Project Tiger: कुनो में बढेगा कुनबा, बोत्सवाना से आ रहे 8 चीते
मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में 28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 और चीते लाए जाएंगे। यह 'प्रोजेक्ट चीता' ...और पढ़ें
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28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 चीते कुनो आएंगे (फाइल फोटो)
HighLights
28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 चीते कुनो आएंगे
प्रोजेक्ट चीता के तहत मध्य प्रदेश में विस्तार
गांधी सागर अभयारण्य अगले चरण के लिए तैयार
डिजिटल डेस्क,नई दिल्ली। आज से 40 महीने पहले मध्य प्रदेश में विदेशी चीतों को बसाने का सिलसिला शुरू किया गया था।
17 सितंबर साल 2022 में 'प्रोजेक्ट टाइगर' के तहत 8 नामीबियाई चीतों को लाया गया था। इसी कड़ी 28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 और चीतों को लाया जाएगा।
इन सभी चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में बसाया जाएगा। इससे पहले 18 फरवरी 2023 को भी दक्षिण अफ्रीका से 12 चिटें लाए गये थे।
28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 चीते कुनो आएंगे
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ। मोहन यादव के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान चीतों के स्थानांतरण के रोडमैप को अंतिम रूप दिया गया।
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए, मुख्यमंत्री डॉ। मोहन यादव ने कहा कि चर्चा चीतों से आगे बढ़कर राज्य के विशाल आरक्षित वन क्षेत्र पर केंद्रित थी, जो पर्यटन, जैव विविधता और आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
'हमने मध्य प्रदेश में आरक्षित वनों के बड़े क्षेत्र पर चर्चा की, जो हमारे पर्यटन उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हमने अन्य राज्यों, विशेषकर असम से जंगली भैंसों को लाने पर भी चर्चा की और प्रक्रियात्मक मामलों में सहायता मांगी।'
प्रोजेक्ट चीता के तहत मध्य प्रदेश में विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा, '28 फरवरी के आसपास बोत्सवाना से चीते भी आ जाएंगे। हमें संतुष्टि है कि मध्य प्रदेश सरकार, भारत सरकार के साथ मिलकर काम करते हुए, हमारे वन्यजीव संसाधनों को और बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।'
वन अधिकारियों ने कहा कि बोत्सवाना से आगमन प्रोजेक्ट चीता की गति पर आधारित है, जिसने पहले ही भारत को वैश्विक संरक्षण चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
बारीकी से देखे जाने वाले संरक्षण प्रयोग के रूप में जो शुरू हुआ वह अब चरण-दर-चरण विस्तार में परिवर्तित हो रहा है।
गांधी सागर अभयारण्य अगले चरण के लिए तैयार
बोत्सवाना के नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के स्रोत देशों के रूप में शामिल होने के साथ, भारत आत्मनिर्भर चीता रूपक जनसंख्या स्थापित करने के लिए आवश्यक आनुवंशिक विविधता का लगातार निर्माण कर रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य प्रदेश इस दृष्टिकोण के केंद्र में है, कुनो राष्ट्रीय उद्यान पहले से ही बढ़ती चीता आबादी का समर्थन कर रहा है और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य अगले चरण के लिए तैयार है।
