई कि यह वही भरहुत यक्षी है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक चोरी की गई कलाकृतियां पहले कई बिचौलियों के हाथों बिकती हैं। उनके साथ नकली कागज लगाए जाते हैं। फिर ये विदेशों में गैलरी, गोदाम या निजी संग्रह तक पहुंच जाती हैं।

तोप चोरी के मामले में SDOP ने बताया कि पुलिस दो एंगल से जांच कर रही है। पहला- क्या यह किसी स्थानीय गिरोह का काम है। दूसरा- क्या यह अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जुड़ा है। पुराने चोरी के मामलों की फाइलें भी फिर से खोली गई हैं।

नरवर की एक तोप 2007 से गायब है और अब दूसरी भी चली गई। इससे MP की विरासत की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से सवाल खड़े हो गए हैं। 

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