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भोपाल में फर्जी IAS तृप्ति सिंह का बड़ा खुलासा, सरकारी दफ्तरों का करती थी निरीक्षण; साथ में चलती थी पुलिस

Published: Sun, 13 Sep 2026 04:00 AM (IST)

फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह ने सरकारी कार्यालयों का निरीक्षण कर अपना मायाजाल फैलाया, जिसमें पुलिस बल भी उसके साथ होता ...और पढ़ें

सरकारी कार्यालयों का निरीक्षण करती रही फर्जी आईएएस

सरकारी कार्यालयों का निरीक्षण करती रही फर्जी आईएएस

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश पर्यटन का होटल-रिसोर्ट लीज पर दिलाने और सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाली फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह ने अपना मायाजाल सरकारी कार्यालयों तक फैला रखा था।

वह सिर्फ लोगों के सामने खुद को आईएएस बताकर रौब ही नहीं झाड़ती थी, बल्कि उसी हनक के साथ सरकारी कार्यालयों का निरीक्षण भी करती रही। ऐसे निरीक्षणों के दौरान संबंधित थाने का पुलिस बल उसके साथ होता था।

अयोध्यानगर क्षेत्र के एक सरकारी दफ्तर में तृप्ति के निरीक्षण का वीडियो सामने आया है। इसमें उसके साथ अयोध्यानगर थाने के आरक्षक सुदीप राजपूत और प्रदीप दामले भी दिखाई दे रहे हैं।

पुलिस जांच में तृप्ति ने स्वीकार किया है कि उसने अयोध्यानगर थाना प्रभारी महेश लिल्हारे से कहकर निरीक्षण के लिए पुलिस बल मंगवाया था। अब बागसेवनिया पुलिस उसे दोबारा रिमांड पर लेकर इस निरीक्षण और संबंधित सरकारी दफ्तर के बारे में पूछताछ करेगी।

पुलिस आयुक्त संजय कुमार का कहना है कि पुलिस सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है।

दरअसल, तृप्ति करीब डेढ़ साल पहले अपने ड्राइवर भूपेंद्र बैरागी की एक शिकायत लेकर अयोध्यानगर थाने पहुंची थी। यहां थाना प्रभारी महेश को उसने अपना परिचय आईएएस अधिकारी के रूप में दिया। बैच पूछने पर उसने खुद को 'लास्ट बैच' की आईएएस बताया। उस समय थाना प्रभारी के छोटे भाई रोहित मौजूद थे।

थाना प्रभारी ने बताया कि रोहित यूपीएससी की तैयारी कर रहा है और तृप्ति से मार्गदर्शन का आग्रह किया। यहीं से उसने युवाओं को नौकरी दिलाने के नाम और नये कारोबारियों को होटल-रिसार्ट की लीज दिलाने के नाम पर ठगी का सिलसिला शुरू किया।

सूची बदलकर घरवालों को दिया धोखा

जांच में सामने आया है कि तृप्ति ने 2025 की संघ लोक सेवा आयोग की अंतिम चयन सूची में भी छेड़छाड़ की। आरोप है कि एक दूसरे अभ्यर्थी नमन गोयल के नाम की जगह उसने अपना नाम डालकर सूची एडिट की। पुलिस के मुताबिक इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर वह खुद को गोविंदपुरा एसडीएम बताने की कोशिश करती थी।

शादी के लिए शुरू हुई फर्जीवाड़े की कहानी

करीब पांच साल पहले तृप्ति की मुलाकात अलकापुरी निवासी बिल्डर अचल सिंह से हुई थी। बात दोस्ती और फिर प्रेम तक पहुंची। उस समय उसने खुद को यूपीएससी एस्पिरेंट बताया था। बाद में उसने यूपीएससी में सफलता और आईएएस बन जाने की कहानी बनाकर शादी कर ली।

ससुराल वालों को अपनी पहचान पर भरोसा दिलाने के लिए वह 'भारत सरकार' लिखी कार में घूमती थी।

तृप्ति के ससुर ने फर्जी पहचान बताकर शादी करने की शिकायत बागसेवनिया थाने में दर्ज कराई है। अगस्त 2026 में अशोकनगर जिले में चंदेरी पुलिस ने नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया। बागसेवनिया पुलिस भी ठगी के दो मामले दर्ज कर चुकी है।