कान्हा में 'साइलेंट किलर' की दस्तक से हड़कंप: जिस केनाइन डिस्टेंपर वायरस के संक्रमण से मरे छह बाघ, वह अफ्रीका में एक हजार शेरों की ले चुका जान
कान्हा टाइगर रिजर्व में केनाइन डिस्टेंपर वायरस से छह बाघों की मौत ने देश भर के टाइगर रिजर्व्स की चिंता ...और पढ़ें

बाघ (प्रतीकात्मक चित्र)

समय कम है?
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सौरभ सोनी, भोपाल। उमरिया में स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में केनाइन डिस्टेंपर वायरस से छह बाघों की मौत ने देशभर के टाइगर रिजर्व्स की चिंता बढ़ा दी है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए, क्योंकि तंजानिया में 30 हजार स्क्वायर किलोमीटर के सेरेनगेटी राष्ट्रीय उद्यान में 1994 में जब केनाइन डिस्टेंपर रोग का भीषण प्रकोप फैला था, तब तीन हजार में से एक हजार अफ्रीकन लॉयन (शेर) की मौत हो गई थी। कान्हा में इसके लक्षण लकड़बग्घा में भी दिखे हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इसका खतरा और भी बढ़ सकता है।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक जेएस चौहान का कहना है कि हमारे देश में तो छोटे- छोटे टाइगर रिजर्व हैं, यदि संक्रमण तेजी से फैला तो नियंत्रण मुश्किल हो जाएगा। कुत्तों से फैलने वाला यह वायरस कैट फैमिली (बाघ, तेंदुआ, चीता) के लिए घातक होता है। जेएस चौहान का कहना है कि बाघों व तेंदुओं में केनाइन डिस्टेंपर वायरस से बचने की रोग निरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ानी पड़ेगी। इसके लिए उन्होंने बाघों का भी टीकाकरण करने की आवश्यक बताई है।
पानी के छोटे स्रोत व मृत पशु का मांस बना खतरा
केनाइन डिस्टेंपर वायरस एक बड़ा गंभीर खतरा है जो कुत्तों से फैलता है। गर्मी में पानी स्रोत छोटे हो जाते हैं, इस स्रोत में कुत्ते पानी पिएंगे और तेंदुआ, बाघ व अन्य वन्यजीव भी इसी स्रोत से पानी पिएंगे तो वायरस फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा यदि बाघ या तेंदुआ ने किसी हिरण या गौर को मारा है और इसी शिकार को अगर कुत्ता खा ले और बाद में बाघ या तेंदुआ इसे खा लेता है तो भी संक्रमण फैलता है।
वायरस से बचाव के लिए एसओपी बनाकर करें पालन
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने एडवाइजरी जारी कर कहा है कि राज्य पशुपालन विभाग, स्थानीय नगरीय निकायों और अन्य संबंधित एजेंसियों के सहयोग से कुत्तों के टीकाकरण अभियान चलाया जाए। रोग संचरण के जोखिम को कम करने के लिए बफर और सीमांत क्षेत्रों में घरेलू पशुओं की आवाजाही को विनियमित कर निगरानी करें। शीघ्र पता लगाने, रिपोर्ट करने और प्रतिक्रिया देने के लिए फ्रंटलाइन कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाए। पशु चिकित्सक और वन्यजीव स्वास्थ्य संस्थानों के समन्वय से जैविक नमूनों का समय पर संग्रह, परीक्षण और विश्लेषण सुनिश्चित करें। वायरस से बचाव के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) बनाकर इसका पालन कराए।
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वायरस से बाघों को बचाने के लिए जो भी जरूरी प्रयास हैं, हम करेंगे। वायरस की रोकथाम के लिए कई उपाय किए गए हैं। हाथी के साथ पेट्रोलिंग की जा रही है। लगातार निगरानी कर कुत्तों को टाइगर रिजर्व सीमा से दूर रखा जा रहा हैं। कान्हा टाइगर रिजर्व के खापा एवं खटिया परिक्षेत्रों में लगभग 404 कुत्तों का टीकाकरण भी किया जा चुका है। इसके साथ ही प्रदेश के अन्य नेशनल पार्क व टाइगर रिजर्व में भी इसको लेकर सावधानियां बरती जा रही हैं। एनटीसीए द्वारा जारी एडवायजरी का पालन करा रहे हैं।
- डॉ. समीता राजौरा, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, मप्र वन
